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निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर ...

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
गाँधीजी ने माना कि अहिंसा ईश्वर की कल्पना की तरह अनिर्वचनीय एवं अगोचर है, पर जीवन में इसके आभास होते रहते हैं। वर्ष 1940 में कलकत्ता के समीप मलिकन्दा में अपने शीर्षस्थ साथियो की सभा में गाँधीजी ने कहा था, "अहिंसा अगर व्यक्तिगत गुण है, तो यह मेरे लिए त्याज्य है। मेरी अहिंसा की कल्पना व्यापक है मैं तो उसका सेवक हूँ, जो चीज करोड़ों की नहीं हो सकती, वह मेरे लिए त्याज्य है और मेरे साथियों के लिए भी त्याज्य होनी चाहिए। हम तो यह सिद्ध करने के लिए पैदा हुए हैं कि सत्य और अहिंसा केवल व्यक्तिगत आधार के नियम नहीं हैं। यह समुदाय, जाति और राष्ट्र की नीति हो सकती है।" उन्होंने आगे कहा, "मैंने इसी को अपना कर्तव्य माना है। चाहे सारा जगत् मुझे छोड़ दे, तो भी मैं इसे नहीं छोडूंगा। इसे सिद्ध करने के लिए ही मैं जीऊँगा और उसी प्रयत्न में मैं मरूँगा।" वास्तव में, महानायक बनने में उनके जिस विचार ने सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई वह उनका अहिंसा का ही विचार था। इसलिए देश की आजादी को अति महत्त्वपूर्ण लक्ष्य मानते हुए भी वह उसे अहिंसा को त्यागकर प्राप्त करना नहीं चाहते थे। अंग्रेजों से लड़ने के लिए हिंसा के बदले अहिंसा को हथियार बनाने का कारण भी यही था। महात्मा गाँधी के दक्षिण अफ्रीका प्रयास पर यदि हम एक विहंगम दृष्टि डालें, तो स्पष्ट होगा कि एक साधारण से व्यक्ति के रूप में पहुँचे गाँधीजी ने 22 वर्ष की लम्बी लड़ाई में अपमान, भूख, मानसिक सन्ताप व शारीरिक यातनाएँ झेलते हुए न केवल राजनीतिक, बल्कि सामाजिक व नैतिक क्षेत्र में जो उपलब्धियाँ प्राप्त की, उसकी मिसाल अन्यत्र मिलना असम्भव है। उनके भारत लौटने पर गुरुदेव टैगोर ने कहा था-"भिखारी के लिबास में एक महान् आत्मा लौटकर आई है।" सन् 1919 से लेकर 1948 में अपनी मृत्यु तक भारत के स्वाधीनता आन्दोलन के महान् एतिहासिक नाटक में गांधीजी की भूमिका मुख्य अभिनेता की रही। उनका जीवन उनके शब्दों से भी बड़ा था। उनका आचरण विचारों से महान् था और उनकी जीवन प्रक्रिया तर्क से अधिक सृजनात्मक थी।
गुरुदेव ने किसे भिखारी जैसा माना है?

A

महात्मा गाँधी को

B

गाँधीजी के लिबास को

C

अहिंसक विचारों को

D

ये सभी

लिखित उत्तर

Verified by Experts

The correct Answer is:
A

महात्मा गाँधी को
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