जैवमात्रा-वे ईधन जो हमें पादप एवं जन्तु उत्पाद से प्राप्त गारा होते हैं, उन्हें जैवमात्रा (biomass) कहते हैं, जैसे-लकड़ी, गोबर, सूखे पत्ते और तने आदि। जैवगैस का निर्माण-जैवगैस (biogas), कई ईंधन गैसों का निर्गम मिश्रण है। इसे ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में जैव पदार्थों के अपघटन से प्राप्त किया जाता है। जैवगैस का मुख्य घटक मेथेन (`CH_4`) गैस है, जोकि एक आदर्श ईंधन है। जैवगैस उत्पन्न करने के लिए गोबर, वाहित मल, फल- सब्जियों (a) स्थिर गुम्बद प्रकार का संयन्त्र तथा कृषि आधारित उद्योगों के अपशिष्ट आदि का प्रयोग किया जाता है। जैवगैस बनाने के लिए दो प्रकार के संयन्त्रों का प्रयोग किया जाता है—(i) स्थायी गुम्बद प्रकार तथा (ii) प्लावी (तैरती) टंकी प्रकारा गोबर से जैवगैस प्राप्त करने के लिए प्राय: ‘प्लावी टंकी प्रकार के रसोईघर गैस संयन्त्र का प्रयोग करते हैं---जबकि मानव मल तथा अन्य अपशिष्टों से जैवगैस प्राप्त करने के लिए .स्थिर गुम्बद प्रकार के संयन्त्र का प्रयोग किया जाता है। जैवगैस प्राप्त करने के विभिन्न चरण प्रथम चरण : स्लरी का निर्माण सर्वप्रथम गाय-भैंस आदि घरेलू पशुओं के गोबर को पानी के साथ मिलाकर मिश्रण-टंकी में एक गाढ़ा घोल (स्लरी) तैयार कर लेते हैं। तत्पश्चात् स्लरी को डाइजेस्टर डाइजेस्टर में डालकर छोड़ देते हैं। डाइजेस्टर, ईंटों का बना हुआ एक भूमिगत टैंक होता है जो चारों ओर से बन्द रहता है। द्वितीय चरण : स्लरी का अपघटन–डाइजेस्टर में उपस्थित अवायुजीवी या अनॉक्सी सूक्ष्मजीव, पानी की उपस्थिति में, स्लरी में उपस्थित जैवमात्रा का अपघटन कर उसे सरल यौगिकों में बदलने लगते हैं। इस क्रिया को पूरा होने में कुछ दिन लग जाते हैं तथा क्रिया .पूर्ण होने पर डाइजेस्टर में मेथेन, कार्बन डाइऑक्साइड, हाइड्रोजन तथा सल्फर डाइऑक्साइड गैसों का मिश्रण प्राप्त होता है। यह मिश्रण ही जैवगैस है। यह गैसीय मिश्रण डाइजेस्टर में ऊपर उठकर प्लावी टंकी या स्थिर गुम्बद में एकत्र हो जाता है। प्लावी टंकी या स्थिर गुम्बद के ऊपरी भाग में लगी नलिका द्वारा इस गैस को उपभोक्ता की रसोई तक ले जाया जाता है और गैस चूल्हों में जलाया जाता है।
