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जीवाश्मों की आयु निर्धारित की जाती है :...

जीवाश्मों की आयु निर्धारित की जाती है :

लिखित उत्तर

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जीवाश्म की आयु का निर्धारण
(Determination of the age of Fossils)
आदि पृथ्वी पर जीवों की उत्पत्ति से अब तक के जैव विकास को समझने के लिए यह ज्ञात करना आवश्यक है कि जीवाश्म किस समय का है, इसके लिए जिस चट्टान से जीवाश्म प्राप्त होता है, उसकी आयु का निर्धारण किया जाता हैं। चट्टानों की आयु ज्ञात करने के लिए चट्टानों में पाए जाने वाले रेडियोधर्मी तत्व एवं उनके रेडियोधर्मिताविहीन समस्थानिक तत्त्वों के अनुपात को ज्ञात करते हैं जैसे यूरेनियम (`U^(298)`) लगभग 450 करोड़ वर्ष में क्षय होकर 50% सीसे (Pb206) में बदल जाता है। रेडियोधर्मी कार्बन (`C^(14)`) 5568 वर्षों में क्षय होकर लगभग आधा (50%) रह जाता है। इस विधि द्वारा 40,000-50,000 वर्ष पुराने जीवाश्म की आयु की गणना सम्भव है। इसी प्रकार पोटैशियम (`K^(40)`) क्षय होकर आर्गन (Argon) में बदलता रहता है। रेडियोऐक्टिव पोटैशियम का अर्द्ध-आयुकाल लगभग `1.3 xx 10^9` वर्ष होता है। इसकी रेडियोधर्मिता खोने की दर सबसे कम होती है। इस विधि से तीन अरब वर्ष से भी अधिक पुरानी चट्टानों की आयु निर्धारित की जा सकती है। रेडियोधर्मिता क्षय की यह प्राकृतिक प्रक्रिया चट्टान की घड़ी (clock of the rock) का काम करती है। इन तत्त्वों की रेडियोधर्मिता खोने की दर तथा इनके समस्थानिक तत्त्वों की आनुपातिक मात्रा ज्ञात करके चट्टानों (जीवाश्मों) की आयु निर्धारित की जा सकती है। इलेक्ट्रॉन स्पिन रेजोनेन्स तथा जीवाश्म D.N.A. विधि आधुनिक विधि है। इसकी व्याख्या रिंक (Rink, 1998) ने की है।
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