विभज्योतक (Meristematic tissue) विभाजनशील कोशिकाओं से बना ऊतक ही विभज्योतक कहलाता है अर्थात यह ऐसी कोशिकाओं का समूह है जो या तो सतत विभाजन प्रावस्था में रहती हैं या जिनमें विभाजन की क्षमता (capacity to divide) बनी रहती है। इस प्रकार के ऊतक की गतिविधि से नयी-नयी कोशिकाओं का निर्माण होता है, फलस्वरूप पादप की लम्बाई अथवा मोटाई में वृद्धि होती है। इस प्रकार के ऊतक की कोशिकाओं के विभाजन से बनी कोशिकाएँ, वृद्धि. करके तथा विभेदन (differentiation) द्वारा स्थायी ऊतक (permanent tissue) का निर्माण करती हैं।
परिभाषा-पादपों में विशिष्ट स्थानों पर स्थित कोशिकाओं के वे समूह जिनकी कोशिकाओं में सतत विभाजन की क्षमता होती है विभज्योतक कहलाते हैं। इनके विभाजन से स्थायी ऊतकों का निर्माण होता है।
स्थिति (Location)-विभज्योतकी कोशिकाएँ पादपों में । कुछ विशिष्ट स्थानों तक ही सीमित रहती हैं। अत: ये वे स्थान हैं शाषस्थ विभज्योतक जो कोशिका विभाजन द्वारा पादप शरीर में कुछ नयी कोशिकाएँ जोड़ते रहते हैं। पादपों में इनकी स्थिति के आधार पर यह निम्न प्रकार के हो सकते हैं-शीर्षस्थ विभज्योतक, पार्वीय विभज्योतक तथा अन्तर्वेशित विभज्योतक।
अन्तर्विष्टविभज्योजक विभज्योतक द्वारा उत्पन्न नयी कोशिकाएँ प्रारम्भ में विभज्योतकी कोशिकाओं के समान ही होती हैं। लेकिन प्रारम्भिक वृद्धि व परिपक्वन के बाद उनके लक्षणों में बदलाव प्रारम्भ हो जाते हैं। विभेदनं (differentiation) की प्रक्रिया द्वारा वह विभिन्न प्रकार के स्थायी ऊतकों का निर्माण कर देती हैं।
(a) शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical meristem)-यह विभज्योतक मुख्य प्ररोह शीर्ष (shoot apex), शाखाओं के शीर्ष -संवहनी कैम्बियम। "पार्वीय विभज्योजक व मूल शीर्ष (root apex) पर स्थित होता है। इस विभज्योतक की कॉर्क कैम्बियम ।" कोशिकाओं में विभाजन से पादप की लम्बाई में वृद्धि होती है।
(b) पाीय विभज्योतक (Lateral meristem)-----नाम के अनुरूप यह विभज्योतक पादप के तने व जड़ की अक्ष के पाश्वीय भागों (lateral sides) में उपस्थित होता है अथवा वृद्धि के समय बनता है। इसकी सक्रियता से तने व जड़ की मोटाई में (in girth) वृद्धि होती है अर्थात् इन अंगों का व्यास (diameter) बढ़ता है। विभज्योतक प्राथमिक व द्वितीयक प्रकार के हो सकते हैं। द्वितीयक विभज्योतकों, जैसे-पाीय विभज्योतक कॉर्क कैम्बियम का विकास द्वितीयक वृद्धि या मोटाई में वृद्धि के समय ही होता है।
(c) अन्तर्वेशित विभज्योतक (Intercalary meristem)-पादपों में पत्तियों व पर्वो (internodes) के आधार पर स्थित विभज्योतक अन्तर्वेशित विभज्योतक कहलाता है। यह विभज्योतक स्थायी ऊतकों के बीच में स्थित होता है। पर्वो पर यह पर्व . सन्धियों (nodes) के दोनों ओर स्थित होता है। इस विभज्योतक के कारण भी पादपों की लम्बाई में वृद्धि होती है।