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CHEMISTRY
एक उदाहरण देकर उत्प्रेरक के अधिशोषण सिद्...

एक उदाहरण देकर उत्प्रेरक के अधिशोषण सिद्धान्त को स्पष्ट कीजिए।

लिखित उत्तर

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समांगी उत्प्रेरण के लिए माध्यमिक यौगिक सिद्धान्त ।
(Intermediate Compound Theory for Homogeneous Catalysis)
इस सिद्धान्त के अनुसार, उत्प्रेरक किसी अभिकारक से अभिक्रिया करके एक अस्थायी माध्यमिक यौगिक बनाता है। यह माध्यमिक यौगिक दूसरे अभिकारक से अभिक्रिया करके वांछित उत्पाद बनाता है तथा उत्प्रेरक स्वयं मुक्त हो जाता है। मान लिया दो अभिकारक A व B परस्पर संयुक्त होकर मन्द गति से यौगिक AB बनाते हैं।
` " " underset(" अभिकारक") A+underset("अभीकारक ") B to underset("उत्पाद") (AB) ` मन्द गति)
यदि उपर्युक्त अभिक्रिया को किसी पदार्थ x की उपस्थिति में कराने पर अभिक्रिया की गति बढ़ जाती हो तो x उत्प्रेरक का कार्य करेगा। माध्यमिक यौगिक सिद्धान्त के अनुसार उत्प्रेरक x निम्नलिखित प्रकार से कार्य करता है
` " " underset(" अभिकारक ") A + underset("उत्प्रेरक") X overset("मंद ")to underset(" माध्यमिक यौगिक")([AX]) " " ...(2)`
` " " underset ("माध्यमिक यौगिक ") ([AX]) + underset("अभीकारक") B overset ("तीव्र ") to underset("उत्पाद ") (A B) +underset("उत्प्रेरक") X" "...(3)`
अभिक्रिया (2) तथा (3) की सक्रियण ऊर्जाएँ (1) से कम हैं, अत: माध्यमिक यौगिक (AX] का बनना तथा इसका विघटन अभिक्रिया (1) की गति को बढ़ाता है, जो कि .प्रारम्भ में मन्द होती है।
उपर्युक्त अभिक्रिया को पूर्ण अभिक्रिया के रूप में निम्नलिखित प्रकार से लिखते हैं
` " " A+B underset("उत्प्रेरक") overset([X]) to AB `
उदाहरणार्थ-सीस कक्ष विधि में, हवा के द्वारा `SO_2` के ऑक्सीकरण में NO (उत्प्रेरक) हवा की `O_2` से संयुक्त होकर `NO_2` (माध्यमिक यौगिक) बनाती हैं जो `SO_2` को `SO_3` में ऑक्सीकृत कर देता है और NO पुनः प्राप्त हो जाता है।
` " " underset("उत्प्रेरक") (2NO+ O_2 ) to underset("माध्यमिक यौगिक") (2NO_2) `
` " " underset ("माध्यमिक यौगिक ") (NO_2)+ SO_2 to SO_3 + underset("उत्प्रेरक ") (NO) `
पूर्ण अभिक्रिया निम्नलिखित है-
` " " 2SO_2 + O_2 underset(" उत्प्रेरक ") overset(NO) to 2SO_3`
अधिशोषण सिद्धान्त (Adsorption Theory)
अधिशोषण सिद्धान्त को सम्पर्कता का सिद्धान्त (contact theory) भी कहते हैं। इसके अनुसार, अभिक्रिया के अभिकारक के अणु दूर-दूर रहते है। ठोस उत्प्रेरक अभिकारक के अणुओं को अपनी सतह पर एक परत (layer) के रूप में अधिशोषित कर लेता है जिससे ठोस उत्प्रेरकों की सतहों पर अभिकारक के अणुओं का सान्द्रण बढ़ जाता है क्योंकि अभिक्रिया की गति अभिकारक अणुओं की सान्द्रता के समानुपाती होती है। अतः ठोस उत्प्रेरकों की उपस्थिति में अभिकारक अणुओं के परस्पर सम्पर्क में आने से अभिक्रिया की गति बढ़ जाती है। जैसे-जैसे अभिकारक पदार्थ उत्पाद में बदलते जाते हैं, वैसे-वैसे वे उत्प्रेरक की सतह को छोड़ते जाते हैं तथा उतोरक की सतह पर अभिकारकों के अन्य अणु अधिशोषित होते जाते हैं तथा इस प्रकार अभिक्रिया आगे बढ़ती जाती है।
अभिक्रिया की गति `prop ` अभिकारक अणुओं का सान्द्रण
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