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BIOLOGY
न्यूक्लिओटाइड्स क्या होते है? इनके अणुओं...

न्यूक्लिओटाइड्स क्या होते है? इनके अणुओं का संश्लेषण किस प्रकार होता है? विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।

लिखित उत्तर

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D.N.A. अणु ही प्रकृति में ऐसा अणु है जिसमें स्वद्विगुणन की क्षमता होती है। D.N.A. द्विगुणन या प्रतिकृतिकरण (D.N.A. replication) कोशिका विभाजन की अन्तरावस्था (interphase) की S-अवस्था (S-phase) में होता है। डी० एन० ए० द्विगुणन या प्रतिकृतिकरण (Replication of D.N.A.) D.N.A. द्विगुणन अर्द्ध-संरक्षी (semi-conservative) तथा अर्द्ध-असतत (semi-dis- continuous) होता है। D.N.A. द्विगुणन अर्द्ध-संरक्षी होने का अर्थ है कि नए बने D.N.A. अणु में एक स्ट्रैण्ड पैतृक होगा तथा दूसरा स्ट्रैण्ड नवनिर्मित होगा। D.N.A. प्रतिकृतिकरण की पुष्टि मेसेल्सन तथा स्टाल (Meselson and Stahl.s : 1928) ने ई. कोलाई जीवाणु में प्रयोग द्वारा की D.N.A. द्विगुणन अर्द्ध-असतत (semidiscontinuous) होने का अर्थ है कि D.N.A. द्विगुणन के समय एक स्ट्रैण्ड पर संश्लेषण लगातार या सतत (continuous) होता है तथा एक स्ट्रैण्ड पर संश्लेषण असतत (discontinuous) होता है अर्थात् D.N.A. के छोटे-छोटे टुकड़ों का निर्माण होता है, जो बाद में आपस में जुड़ जाते हैं। D.N.A. द्विगुणन निम्नलिखित चरणों में होता है 1. समारम्भन बिन्दु का अभिज्ञान (Recognition of initiation point)-जिस स्थान से D.N.A. द्विगुणन का प्रारम्भ होता है, उस स्थान को प्रारम्भन का स्थान (initiation site or replication origin) कहते हैं। जिस स्थान से D.N.A. का खुलना प्रारम्भ होता है, उसे बैबल (babble) कहते हैं। पूर्वकेन्द्रकीय कोशिका एवं वाइरस में द्विगुणन प्रारम्भ होने का केवल एक ही बिन्दु होता है, जबकि सुकेन्द्रकीय कोशिका में D.N.A. अणु में हजारों स्थानों पर एकसाथ द्विगुणन प्रारम्भ होता है तथा अनेक बैबल (babble) नजर आते हैं। 2. दोहरे हेलिक्स का खुलना (Unwinding of double helix)-एन्जाइम हेलीकेसेज (helicases) D.N.A. के स्ट्रैण्डों को खोलने का कार्य करता है। जब स्ट्रैण्ड खुल जाते हैं, तब एन्जाइम टोपोआइसोमरेज (topoisomerase) या D.N.A. गाइरेज (gyrases) एन्जाइम की सहायता से स्ट्रैण्ड को काटा जाता है जिससे कुण्डलित (coiled) D.N.A. का तनाव समाप्त हो जाता है। हेलिक्स डीस्टैबिलाइजिंग प्रोटीन (helix destabilizing protein) अलग हुए स्ट्रैण्डों को अलग ही बनाए रखने में सहायक होती है। SSB प्रोटीन (Single strand binding protein) दोनों रज्जुकों को अलग-अलग रोके रखती है। इसके फलस्वरूप एक Y आकार की प्रतिकृति द्विशाख (replication fork) जैसी रचना बन जाती है। 3. न्यूक्लियोसाइड्स का सक्रियकरण (Activation of nucleosides)-केन्द्रकद्रव्य में उपस्थित न्यूक्लियोसाइड फॉस्फोरिलेज (phosphorylase) एन्जाइम तथा ए० टी० पी० की उपस्थिति में सक्रिय हो जाते हैं। इस प्रक्रिया को फॉस्फोरिलेशन (phosphorylation) कहते हैं। DNA 4. आर० एन० ए० प्राइमर का निर्माण (Formation of R.N.A. primer)-D.N.A. टेम्पलेट (D.N.A. template) पर पहले R.N.A. का एक छोटा टुकड़ा स्थित होता है। इसे R.N.A. प्राइमर या प्रारम्भक रज्जुक (R.N.A. primer) कहते हैं। R.N.A. प्राइमर का निर्माण प्राइमेज (primase) एन्जाइम या आर० एन० ए० पॉलिमरेज (R.N.A. polymerase) की सहायता से होता है। चित्र-6.9 : D.N.A. अणु का खुलना। 5. डी० एन० ए० श्रृंखला का निर्माण तथा लम्बा होना (Formation of D.N.A. chain and elongation of chain)-डी० एन०ए० पॉलिमरेज III (D.N.A. polymerase III) या रेप्लिकेज (replicase) एन्जाइम R.N.A. प्राइमर में 5-3 दिशा में नए क्षारकों को जोड़ता है। इन क्षारकों का क्रम D.N.A. टेम्पलेट के अनुसार होता है। D.N.A. के दोनों स्ट्रैण्ड प्रतिसमान्तर होते हैं अर्थात् एक स्ट्रैण्ड की दिशा 5.-3. होती है और दूसरे स्ट्रैण्ड की दिशा 3. - 5. होती है। - सतत संश्लेषण (Continuous synthesis)-एन्जाइम D.N.A. पॉलिमरेज III क्षारकों को केवल 5. `to` 3 दिशा में ही जोड़ सकता है। अत: 3. `to` 5. दिशा वाले स्ट्रैण्ड (टेम्पलेट) पर D.N.A. श्रृंखला का सतत निर्माण होता है। जिस स्ट्रैण्ड का निर्माण सतत होता है, उसे अग्रग रज्जुक या लीडिंग स्ट्रैण्ड (leading strand) कहते हैं।


असतत संश्लेषण (Discontinuous synthesis)—जिस स्टैण्ड का निर्माण 3-5 दिशा वाले पितृ स्टैण्ड (टेम्पलेट) पर होता है, यह सतत नहीं होता। इसका निर्माण छोटे-छोटे टुकड़ों से होता है जिन्हें ओकाजाकी खण्ड (Okazaki fragments) कहते हैं। ये 1000-2000 न्यूक्लियोटाइड्स से बने होते हैं। इन टुकड़ों को एन्जाइम डी० एन० ए० लाइगेज (D.N.A. ligase) की सहायता से जोड़ा जाता है। इस प्रकार 3., 5 दिशा.वाले स्टैण्ड पर D.N.A. का असतत (discontinuous) निर्माण होता है। ओकाजाकी खण्डों से बने स्ट्रैण्ड को पश्चगामी रज्जुक (lagging. strand) कहते हैं। 6. द्विगुणन शाखा की गति (Movement of replication fork)-D.N.A. द्विगुणन के साथ ही D.N.A. अणु का दोहरा कुण्डल आगे की ओर खुलता चला जाता है।। SWIVEL POINT 7.आर० एन०ए० प्राइमर का हटना (Removal of R.N.A. primer)-D.N.A. श्रृंखला की लम्बाई बढ़ जाने के पश्चात् R.N.A. प्राइमर श्रृंखला से हट, जाता है। एन्जाइम आर० एन० ऐज एच (R.N.A.ase H) की सहायता से R.N.A. प्राइमर को D.N.A. OLD STRANDS श्रृंखला से हटाया जाता है। R.N.A. प्राइमर के हटने से उत्पन्न रिक्त स्थान को भरने में एन्जाइम डी० एन०ए० पॉलिमरेज I (D.N.A. polymerase I) सहायता करता है। 8. डी० एन० ए० द्विगुणन का अन्त (Termination of D.N.A. SSTRANDS replication)—जब D.N.A. निर्माण पूर्ण हो जाता है, तब एक टर्मिनेशन बाइंडिंग प्रोटीन (termination binding protein) एन्जाइम D.N.A. हेलीकेज (D.N.A. helicase) एन्जाइम की क्रिया को रोक देता है। D.N.A. द्विगुणन का अन्त टर्मिनेशंन जोन (termination चित्र-6.11 : जीवाणु गुणसूत्र में zone) में पहुंचने पर या दूसरी ओर के द्विगुणन बिन्दु से मिलने पर होता है।
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