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BIOLOGY
वन के वितरण को कौन प्रभावित करते हैं?...

वन के वितरण को कौन प्रभावित करते हैं?

लिखित उत्तर

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किसी एक प्रकार का वाइरसजन्य रोग जैसे चिकनपॉक्स, हिपेटाइटिस आदि किसी व्यक्ति को जीवन में प्राय: केवल एक बार ही प्रभावित करता है। इसका कारण यह है कि जब रोगजनक (विषाणु) पहली बार प्रतिरक्षा तन्त्र के सम्पर्क में आता है तब प्रतिरक्षी तन्त्र उत्तेजित होकर धीमी परन्तु निश्चित अनुक्रिया प्रारम्भ कर देता है। इस विषाणु से जूझने व उसे परास्त कर देने में शरीर को समय लगता है लेकिन प्रतिरक्षी तन्त्र की कोशिकाएँ इस संक्रमण का विशिष्ट रूप से स्मरण कर लेती हैं। बाद में यदि वही विषाणु या मिलता-जुलता विषाणु फिर से प्रतिरक्षा तन्त्र के सम्पर्क में आता है तब यह तन्त्र स्मृति के आधार पर उसे पहचान जाता है। इस बार यह बिना समय लगाए पूरी शक्ति के साथ रोगाणुओं का खात्मा कर देता है। इसका अर्थ है कि प्रतिरक्षी तन्त्र की द्वितीयक अनुक्रिया (secondary response), प्राथमिक अनुक्रिया की अपेक्षा बहुत ही द्रुत गति व तीव्रता (intensity) से होती है। इसी सिद्धान्त के आधार पर कोई वाइरसजन्य रोग किसी व्यक्ति को जीवन में केवल एक बार प्रभावित करता है। यही सिद्धान्त टीकों heWi (vaccines) का भी आधार है।
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