वर्ण-विक्षेपण (Dispersion)
श्वेत प्रकाश किरण का अपने अवयवी रंगों की प्रकाश किरणों में विभाजित होना प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण कहलाता है।
(i) प्रिज्म द्वारा प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण-जब सूर्य की श्वेत प्रकाश किरण किसी प्रिज्म में से गुजरती है तो वह अपने मार्ग से विचलित होकर प्रिज्म के आधार की ओर झुककर विभिन्न रंगों की किरणों में विभाजित हो जाती है जैसा कि चित्र में प्रदर्शित है। इस प्रकार से उत्पन्न विभिन्न रंगों के समूह को स्पेक्ट्रम (spectrum) कहते हैं। इस स्पेक्ट्रम का एक सिरा लाल तथा दूसरा सिरा बैंगनी होता है। इन दोनों सिरों, लाल तथा बैंगनी रंगों के बीच में असंख्य प्रकाश किरणों का रंग अविरत रूप से बदलता जाता है।
(ii) सामान्यतः हमारी आँख को स्पेक्ट्रम के रंग सात समूहों के रूप में दिखाई पड़ते हैं। प्रिज्म के आधार की ओर से ये रंग बैंगनी (Violet), नीला (जम्बुकी नीला, Indigo), आसमानी. (Blue), हरा (Green), पीला (Yellow), नारंगी (Orange) तथा लाल (Red) के क्रम में होते हैं। रंगों के इस क्रम को अंग्रेजी के शब्द VIBGYOR (विबग्योर) से आसानी से स्मरित रखा जा सकता है।
(iii) जब श्वेत प्रकाश की किरण प्रिज्म में से गुजरती है तो श्वेत प्रकाश में उपस्थित भिन्न-भिन्न रंगों की किरणों में प्रिज्म द्वारा उत्पन्न विचलन भिन्न-भिन्न होता है। लाल प्रकाश की किरणं में विचलन सबसे कम तथा बैंगनी प्रकाश की किरण में विचलन सबसे अधिक होता है। अन्य रंगों की किरणों में विचलन लाल व बैंगनी किरणों के बीच में होता है। बैंगनी रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे कम तथा लाल रंग की तरंगदैर्घ्य सबसे अधिक होती है।
प्रिज्म द्वारा प्रकाश के वर्ण-विक्षेपण का कारण
किसी पारदर्शी पदार्थ जैसे काँच का अपवर्तनांक प्रकाश के रंग पर निर्भर करता है। अपवर्तनांक लाल रंग के प्रकाश के लिए सबसे कम तथा बैंगनी रंग के प्रकाश के लिए सबसे अधिक होता है।
जब कोई प्रकाश किरण काँच के प्रिज्म से गुजरती है तो वह अपने मार्ग से विचलित होकर प्रिज्म के आधार की ओर झुक , जाती है। चूंकि प्रकाश में उपस्थित भिन्न-भिन्न रंगों की किरणों में विचलन भिन्न-भिन्न होता है, अत: लाल रंग के प्रकाश की । किरण प्रिज्म के आधार की ओर सबसे कम तथा बैंगनी रंग के प्रकाश की किरण प्रिज्म के आधार की ओर सबसे अधिक झुकेगी। इस प्रकार, श्वेत रंग के प्रकाश का प्रिज्म में से गुजरने पर वर्ण-विक्षेपण हो जाता है।
आयताकार गुटके में श्वेत रंग के प्रकाशं का वर्ण-विक्षेपण नहीं होता, क्योंकि आयताकार गुटके द्वारा प्रकाश किरणों का विचलन नहीं होता, इनका केवल पाव विस्थापन होता है। गुटके में आपतित किरण तथा निर्गत किरण परस्पर समान्तर हो जाती हैं।