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महत्वपूर्ण आंदोलन#!#खिलाफत आंदोलन#!#असहयोग आंदोलन#!#सविनय अवज्ञा आंदोलन

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आंदोलन के विस्तार की आवश्यकता |खिलाफत आंदोलन|असहयोग आंदोलन |असहयोग आंदोलन के कुछ प्रस्ताव |आंदोलन के विभिन्न स्वपरूप |शहरो में आंदोलन|आंदोलन में सुस्ती आने के कारण |OMR

असहयोग आंदोलन |असहयोग आंदोलन के परिणाम |OMR

भारत छोड़ो आंदोलन |आंदोलन का प्रारंभ |OMR

रोलेट एक्ट|असहयोग एवं खिलाफत आंदोलन|साइमन कमीशन का विरोध|भारत छोड़ो आंदोलन|भारत छोड़ो आंदोलन|OMR

राजस्थान में किसान आंदोलन|OMR

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए: गांधीजी सत्य और अहिंसा को जीवन में सर्वाधिक महत्व देते थे, सत्याग्रह व असहयोग आंदोलन द्वारा उन्होंने अंग्रेजों का मुकाबला किया। गांधीजी सब मनुष्यों को समान मानते थे। धर्म, जाति, संप्रदाय, रंग आदि के आधार पर होने वाले भेदभाव को वे मानवता का कलंक मानते थे। वे आर्थिक असमानता को भी मिटा डालना चाहते थे। सामाजिक न्याय, शारीरिक श्रम को महत्व देते थे। गांधीजी प्रजातांत्रिक राज्य को कल्याणकारी मानते थे। गांधीजी के अनुसार, नैतिक आचरण का जीवन में विशेष स्थान होना चाहिए। सत्य, न्याय, धर्म, अहिंसा, अपरिग्रह, निःस्वार्थ सेवा को मानवता के लिए सच्ची सेवा मानते थे। उनके राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय विचारों में वसुधैव कुटुम्बकम का दृष्टिकोण प्रमुख था। उनकी मान्यता थी कि किसी राष्ट्र का समुचित उत्थान अपने परिवार, जाति, गांव, प्रदेश तथा देश की समस्याओं के सुधार से हो सकता है। स्वयं को सुधारों, सारा विश्व सुधरेगा उनका कहना सही था। निम्न में से स्त्रीलिंग कौन-सा है?

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न संख्या 81 से 85 तक के उत्तर दीजिए: गांधीजी सत्य और अहिंसा को जीवन में सर्वाधिक महत्व देते थे, सत्याग्रह व असहयोग आंदोलन द्वारा उन्होंने अंग्रेजों का मुकाबला किया। गांधीजी सब मनुष्यों को समान मानते थे। धर्म, जाति, संप्रदाय, रंग आदि के आधार पर होने वाले भेदभाव को वे मानवता का कलंक मानते थे। वे आर्थिक असमानता को भी मिटा डालना चाहते थे। सामाजिक न्याय, शारीरिक श्रम को महत्व देते थे। गांधीजी प्रजातांत्रिक राज्य को कल्याणकारी मानते थे। गांधीजी के अनुसार, नैतिक आचरण का जीवन में विशेष स्थान होना चाहिए। सत्य, न्याय, धर्म, अहिंसा, अपरिग्रह, निःस्वार्थ सेवा को मानवता के लिए सच्ची सेवा मानते थे। उनके राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय विचारों में वसुधैव कुटुम्बकम का दृष्टिकोण प्रमुख था। उनकी मान्यता थी कि किसी राष्ट्र का समुचित उत्थान अपने परिवार, जाति, गांव, प्रदेश तथा देश की समस्याओं के सुधार से हो सकता है। स्वयं को सुधारों, सारा विश्व सुधरेगा उनका कहना सही था। सत्याग्रह' में कौन-सी सन्धि है?

Civil Disobedience Movement (सविनय अवज्ञा आंदोलन)|Summary

असहयोग आंदोलन के कुछ प्रस्ताव|आंदोलन के विभिन्न स्वरूप|शहरों में आंदोलन|अवध|आदिवासी किसान|बागानों में स्वराज|OMR

असहयोग आंदोलन के कुछ प्रस्ताव|आंदोलन के विभिन्न स्वरूप|शहरों में आंदोलन|अवध|आदिवासी किसान|बागानों में स्वराज|OMR