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मेण्डलवाद पर विस्तृत टिप्पणी लिखिए।

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मानव जीवन एवं उसका विकास प्राकृतिक सम्पदाओं के ऊपर ही निर्भर है। प्राकृतिक सम्पदाओं के समाप्त होने पर मानव जीवन संकट में पड़ जाएगा। प्राकृतिक सम्पदाओं को दो समूहों में वर्गीकृत किया जा सकता है-(क) नवीकरण योग्य सम्पदाएँ तथा (ख) अनवीकरण योग्य सम्पदाएँ। नवीकरण योग्य सम्पदाओं में मृदा, जल, वन्य प्राणी तथा वन्य पौधे सम्मिलित हैं। इनका उपयोग करके पुन: उत्पादन किया जा सकता है। अनवीकरण योग्य सम्पदाओं में खनिज अयस्क, कोयला, पेट्रोलियम आदि आते हैं, जो समाप्त होने पर पुनः प्राप्त नहीं किए जा सकते। यही कारण है कि आज सम्पूर्ण विश्व प्राकृतिक सम्पदाओं के संरक्षण पर विशेष ध्यान दे रहा है। प्रकृति संरक्षण के लिए राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय प्रयास हो रहे हैं।
प्रकृति संरक्षण के अन्तर्राष्ट्रीय प्रयास (International Efforts of Conservation of Nature)
(1) सर्वप्रथम पेरिस में सन् 1902 में प्रकृति संरक्षण की अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिज्ञा-पर सभी यूरोपीय देशों ने हस्ताक्षर किए।
(2) स्विट्जरलैण्ड में सन् 1948 में प्राकृतिक सम्पदाओं के संरक्षण के लिए अन्तर्राष्ट्रीय संघ (IUCN : International Union for Conservation of Nature and Natural Resources) की स्थापना की गई। यह संघ दुर्लभ एवं विलुप्त जन्तु जातियों के बारे में जानकारी देता है।
(3) सन् 1969 में प्रकृति संरक्षण के अन्तर्राष्ट्रीय संघ (IUCN) की दसवीं गोष्ठी की एक सार्वजनिक सभा दिल्ली में हुई।
(4) सन् 1962 में आई०यू०सी०एन० का विश्व जंगली जीव कोष (W.W.L.F.) नामक एक सहायक संगठन स्थापित किया गया जिसका चिह्न काला तथा सफेद झण्डा है। इसने IUCN तथा UNEP (यूनाइटेड नेशन्स एनवायरमेन्ट प्रोग्राम) के (World Conservation Stratev) RETIUCN. संरक्षण अभियान प्रारम्भ किया है। अब इसका नामकरण W.F.N. (World Fund for Nature) किया गया है। इस संगठन के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं -
(i) संरक्षण के लाभों को जनता तक पहुँचाना।
(ii) जन्तुओं के संरक्षण का प्रचार-प्रसार करना।
(iii) संरक्षण के लिए धन एकत्रित करना।
(iv) राष्ट्रीय उद्यानों का विकास करना।
(v) संरक्षण कार्यक्रमों का विस्तार करना।
(vi) दुर्लभ जन्तु जातियों की रक्षा करना। अब तक विश्व में विश्व जंगली जीव कोष की-24 शाखाएँ खुल चुकी हैं जिनमें एक शाखा भारत में भी है। भारत में यह - शाखा सन् 1969 से कार्य कर रही है। इसने भारत को निम्नलिखित योजनाओं में सहायता दी है
(1) मद्रांस (चेन्नई) की सर्प उद्यान योजना।
(2) भारतीय शेरों के संरक्षण (टाइगर प्रोजेक्ट) की योजना।
(3) भारतीय बस्टर्ड तथा नीलगिरि टाइगर के संरक्षण की योजना|
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