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Class 14
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मोर के सिर की कलगी और सघन, ऊँची तथा चमकी...

मोर के सिर की कलगी और सघन, ऊँची तथा चमकीली हो गई। चोंच अधिक बंकिम और पैनी हो गई, गोल आँखों में इन्द्रनी की नीलाभ द्युति झलकने लगी। लम्बी नील-हस्ति ग्रीवा की हर भंगिमा में धूप-छांही तरंगें उठने-गिरने लगी। दक्षिण-वाम दोनों पंखों में सलेटी और सफेद आलेखन स्पष्ट होने लगे। पूँछ लम्बी हुई और उसके पंखों पर चन्द्रिकाओं के इन्द्रधनुषी रंग उद्दीप्त हो उठे। रंग-रहित पैरों को गरवीली गति की एक नई गरिमा से रंजित कर दिया। उसका गरदन ऊँची कर देखना, विशेष भंगिमा के साथ उसे नीची कर दाना चुगना, पानी पीना, टेढ़ी कर शब्द सुनना आदि क्रियाओं में जो सुकुमारता और सौन्दर्य था, उसका अनुभव देखकर ही किया जा सकता है। गति का चित्र नहीं आंका जा सकता।
मोरनी का विकास मोर के समान चमत्कारिक तो नहीं हुआ, परन्तु अपनी लम्बी धूप-छांह गर्दन, हवा में चंचल कलगी, पंखों की श्याम-श्वेत पत्रलेखा, मन्थर गति आदि से वह भी मोर की उपयुक्त सहचारिणी होने का प्रमाण देने लगी।
प्रस्तुत गद्यांश है

A

एक शब्द चित्र

B

एक निबन्ध

C

एक रिपोर्ताज

D

एक कहानी

लिखित उत्तर

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The correct Answer is:
A
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