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BIOLOGY
प्रजनन की प्रमुख अवस्थाओं का उल्लेख कीजि...

प्रजनन की प्रमुख अवस्थाओं का उल्लेख कीजिए।

लिखित उत्तर

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हृदय की संरचना (Structure of Heart)-विस्तृत उत्तरीय प्रश्नोत्तर का प्रश्न 4 देखिए।
हृदय जब भ्रूणकाल में एक बार स्पन्दन प्रारम्भ कर देता है, तब यह जीवनपर्यन्त बिना रुके, नियमित दर से रुधिर को पम्प करता रहता है।
हृदय स्पन्दन
.मानव व अन्य स्तनधारियों के हृदय में स्पन्दन पेशीचालित या मायोजेनिक (myogenic) होता है। हृदय स्पन्दन का प्रारम्भ दाएँ अलिन्द में स्थित शिरा अलिन्द घुण्डी या सायनोएट्रियल नोड (sinoatrial node or SA node) से होता है। इसे गति प्रेरक (pace maker) भी कहते हैं। इसमें उत्पन्न हृद आवेंग तरंग के रूप में हृद पेशियों में प्रवेश कर जाते हैं। इसी प्रकार का एक गति निर्धारक अन्तरा-अलिन्द पट पर स्थित अलिन्द-निलय नोड (A.V. node) होती है। हृदय स्पन्दन दाएँ अलिन्द से प्रारम्भ होकर बाएँ अलिन्द में और फिर A.V. node द्वारा बण्डल ऑफ हिस (bundle of His) से होते हुए पुरकिन्जे के तन्तुओं (fibres of Purkinje) द्वारा निलय की भित्तियों में फैल जाता है। हृदय एक नियमित गति से क्रमशः प्रकुंचन. (systole) तथा अनुशिथिलन (diastole), करता है। हृदय का सिकुड़ना प्रकुंचन तथा फैलना अनुशिथिलन कहलाता है। अलिन्द प्रकुंचन के फलस्वरूप रुधिर निलयों में भर जाता है, जिसके कारण निलय की आन्तरिक भित्ति पर रुधिर दाब उत्पन्न होता है। त्रिवलनीय एवं द्विवलनीय कपाट बन्द हो जाते हैं। निलय में प्रकुंचन के फलस्वरूप निलय से रुधिर फुफ्फुसीय (pulmonary) तथा कैरोटिको सिस्टेमिक चापों में चला जाता है। इस प्रक्रिया में लगभग 0.3 सेकण्ड का समय लगता है। निलय प्रकुंचन के साथ ही अलिन्दों में अनुशिथिलन की प्रक्रिया प्रारम्भ हो जाती है। महाशिराओं से दाएँ अलिन्द में अशुद्ध रक्त तथा पल्मोनरी शिरा से बाएँ अलिन्द में शुद्ध (ऑक्सीजनित) रक्त भर जाता है। इस प्रक्रिया में लगभग 0.5 सेकण्ड का समय लगता है।

मनुष्य का हृदयं एक मिनट में 72 से 75 बार स्पन्दित होता है। यह हृदय स्पन्दन की दर (rate of heartbeat) कहलाती है।
हृदय चक्र तथा रुधिर बहाव
प्रत्येक हृदय स्पन्दन के समय अलिन्द व निलंय एक साथ नहीं सिकडते। पहले अलिन्द और फिर निलय सिकड़ते हैं और अन्त में अलिन्द तथा निलय दोनों कुछ समय के लिए अनुशिथिलन अवस्था में रहते हैं। अलिन्द व निलयों का प्रकुंचन तथा अनुशिथिलन एक निश्चित क्रम में होता है। इसे हृदय चक्र या कार्डियक चक्र (cardiac cycle) कहते हैं।
प्रत्येक हृदय चक्र में निम्नलिखित अवस्थाएँ होती हैं-
1. सम्मिलित अनुशिथिलन (Joint Diastole)-हृदय स्पन्दन प्रारम्भ होने से पहले अलिन्द व निलय दोनों अनुशिथिलन की अवस्था में होते हैं। शिराओं से रुधिर अलिन्दों में आता है तथा अलिन्दों से रुधिर निलयों में जाता रहता है।
2.अलिन्द प्रकुंचन (Atrial Systole)-प्रकुंचन का प्रारम्भ दाएँ अलिन्द से होता है, जो बाएँ अलिन्द तक फैल जाता है। अलिन्द प्रकुंचन के समय महाशिराओं के छिद्र बन्द हो जाते हैं। द्विवलन तथा त्रिवलन कपाट खुले रहते हैं तथा अलिन्दों का रुधिर निलयों में पहुँच जाता है।
3. निलय प्रकुंचन (Ventricular Systole)--अलिन्द प्रकुंचन के पश्चात् निलय प्रकुंचन प्रारम्भ होता है। अब द्विवलन तथा त्रिवलन कपाट बन्द हो जाते हैं, जिस कारण निलयों में रुधिर दाब बढ़ने लगता है। इसके फलस्वरूप अर्द्धचन्द्राकार कपाट खुल जाते हैं और निलयों से रुधिर पल्मोनरी चाप तथा कैरोटिको सिस्टेमिक चाप में प्रवाहित होने लगता है।
4.निलय अनुशिथिलन (Ventricular Diastole)---निलय संकुचन के पश्चात् निलय में अनुशिथिलन प्रारम्भ होता है। इस समय अर्द्धचन्द्राकार कपाट बन्द हो जाते हैं। अत: चापों से रुधिर वापस निलय में नहीं आ सकता।
निलय में दाब कम हो जाने के कारण द्विवलन तथा त्रिवलन कपाट खुल जाते हैं और अलिन्दों से रुधिर निलयों में आने लगता है।
इस प्रकार एक हृदय चक्र (cardiac cycle) पूरा होता है। हृदय चक्र की अवधि स्पन्दन दर के उल्टे अनुपात में होती हैं। मनुष्य की हृदय स्पन्दन दर 75 प्रति मिनट होती है। अत: हृदय चक्र की अवधि `(60)/(75)=0.8` अत: हृदय चक्र की अवधि और शिथिलन में 0.1 तथा 0.7 सेकण्ड और निलयों में 0.3 तथा 0.5 सेकण्ड होता है। इसके पश्चात् नया हृदयं स्पन्दन प्रारम्भ होता है।
हृदयं स्पन्दन का नियमन
लयबद्धता हृद पेशियों का जन्मजात गुण है, किन्तु तन्त्रिका तन्त्र तथा हॉर्मोन्स भी हृदय स्पन्दन का नियन्त्रण करते हैं।
तन्त्रिका तन्त्र द्वारा नियन्त्रण (Control by Nervous System)-मस्तिष्क में मेडुला ऑब्लांगेटा (medulla oblongata) में हृदय स्पन्दन नियन्त्रण का केन्द्र स्थित होता है। इसके अतिरिक्त परानुकम्पी तन्त्रिका तन्त्र (parasympathetic nervous system) का आवेग हृदय स्पन्दन की दर को कम कर देता है। अनुकम्पी तन्त्रिका तन्त्र (sympathetic nervous system) का आवेग हृदय स्पन्दन की दर को तीव्र कर देता है।
2. हॉर्मोन्स द्वारा नियन्त्रण (Control by Hormones)--एड्रीनलीन (adrenaline) तथा थायरॉक्सिन (thyroxine) हॉर्मोन हृदय स्पन्दन की दर को बढ़ा देते हैं।
3. रासायनिक कारक (Chemical Agents)-रुधिर में `CO_(2)` की मात्रा (अम्लीयता) इसके pH को कम करती है। इससे हृद स्पन्दन की गति बढ़ जाती है। रुधिर की क्षारीयता हृदय स्पन्दन दर को कम करती है।
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