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BIOLOGY
अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ किसे कहते हैं? मा...

अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ किसे कहते हैं? मानव शरीर में पाई जाने वाली दो प्रमुख अन्तःस्रावी ग्रन्थियों का वर्णन कीजिए।

लिखित उत्तर

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ये शरीर में पाई जाने वाली नलिकाविहीन ग्रन्थियाँ (duetless glands) है। ये हॉर्मोन्स का स्त्रावण करती है। हॉर्मोन्स का वितरण रक्त के माध्यम से होता है। ये शरीर के अन्त:वातावरण को स्थिर बनाए रखने में एवं जैविक क्रियाओं के संचालन में महत्त्वपूर्ण कार्य करते हैं।

(A) थायरॉइड ग्रन्थि (Thyroid Gland)
यह स्वर यन्त्र के पार्श्व-अधर तल पर स्थित द्विपालिक (bilobed) ग्रन्धि है। इसकी रचना अनेक छोटे-छोटे पिण्डकों (lobules) से होती है जिन्हें एक प्रकार की संयोजी ऊतक बाँधे रहता है। पिण्डकों में पारदर्शक तथा कोलॉइडी (colloidal) तरल पदार्थ थायरोग्लोब्यूलिन (thyroglobulin) होता है। इसमें मुख्य रूप से थायरॉक्सिन (thyroxine) हॉमोन होता है। यह हॉमोन शरीर की। उपापचयी(metabolic) क्रियाओं का नियमन तथा नियन्त्रण करता है। इस हॉर्मोन के मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं
शरीर में उपापचय की दर को बनाए रखता है। प्रोटीन संश्लेषण,ग्लूकोज की खपत तथा हृदय स्पन्दन की दर को बढ़ाता है।
(ii) उभयचरों में कायान्तरण को प्रेरित करता है।
(iii) शीत रुधिर वाले जन्तुओं में त्वक्पतन (moulting) को नियन्त्रित रखता है।
थायरॉक्सिन हॉमोंन की कमी से निम्नलिखित रोग हो जाते हैं-
(i) जड़वामनता या क्रिटिनिज्म (Cretinism)-बाल्यावस्था में थायरॉक्सिन की कमी से शरीर की समस्त उपापचयी क्रियाएँ मन्द पड़ जाती हैं, त्वचा मोटी तथा झुरींदार हो जाती है। शरीर की वृद्धि नहीं होती, मानसिक विकास भली-भांति नहीं हो पाता तथा जननांग अल्पविकसित रह जाते हैं। ऐसे बच्चे अल्प-बुद्धि वाले बौने होते हैं।
(ii) मिक्सीडीमा (Myxoedema)-वयस्क अवस्था में थायरॉक्सिन का अल्पस्त्रवत होने से मिक्सीडीमा रोग हो जाता है। इसमें शरीर का विकास तो सामान्य होता है, लेकिन समय से पूर्व बुढ़ापे के लक्षण प्रदर्शित होते हैं। मांसपेशियाँ शिथिल हो जाती है, जनन क्षमता कम हो जाती है।
(iii) घेंघा(Simple Goitre)-थायरॉइड ग्रन्थि से हॉमोन्स की उचित मात्रा स्त्रावित न होने से ग्रन्थि स्वयं फूलकर बड़ी हो जाती है। इस रोग को घेंघा कहते हैं। आयोडीन की उचित मात्रा का उपयोग करने से रोग को नियन्त्रित किया जा सकता है।
थायरॉक्सिन हॉर्मोन की अधिकता से होने वाला रोग : एक्सोफ्थैल्मिक ग्वायटर (Exophthalmic Goitre)थायरॉक्सिन के अतिस्त्रावां से उपापचयो क्रियाएँ तीव्र हो जाती हैं, अनावश्यक ऊर्जा के कारण थकान अनुभव होती है। नेत्र है . उभर आते हैं। नेत्रों के पीछे श्लेष्म एकत्र हो जाने से नेत्र गोलक उभरकर बाहर की ओर उठ जाते हैं। इस रोग को एक्सोफ्थैल्मिक ग्वायटर कहते हैं।
(B) लैंगरहैन्स की द्वीपिकाएँ (Islets of Langerhans)
अग्न्याशय (pancreas) एक मिश्रित ग्रन्थि है। इसके अग्न्यायिक पिण्डक पाचक रस स्त्रावित करते हैं। यह प्रन्थि का बहिःस्रावी (exocrine )भाग होता है। इसके बीच-बीच में कुछ विशेष प्रकार की कोशिकाओं के समूह लैंगरहैन्स के द्वीप (islets of Langerhans) होते हैं। इनके अन्तःस्रावी होने के कारण अग्न्याशय को मिश्रित ग्रन्थि कहते हैं। लैंगरहैन्स की द्वीपिकाओं में तीन प्रकार की कोशिकाएँ `alpha` -कोशिकाएँ, `beta` कोशिकाएँ तथा `delta` कोशिकाएं होती हैं। `alpha`तथा `beta` कोशिकाओं से क्रमश: ग्लूकैगॉन (glucagon )तथा इंसुलिन (insulin) नामक हॉर्मोन्स बनते है, जो शरीर में कार्बोहाइड्रेट्स के उपापचय (metabolism) पर नियन्त्रण रखते हैं।
इन्सुलिन के कार्य (Functions of Insulin) यह आवश्यकता से अधिक ग्लूकोज को ग्लाइकोजन में बदलता है। मधुमेह (Diabetes)— इन्सुलिन के अल्पस्रावण के कारण शरीर की कोशिकाएँ रक्त शर्करा का उपयोग नहीं कर पातीं, इस कारण रक्त में शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है। अधिक मूत्र स्त्रवण के कारण निर्जलीकरण (dehydration). होने लगता है। वसाओं के अधिक उपयोग के कारण विषैले कीटोनकाय (ketono bodies) बनने लगते हैं।
हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia)-इन्सुलिन के अतिस्त्रावण के कारण शरीर की कोशिकाएँ रक्त से अधिक मात्रा में ग्लूकोज लेने लगती है, जिससे तन्त्रिका कोशिकाओं को शर्करा कम मात्रा में उपलब्ध होती है, इससे थकावट तथा ऐंठन महसूस होती है। ग्लूकैगॉन का कार्य (Function of Glucagon)-यह आवश्यकता पड़ने पर संचित ग्लाइकोजन को रक्त शर्करा में बदलने के लिए प्रेरित करता है।
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