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निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए ...

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उचित उत्तर विकल्प का चयन कीजिए।
किसे कहूँ मैं शिक्षा? क्या है शिक्षा का सच? कैसा होता है शिक्षित व्यक्ति और कैसा होता है पढ़ा-लिखा समाज? मेरे गुरु श्री दयालचन्द्र जी सोनी तो पूरी एक काव्यात्मक पुस्तक लिख गए। इस पुस्तक का नाम है, "हैं। अणिभणियों शिक्षित हूँ। उनका आशय स्पष्ट है कि हर पढ़ा-लिखा आदमी अनपढ़ है। उन्होंने जब यह पुस्तक लिखी तो साफ कहा कि यह किताब उनके पूरे जीवन की शिक्षा का सार है। तब फिर हमें यह भी मान लेना चाहिए कि हमारा पूरा पढ़ा-लिखा समाज खासा अनपढ़ है, अशिक्षित है। तब फिर बताइए कि शिक्षा को कहाँ खोजें?
कहते हैं कि शिक्षा बालक के जन्म के साथ बालक को मिली प्रतिभा का विकास है। उसकी सोई हुई शक्तियों को जगाने का नाम शिक्षा है। मगर ऐसा तो तब सम्भव है जब हम जान लें कि कौन-कौन सा बालक कौन-कौन सी प्रतिभा के साथ पैदा हुआ है? उसके शरीर में एवं उसके मन-मस्तिष्क में कौन-कौन सी शक्तियाँ सोई हुई हैं?
इसका अर्थ यह हुआ कि जो जो बालक शाला में आया है उसको हम पहले पढ़ें। हर बालक को पढ़-पढ़ कर पहचानें कि वह क्या है? उसकी प्रदत्त प्रतिभा क्या है? और कौन-कौन सी सुषुप्त शक्तियों को लिए हुए वह हमारे सामने उपस्थित हुआ है?
इस गद्यांश में शिक्षा का कौन-सा सिद्धान्त निहित है?

A

सभी बच्चे समान रूप से प्रतिभाशाली होते हैं

B

सभी बच्चों में वैयक्तिक भिन्नता होती हैं

C

शक्तियाँ सदैव सुषुप्त अवस्था में ही रहती हैं

D

पढ़े-लिखे लोग अनपढ़ होते हैं

लिखित उत्तर

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The correct Answer is:
D

पढ़े-लिखे लोग अनपढ़ होते हैं
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