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CHEMISTRY
स्वर्ण संख्या को उदाहरण सहित समझाइए।...

स्वर्ण संख्या को उदाहरण सहित समझाइए।

लिखित उत्तर

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(क) जब किसी द्रवविरोधी कोलॉइंडी विलवन में विद्युत-अपघट्य का विलयन मिलाने से पूर्व द्रवस्नेही कोलॉइडी विलयन की कुछ मात्रा को डाला जाता है तो द्रव-विरोधी कोलॉइड का स्कन्दन रुक जाता है अर्थात् उसका स्थायित्व बढ़ जाता है। यह प्रक्रम रक्षण (protection) कहलाता है। वे द्रवस्नेही कोलॉइड, जिन्हें डालने पर द्रव-विरोधी कोलॉइडों का स्कन्दन से स्थायित्व बढ़ जाता है, रक्षी कोलॉइड कहलाते हैं और इस प्रकार प्राप्त द्रव-विरोधी कोलॉइडी विलयन, रक्षित कोलॉइड कहलाते हैं जैसे गोल्ड के कोलॉइडी विलयन में यदि सोडियम क्लोराइड का विलयन मिला दिया जाए तो यह स्कन्दित हो जाता है. किन्तु इस कोलॉइडी विलयन में यदि जिलेटिन की अल्प मात्रा डाल दी जाए तो NaCl विलयन द्वारा स्कन्दन रुक जाता है। इस प्रकार, जिलेटिन यहाँ एक रक्षी कोलॉइड के रूप में कार्य करता है। इसी प्रकार, आइसक्रीम के निर्माण में बर्फ के कोलॉइडी कणों का स्कन्दन रोकने के लिए जिलेटिन को रक्षी कोलॉइड के रूप में प्रयुक्त करते हैं।
(ख) रक्षी कोलॉइड की शक्ति को स्वर्ण संख्या (gold number) से व्यक्त किया जाता है। स्वर्ण संख्या की परिभाषा निम्नलिखित प्रकार से की जाती है
"किसी द्रवस्नेही कोलॉइड (रक्षी कोलॉइड) की स्वर्ण संख्या उसका मिलीग्राम में वह मात्रा है, जो गोल्ड सॉल के 10 मिली में उपस्थित होने पर 10% NaCI के 1 मिली विलयन द्वारा स्कन्दित होने से रोक देती है।" स्वर्ण संख्या, रक्षी सॉल की शक्ति व्यक्त करने का प्रतीक हैं। जिलेटिन की 0.005 से 0.01, स्टार्च की 25, ऐल्यूमिन की 0.1 से 0.2 तथा गम अरेबिक की 0.15 से 0.25 स्वर्ण संख्या होती है। ।
(ग) उद्योगों में कोलॉइडी रसायन के महत्त्व-उद्योगों में कोलॉइडी रसायन के प्रमुख महत्त्व निम्नलिखित है
(i) रबड़ उद्योग में-पौधों से प्राप्त होने वाला रबड़ एक ऋण आवेशित कोलॉइड है। इससे दैनिक प्रयोग हेतु रबड़ की वस्तुएँ बनाई जाती है। रबड़ से जो वस्तु बनानी होती है जैसे दस्ताना, बोतल, चादर आदि उसका साँचा बनाकर रबड़ विलयन में लटका दिया जाता है, जो ऐनोड का कार्य करता है। इस ऐनोड पर रबड़ के ऋण आवेशित कण जम जाते हैं और साँचे वाला पदार्थ प्राप्त हो जाता है!
(ii) कपड़ों के रंगने में कपड़ा उद्योग में प्रयोग होने वाले रंग बन्धक (mordanta) कोलॉइडी विलयन होते हैं। इन रंग बन्धकों के कोलॉइड कण कपड़े द्वारा अधिशोषित हो जाते हैं, जिससे कपड़े का रंग स्थायी (पक्का) हो जाता है जो जल में नहीं घुलता है।
(iii) फोटोग्राफी में-फोटोग्राफी उद्योग में प्रयुक्त होने वाली पतली काँच की प्लेटों पर सिल्वर ब्रोमाइड तथा जिलेटिन के कोलॉइडी विलयन की पतली पतं चढ़ी होती है।
(iv) पेन्ट तथा स्याही बनाने में-पेन्ट तथा स्याही बनाने में कोलॉइड का प्रयोग किया जाता है।
(v) अन्य अनुप्रयोग-चमड़े के शोधन में, शक्कर को रंगहीन करने में, युद्ध-सामग्री में तथा औषधियों में कोलॉइडी विलयन का प्रयोग होता है।
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