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BIOLOGY
मलेरिया रोग के कारण , बचाव के उपचार समझा...

मलेरिया रोग के कारण , बचाव के उपचार समझाइए

लिखित उत्तर

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रोग से बचाव उपचार से बेहतर है (Prevention is better than cure)-(i) एक बार कोई बीमार हो जाए तो उसके शारीरिक कार्यों की बहुत हानि होती है। कभी-कभी ऐसा भी हो सकता है कि सामान्य स्थिति बहाल ही न हो अर्थात् वह पूरी तरह स्वस्थ नहीं होते।
(ii) दूसरा यह कि उपचार में लम्बा समय लग सकता है। इसका अर्थ हुआ कि उचित उपचार मिलने पर भी रोगी को बिस्तर पर लम्बे समय तक आराम करना पड़ सकता है।
(iii) तीसरी यह कि संक्रमित व्यक्ति रोग के एक स्रोत (source) के रूप में कार्य करता है, इससे अन्य व्यक्तियों में रोग फैलने का खतरा बना रहता है। इससे ऊपर वर्णित कठिनाइयाँ और अधिक बढ़ जाती हैं।
इन सब परिस्थितियों के कारण, रोगों का निवारण रोग के उपचार से अच्छा माना जाता है (prevention is better than cure)
रोग निवारण हेतु दो विधियाँ अपनायी जाती हैं
(A) सामान्य या अविशिष्ट विधियाँ (General or non-specific methods)
(i) रोगी का पृथक्करण-यह रोग निवारण की एक सामान्य विधि है। इसमें जहाँ तक सम्भव हो प्रयास करना चाहिए कि रोगजनक और रोगी से सामना (exposure) न हो। इस उपाय द्वारा हम संक्रामक सूक्ष्म जीवों से बचाव कर सकते हैं। रोगी को एकान्त में रखना या पृथक्करण (isolation of patient) इसी प्रकार का उपाय है।
(ii) वैयक्तिक व सामुदायिक स्वच्छता (Personal and community hygiene)---संक्रामक रोगों से बचने का एक और महत्त्वपूर्ण उपाय है-रोगजनकों के स्रोतों पर नियन्त्रण। अधिकांश रोगजनक गन्दे स्थानों पर पनपते हैं। अत: व्यक्तिगत व सामुदायिक स्वच्छता पर विशेष ध्यान देकर इन रोगों की रोकथाम की जा सकती है।
(iii) रोग चक्र पर रोक (Interruption of disease cycle)-रोग चक्र को तोड़ने के लिए रोगजनकों की संचरण विधियों पर रोक लगाना आवश्यक है।
सारांशत: व्यक्तिगत व सामुदायिक स्वच्छता अपनाकर संक्रामक रोगों से अत्यधिक सीमा तक बचाव किया जा सकता है।
(iv) प्रतिरक्षी तन्त्र को सक्षम बनाना-संक्रामक रोगों की रोकथाम का एक अन्य महत्त्वपूर्ण उपाय है प्रतिरक्षी तन्त्र - (immune system) को स्वस्थ बनाए रखना।
(v) पर्याप्त सन्तुलित आहार-शरीर में स्थित किसी भी अन्य तन्त्र की तरह प्रतिरक्षी तन्त्र भी सुचारु रूप से कार्य नहीं कर . पाएगा अगर व्यक्ति को पर्याप्त भोजन व पोषण प्राप्त न हो। भोजन शरीर की प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है। अत: संक्रामक रोगों से बचने हेतु दूसरी मौलिक आवश्यकता है, उचित मात्रा में सबके लिए सन्तुलित भोजन/पोषण की उपलब्धता।
रोगों व उनकी संचरण विधियों के बारे में लोगों को जागरूक करना भी रोकथाम का एक प्रमुख उपाय है। सामान्य या अविशिष्ट विधियाँ सभी रोगों से बचाव उपलब्ध कराती हैं।
(B) विशिष्ट विधियाँ (specific methods)
विशिष्ट विधियाँ किसी रोग विशेष (particular disease) से बचने के लिए ही अपनायी जाती है। टीकाकरण (Vaccination) इसका प्रमुख उपाय है। अनेक रोगों से उनके टीके (vaccine) द्वारा बचा जा सकता है। पोलियो, खसरा, टी०बी० आदि रोगों से बचाव टीकों द्वारा ही किया जाता है। रेबीज़ व टिटेनस में निष्क्रिय प्रतिरक्षा (passive immunity) हेतु टीका लगाया जाता है।
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