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22 दिसम्बर, 1939 को श्री धनसिंह नागरकोटी...

22 दिसम्बर, 1939 को श्री धनसिंह नागरकोटी का घर रिसने लगा। मल्ली ताल में दाहिनी ओर बने कुछ घर भी रिसने लगे। जाड़ों के दिनों में रिसना कम ही होता था पर अबकी पता नहीं क्यों पहाड़ी पर बने घरों में भी इस रिसाव के कारण ठण्ड का प्रभाव कुछ ज्यादा ही होने लगा। सन्तोष की बात थी कि शाम तक पानी का जोर हल्का पड़ने लगा। पर रात को जो बर्फ गिरनी शुरू हुई तो अगले दो दिन तक थमने का नाम ही नहीं लिया। 24 दिसम्बर की शाम तक आकाश खुल गया और लोग 'ह्वाइट क्रिसमस' या 'श्वेत बड़ा दिन' मनाने की तैयारी में जुट गए। बड़ा दिन जब आया तो सूर्यदेव के दर्शन हुए। छतों पर की बर्फ खिसक-गिरकर घरों के सामने जमा हो गई थी। उसे हटाकर रास्ता साफ किया गया। पिघलती बर्फ के कारण हाड़ कॅपाने वाली सर्दी में भी लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ और वे परस्पर क्रिसमस की शुभकामनाएँ और डालियों का आदान-प्रदान करने लगे। तापमान शून्य से तीन डिग्री नीचे हो गया था। पानी की आपूर्ति नलों के भीतर पानी के जमने से उनके फट जाने से रुक गई थी।
गद्यांश के आधार पर कहा जा सकता है कि

A

पहाड़ों का जीवन आसान है

B

पहाड़ों पर हमेशा त्योहार मनाए जाते हैं

C

पहाड़ों पर जीवन व्यतीत करना कठिन होता है

D

पहाड़ों पर हमेशा बर्फ जमी रहती है

लिखित उत्तर

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The correct Answer is:
C

पहाड़ों पर जीवन व्यतीत करना कठिन होता है
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