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BIOLOGY
निम्न कथनों में से कौन-सा सही नहीं है? I...

निम्न कथनों में से कौन-सा सही नहीं है? I. DNA जलविरागी अणु है, जो कोशिका झिल्ली के पार नहीं जा सकता है। II. एमोबैक्टीरियम ट्यूमिफेसिन्स DNA एक टुकड़े, जो tDNA कहलाता है, को Ti प्लाज्मिड में स्थानान्तरित करता है। जो सामान्य पादप कोशिका को रोगजनकों के प्रति रसायन उत्पन्न करने के लिए अर्बुद कोशिका में रूपान्तरित कर देता है। III. जन्तुओं में रेट्रो, एडीनो, पैपीलोमा विषाणु, आदि क्लोनिंग वाहक की भाँति प्रयुक्त होते हैं, जिसका कारण इनकी सामान्य कोशिका को कैन्सर कोशिका में बदलने की क्षमता है। IV. जीन अभियान्त्रिकी में विभिन्न स्रोतों के DNA समान प्रतिबन्धन एन्जाइमों से काटे जाते हैं, ताकि दोनों DNA खण्डों में समान सलांगी सिरे हों।

लिखित उत्तर

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कैन्सर (Cancer)
कोशिकाओं के कोशिका चक्र (cell cycle) एवं विभाजन की प्रक्रियाओं पर कुछ बाह्य कोशिकीय वृद्धि कारकों (extra cellular growth factors) तथा कुछ विशेष जीन्स का नियन्त्रण होता है। आधुनिक वैज्ञानिकों के अनुसार लंगभग 20 जोड़ी जीन्स कोशिका विभाजन को प्रेरित करते हैं। इन जीन्स को आदि ओन्कोजीन्स (proto oncogenes) कहते हैं।
यदि DNA के किसी अणु के द्विगुणन के समय त्रुटि के कारण आदि ओन्कोजीन्स में उत्परिवर्तन हो जाता है तो ये ओन्कोजीन्स (oncogenes) में बदल जाते हैं, इसके फलस्वरूप उत्परिवर्तित कोशिका की वृद्धि और विभाजन अनियन्त्रित हो जाता है। ऐसी कोशिका को नवद्रव्यीय कोशिका (neoplastic cell) या कैंसर कोशिकाएँ या मेटास्टेटिक कोशिकाएँ कहते हैं। ओन्कोजीन्सयुक्त नवद्रव्यीय कोशिकाएँ अनियन्त्रित तीव्र वृद्धि और विभाजन. के फलस्वरूप गाँठ सदृश अर्बुद या ट्यूमर (tumour) रचना बनाती हैं। यह हानिरहित गाँठ के रूप में शरीर में वर्षों तक रह सकता है, लेकिन ट्यूमर की एक या अधिक कोशिकाएँ आदि ओन्कोजीन्स में उत्परिवर्तन के कारण यदि नवद्रव्यीय (neoplastic) हो जाती हैं तो ट्यूमर कैन्सरी (cancerous or malignant) हो जाता है। कोशिकाएँ कैन्सर रोग का कारण बनती हैं।
एपिथीलियम कोशिकाओं से उत्पन्न कैन्संरी ट्यूमर को कार्सिनोमा (carcinoma), संयोजी ऊतक से बना कैन्सरी ट्यूमर सार्कोमा (sarcoma), रुधिरोत्पादक तथा लिम्फोइड ऊतकों से बना कैन्सरी ट्यूमर लिम्फोमा (lymphoma) कहलाता है। लिम्फोमा के कारण श्वेत रुधिराणुओं में अनियन्त्रित विभाजन होने लगता है, इससे रुधिर कैन्सर या ल्यूकीमिया (leukaemia) रोग हो जाता है।
कैन्सर कोशिकाएँ पोषक पदार्थों की अधिकतम मात्रा का उपयोग करने लगती हैं। इस कारण शरीर की अन्य कोशिकाओं को पोषक तत्त्व नहीं मिल पाते। शरीर कोशिकाओं के क्षीण होने के कारण मृत्यु हो जाती है। रेडियोथिरैपी, कैमोथिरैपी तथा शल्य चिकित्सा द्वारा कैंसर का प्रारम्भिक अवस्था में नियन्त्रण किया जा सकता है।
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