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BIOLOGY
संवहनीय ऊतक से आप क्या समझते है ? रुधिर ...

संवहनीय ऊतक से आप क्या समझते है ? रुधिर की संरचना एवं कार्यो का वर्णन कीजिए |

लिखित उत्तर

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रुधिर या रक्त (Blood) रक्त (Blood)-रक्त प्रमुख प्रकार का तरल संयोजी ऊतक है। यह ऊतक प्रमुखत: दो प्रकार के अवयवों से मिलकर बना होता है-जलीय तरल जो प्लाज्मा कहलाता है तथा निलम्बित कोशिकाएँ। रक्त का बड़ा भाग तरल मैट्रिक्स से बना होता है जिसमें कोशिकाएँ निलम्बित रहती हैं। इनके मैट्रिक्स में तन्तु (fibre) अनुपस्थित होते हैं। रक्त या संवहनी ऊतक में मैट्रिक्स का निर्माण इनकी कोशिकाओं द्वारा नहीं होता।
1. प्लाज्मा (Plasma)-रक्त की मैट्रिक्स जलीय तरल के रूप में होती है तथा प्लाज्मा कहलाती है। यह बहुत हल्के पीले रंग का द्रव है जिसमें लगभग 92% जल व 8% घुलित पदार्थ पाए जाते हैं। इन पदार्थों में कार्बनिक व अकार्बनिक दोनों प्रकार के पदार्थ सम्मिलित होते हैं। प्रमुख कार्बनिक पदार्थ हैं--प्रोटीन्स, जैसे-ऐल्बुमिन, ग्लोब्यूलिन, फाइब्रिनोजन आदि तथा ग्लूकोस, अमीनो अम्ल, वसीय अम्ल, यूरिया, यूरिक अम्ल, हॉमोन्स आदि। अकार्बनिक पदार्थों में क्लोराइड, बाइकार्बोनेट, कैल्सियम आदि जैसे आयन व घुलित गैसें सम्मिलित होती हैं।
2. रुधिर कणिकाएँ (Blood corpuscles)-ये रुधिर का 45% भाग बनाती हैं। ये प्रमुखतः तीन प्रकार की होती हैं-
(i) लाल रुधिर कणिकाएँ (Erythrocytes or Red Blood Corpuscles-RBCs)-मनुष्यं तथा अन्य स्तनियों में ये गोल, चपटी, तश्तरीनुमा, केन्द्रक रहित तथा उभयावतल (biconcave) होती हैं। मनुष्य के एक घन मिली रुधिर में इनकी संख्या लगभग 54 लाख तक होती है। इनके अधिक संख्या में होने के कारण ही रुधिर का रंग लाल होता है। इनमें एक विशेष प्रकार की प्रोटीन हीमोग्लोबिन होती है। यह ऑक्सीजन वाहक का कार्य करती है। लाल रुधिर कणिकाएँ शरीर की लम्बी हड्डियों के लाल अस्थि मज्जा (red bone marrow) में बनती रहती हैं।

(ii) श्वेत रुधिर कणिकाएँ (Leucocytes or White Blood Corpuseles-WBCs)—ये बड़े परिमाप की विभिन्न आकार तथा संरचनाओं में मिलने वाली कोशिकाएँ हैं। इनकी संख्या लाल रुधिर कणिकाओं की अपेक्षा कम होती है। प्रति घन मिली रुधिर में इनकी संख्या 6 से 11 हजार होती है।
श्वेत रुधिर कणिकाएँ रंगहीन.तथा केन्द्रक युक्त होती हैं। ये जीवाणुओं आदि रोगाणुओं पर आक्रमण करती हैं, उनका भक्षण करती हैं एवं प्रतिरक्षी (एण्टीबॉडी-antibodies) का निर्माण करके शरीर की रोगाणुओं से रक्षा करती हैं। इनके प्रमुख प्रकार हैं
(a) कणिकामय श्वेत रुधिर कणिका (Granulocytes), जैसे—बेसोफिल, न्यूट्रोफिल व इओसिनोफिला
(b) कणिकाविहीन श्वेत रुधिर कणिका (Agranulocytes), जैसे-लिम्फोसाइट व मोनोसाइट।
(iii) रुधिर प्लेटलेट्स (Blood platelets)-ये रुधिर में छोटी-छोटी कणिकाओं के रूप में होती हैं। इनकी संख्या 2 से 5 लाख प्रति घन मिली रुधिर होती है। ये केन्द्रकविहीन, संकुचनशील, गोल या अण्डाकार, तश्तरीनुमा होती हैं। ये रुधिर का थक्का बनने के लिए आवश्यक हैं।
रुधिर के कार्य (Functions of Blood)
(i) रक्त का प्रमुख कार्य श्वसनीय गैसों (ऑक्सीजन व कार्बन डाइऑक्साइड) का परिवहन है।
(ii) रक्त, पाचन के अन्तिम उत्पाद अर्थात् पोषक पदार्थ, अपशिष्ट पदार्थ जैसे यूरिया तथा हॉर्मोन्स आदि का भी परिवहन करता है।
(iii) रक्त शरीर की रोगों से रक्षा करने में सहायक है।
(iv), यह शरीर का तापमान स्थिर बनाए रखने में भी सहायक है तथा ऊष्मा का समान वितरण करता है।
(v) रक्त प्लेटलेट्स रक्त के थक्का बनने में सहायता करती हैं, अत: अत्यधिक रक्तस्राव से बचाती हैं।
(vi) यह शरीर में जल व लवण सन्तुलन, pH नियसन में भी सहायक होता है।
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