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आनुवंशिक कूट क्या है? इसकी विशेषताएँ लिख...

आनुवंशिक कूट क्या है? इसकी विशेषताएँ लिखिए।

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संदेशवाहक R.N.A. अणु पर उपस्थित तीन क्षारकों का एक समूह, जो एक ऐमीनो अम्ल को पहचानता है, आनुवंशिक कूट या जेनेटिक कोड (genetic code) कहलाता है। D.N.A. तथा R.N.A. में उपस्थित सूचनाओं का पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला के रूप में प्रकटन (expression) एक जटिल व रोचक प्रक्रिया है। आनुवंशिक कूट की खोज (Discovery of Genetic Code) सम्पूर्ण m-R.N.A. अणु में केवल चार नाइट्रोजनी क्षारक.(nitrogenous base) होते हैं और प्रोटीन निर्माण में 20 ऐमीनो अम्ल भाग लेते हैं। इस प्रकार एक क्षारक एक ऐमीनो अम्ल को कोड (code) नहीं कर सकता। अत: वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया. कि एक से अधिक क्षारकों का समूह ऐमीनो अम्लों को कोड़ करने के लिए आवश्यक है। गैमो (Gamow) ने बताया कि दो क्षारकों का एक जोड़ा एक ऐमीनो अम्ल को कोड करता है, लेकिन इस प्रकार भी केवल 16 ही कूट होते हैं। अत: यह विचार भी मान्य नहीं हुआ। क्रिक (Crick) ने बताया कि तीन क्षारकों का क्रम एक ऐमीनो अम्ल को कोड करता है। तीन क्षारकों के विभिन्न संयोगों के क्रम से 64 कूट बनेंगे। बाद में मार्शल नीरेनबर्ग, सिवेरो ओकोआ, फ्रांसिस क्रिक तथा हरगोबिन्द खुराना (Marshall Nirenberg, Severo Ochoa, Francis Crick and Hargobind Khorana) आदि वैज्ञानिकों ने आनुवंशिक कूट पर कार्य किया। आनुवंशिक कूट का सम्पूर्ण शब्दकोश खुराना ने तैयार किया जिसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ। निम्न तालिका से स्पष्ट है कि किस प्रकार चार प्रकार के नाइट्रोजन क्षारक से तीन क्षारक आनुवंशिक कूट (genetic code) बनते हैं आनुवंशिक कूट (genetic codon) D.N.A. अणुओं में स्थित नाइट्रोजनी क्षारकों का वह अनुक्रम है जिसमें प्रोटीन अणुओं के संश्लेषण के लिए सन्देश निहित रहते हैं। आनुवंशिक कूट 20 ऐमीनो अम्लों को पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला में स्थापित करने से सम्बन्धित होते हैं

आनुवंशिक कूट (Genetic Code) सर्वप्रथम नीरेनबर्ग (Nirenberg) तथा मथाई (Mathāei, 1961) ने कृत्रिम m-R.N.A. का संश्लेषण किया जिसमें केवल UUU क्षारक था। इस m-R.N.A. अणु को प्रोटीन का संश्लेषण करने के लिए एक कोशिकारहित तन्त्र में रखा जिसमें सभी ... एन्जाइम. A.T.P. आदि उपस्थित थे। इस प्रकार जिस प्रोटीन का संश्लेषण हुआ उसमें केवल फिनाइलएलैनीन (phenylalanine) ऐमीनो अम्ल था। इससे यह निष्कर्ष निकला कि UUU फिनाइलएलैनीन ऐमीनो अम्ल का कूट है। इसी प्रकार प्रयोग करके सम्पूर्ण आनुवंशिक कूट शब्दावली तैयार की गई। आनुवंशिक कूट (genetic code) D.N.A. अणुओं में स्थित नाइट्रोजनी क्षारकों का वह अनुक्रम है जिसमें प्रोटीन संश्लेषण के लिए सन्देश निहित रहते हैं। यद्यपि D.N.A. अणु में नाइट्रोजनी क्षारकों के अनुक्रम के रूप में सन्देश कोडित होते हैं, लेकिन कूट अक्षरों को R.N.A. में पाए जाने वाले अनुक्रम द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। आनुवंशिक कूट की विशेषताएँ (Characteristic features of Genetic Code) कूट त्रिक होता है (The code is triplet)----m-R.N.A. के तीन क्षारकों का क्रम एक ऐमीनो अम्ल का आनुवंशिक AUG न्यूक्लियोटाइड अनुक्रम मिथायोनिन, GUG अनुक्रम वैलीन ऐमीनो अम्ल को कोडित करता है। हासित है (The code is degenerate)-अपह्रासित कूट का अर्थ है कि एक ऐमीनो अम्ल के लिए एक से अधिक पर्यायनाम कूटों (synonymous eodons) का प्रयोग किया जा सकता है। यह तन्त्र जीव को उत्परिवर्तनों के हानिकारक प्रभाव से बचाता है जैसे AGA AGG-CGA सभी आर्जिनीन के कूट हैं। उत्परिवर्तन द्वारा एक क्षारक में परिवर्तन आने के पश्चात् भी आर्जिनीन ही श्रृंखला में आएगा। 3. कूट अनतिव्यापी है (The code is non-overlapping)---अनतिव्यापी या नॉन-ओवरलैपिंग होने का अर्थ है कि एक m-R.N.A. अणु में एक ही क्षारक अक्षर के प्रयोग को विभिन्न कूटों में नहीं किया जाता है अर्थात् AUC GUU को केवल AUC तथा GUU के रूप में प्रयुक्त किया जाएगा। इसे AUG तथा CGU के रूप में प्रयुक्त नहीं किया जा सकता। यहाँ C का प्रयोग सम्मिलित है। 4.कूट असंदिग्ध है (The code is non-ambiguous)-एक विशेष आनुवंशिक कूट हमेशा एक निश्चित ऐमीनो अम्ल को ही कोड करता है। यह दो या अधिक ऐमीनो अम्लों को कोडित नहीं करेगा।
5. कूट सार्वत्रिक है (The code is universal)–एक आनुवंशिक कूट सभी जीवों में उसी ऐमीनो अम्ल को कोडित करता है। (अभी कुछ वर्षों में माइटोकॉण्ड्रिया तथा कुछ प्रोटोजोआ में आनुवंशिक कूट की भिन्नता का पता लगा है।) 6. कूट कॉमारहित है (The code is commaless)-दो संलग्न कूटों के बीच विराम या कॉमा नहीं होता है अर्थात् कूट लगातार होते हैं। जब शृंखला समाप्त होती है, उस स्थान पर समापन कूट (terminating codon) आ जाता है। जैसे `(AUG)/("Met")( U U U)/("Phe")(G UG )/("Val")` आदि।
7. समारम्भ कूट तथा समापन कूट (Initiation and termination codons)-ज्ञात 64 आनुवंशिक कूट में से एक समारम्भ कूट AUG तथा तीन समापन कूट UAA UAG UGA होते हैं। ये क्रमशः पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला के शुरू करने और समाप्त करने या विमोचन से सम्बन्धित होते हैं। वॉबल परिकल्पना (Wobble hypothesis)-इस परिकल्पना के अनुसार कूट की विशिष्टता प्रथम दो क्षारक क्रम निर्धारित करते हैं। t-R.N.A. अणु प्रथम दो क्षारकों के साथ पूर्ण बन्ध बनाता है। तीसरा क्षारक ढीला बन्ध बनाता है अर्थात् तीसरा क्षारक वॉबल (Wobble) अवस्था में रहता है। इस प्रकार t-R.N.A. का एक अणु चार ऐसे कूटों को पहचान सकता हैं, जो तीसरे क्षारक पर भिन्न होते हैं। इसे वॉबल परिकल्पना (Wobble hypothesis) कहते हैं। यह परिकल्पना क्रिक (Crick) ने प्रस्तुत की थी।
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