Home
Class 12
CHEMISTRY
उत्प्रेरक वर्धक किसे कहते हैं? एक उदाहरण...

उत्प्रेरक वर्धक किसे कहते हैं? एक उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

लिखित उत्तर

Verified by Experts

उत्प्रेरक वर्धक
(Catalytic promoters)
उतोरण अभिक्रियाओं में कभी-कभी प्रयुक्त उत्प्रेरक की कार्य क्षमता किसी अन्य पदार्थ की अल्प मात्रा डालने से बढ़ जाती है, परन्तु वह पदार्थ स्वयं उत्प्रेरक का कार्य नहीं कर सकता है। ऐसे पदार्थ को उत्प्रेरक वर्धक या उत्तेजक कहते है। अत: उत्प्रेरक वर्धक उत्प्रेरक की सक्रियता को बढ़ाते है। सामान्यतया ये विषमांगी उत्प्रेरण में प्रयुक्त होते हैं।
उदाहरणार्थ-अमोनिया बनाने की हेबर विधि में आयरन का चूर्ण उत्प्रेरक है, परन्तु यदि इसके साथ अल्प मात्रा में मॉलिब्डेनम (Mo) या `Al_2O_3` मिला दें तो उत्प्रेरक की कार्यक्षमता (efficieney) बढ़ जाती है। यहाँ पर Mo या `Al_2O_3` वर्धक का कार्य करता है।
` " " N_2(g)+ 3H_2 (g) underset(MO " वर्धक") overset( "Fe चूर्ण उत्प्रेरक " ) to 2NH_3 (g)`
कुछ अभिक्रियाओं में अत्यधिक उत्प्रेरण क्षमता प्राप्त करने के लिए उत्प्रेरकों का मिश्रण प्रयुक्त किया जाता है जैसे C0 व `H _2 ` से मेथेनॉल प्राप्त करने के लिए `ZnO` व Cu0 तथा `Cr_2O_3` का मिश्रण प्रयुक्त किया जाता है। इसमें `Cr_2O_3` उत्प्रेरक वर्धक का कार्य करता है।
` " " CO (g) +2H_2(g) underset( Cr_2O_3 (" वर्धक")) overset ((ZnO+ CuO)"उत्प्रेरक मेथेनॉल") to underset("मेथेनॉल) (CH_3OH(l))`
बॉश प्रक्रम द्वारा `H _2 ` के निर्माण में ` Fe_2O_3` उत्प्रेरक तथा `Cr_2O_3` वर्धक की तरह प्रयुक्त होते है।
` " " CO (g) + H_2O (g) underset( cr_2O_3" वर्धक " ) overset(Fe_2O_3(g)" उत्प्रेरक") to CO_2(g) +H_2(g) `
उत्प्रेरक विष
(Catalyst polsons)
वे बाहरी पदार्थ जो उत्प्रेरण क्रियाओं में प्रयुक्त उत्प्रेरक की कार्यक्षमता को कम कर देते हैं या पूर्ण रूप से नष्ट कर देते हैं, , उत्प्रेरक बिष कहलाते हैं।
उदाहरणार्थ-हेबर विधि में प्रयुक्त होने वाले आयरन उत्प्रेरक की कार्य-क्षमता Hus की उपस्थिति से नष्ट हो जाती है। अतः यहाँ पर `H _2 ` उत्प्रेरक विष है।
` " " N_2(g) +3H_2(g) underset(H_2S "विष") overset(Fe " उत्प्रेरक" ) to 2 NH_3(g)`
ऐसा विचार है कि उत्प्रेरक विष उत्प्रेरक की सतह पर मुक्त संयोजकताओं के कारण अभिकारक अणुओं से.पहले अधिशोषित हो जाता है जिससे उत्प्रेरक की उत्प्रेरण क्षमता नष्ट हो जाती है। कभी-कभी विष उत्प्रेरक से रासायनिक अभिक्रिया करके उसको अन्य पदार्थ में परिवर्तित कर देता है।
` " " Fe +H_2S to FeS + H_2 uparrow `
अतः उत्प्रेरक विष के अधिशोषण तथा रासायनिक परिवर्तन के कारण उत्प्रेरक की उत्प्रेरण क्षमता नष्ट हो जाती है।
Promotional Banner