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गिजुभाई न केवल बच्चों की क्षमताओं, बौद्ध...

गिजुभाई न केवल बच्चों की क्षमताओं, बौद्धिकता में विश्वास व्यक्त करते हैं अपितु वे उनकी सृजनात्मकता में भी अगाध आस्था रखते हैं। उनके अनुसार कुछ हत्याएँ पीनल कोड की धारा के अधीन नहीं आती। उनमें कानूनवेत्ताओं को अपराध जैसी कोई चीजें नजर नहीं आतीं। कानूनवेत्ताओं की न्याय नीति-सम्बन्धी मर्यादाएँ सिर्फ पीनल कोड से बँधी होती हैं। शिक्षाशास्त्रियों के पास राज्य, रूढ़ि अथवा धर्म की कोई सत्ता नहीं है इसलिए जीवन के प्रति जो अपराध होते हैं उनके लिए न कोई पीनल कोड, न कोई उन्हें निन्दनीय मानता, न कोई धार्मिक भय है। जीवन के प्रति होने वाला एक ऐसा ही अपराध है-बालक की सृजन-शक्ति की हत्या। ईश्वर ने मनुष्य का सृजन किया और उसे अपनी सृजन-शक्ति प्रदान की तथा ईश्वर की शक्ति मनुष्य के सृजन की अनन्त शक्ति के समान ही अनगिनत है। साहित्य एक सृजन है, चित्रकला दूसरा सृजन है, संगीत तीसरा सृजन है और स्थापत्य चौथा सृजन है। इस तरह गिनने बैठा जाए तो मनुष्य के द्वारा बनाई गई अनेकानेक कृतियों को गिनाया जा सकता है। जब शिक्षक या अभिभावक यह तय करते हैं कि बच्चे को क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए-वस्तुतः इस निर्णयों में ही वे बालक की सृजन-शक्ति का दमन कर देते हैं।
कौन-सा अपराध पीनल कोड की धारा के अधीन नहीं आता है ?

A

बालक की सृजन-शक्ति का दमन

B

रिश्वत

C

धोखाधड़ी करना

D

चोरी करना

लिखित उत्तर

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The correct Answer is:
A
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