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BIOLOGY
विभिन्न प्रकार की रोपण विधियों का वर्णन ...

विभिन्न प्रकार की रोपण विधियों का वर्णन कीजिए।

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शरीर की गतियाँ
शरीर में अनेक प्रकार की गतियाँ होती हैं। कुछ गतियाँ शरीर के आन्तरिक अंगों में होती हैं तथा कुछ गतियाँ बाह्य अंगों में होती हैं। अधिकांश जन्तुओं में गतियाँ पेशियों के संकुचन के कारण होती हैं। कुछ गतियाँ बिना पेशीय संकुचन के भी होती हैं। अपेशीय गतियाँ (Non-muscular Movements)
इस प्रकार की गतियों में पेशियाँ भाग नहीं लेती। ये गतियाँ निम्नलिखित होती हैं |
1. कोशिकाद्रव्यी धारागति (Streaming Movements of Cytoplasm)-कोशिका के कोशिकाद्रव्य में निरन्तर स्थान परिवर्तन होता रहता है। इसे साइक्लोसिस (eyclosis) भी कहते हैं।
2. कूटपादीय गति (Pseudopodial Movements)-कूटपाद या पादाभ (pseudopodia) के बनने की दिशा में शरीर गति करता है। अमीबा जैसे प्रोटोजोआ तथा स्पंजों की अमीबोसाइट्स व रुधिर के श्वेत रुधिराणुओं में इसी प्रकार की गति होती है। ये गतियाँ कोशाद्रव्य के धारावाही प्रवाह के कारण होती हैं। इसे अमीबीय (amoeboid) गति भी कहते हैं।
3. कशाभीय गति (Flagellar Movements)-यह गति कशाभ (flagella) की गति के कारण होती है। यूग्लीना (Euglena) तथा अन्य फ्लैजलेट्स, स्पंजों को कीप कोशिकाओं (choanocytes), सीलेन्ट्रेटा संघ की गैस्ट्रोडर्मल (gastrodermal) कोशिकाओं तथा जन्तुओं के शुक्राणुओं में इसी प्रकार की गति होती है। कशाभ लम्बे प्रवर्ध होते हैं और कोड़ें (whip) के समान आधार भाग से सिरे की ओर सर्पिल तरंगें पैदा होती हैं।
4. पक्ष्माभिकीय गति (Ciliary Movement)—यह पक्ष्माभ (cilia) की गति है। पक्ष्म पंक्तिबद्ध होते हैं और सभी पक्ष्माम एक-के-बाद-एक क्रम से गति करते हैं। पैरामीशियम (Paramecium) तथा दूसरे सिलिएट्स (प्रोटोजोआ) में इसी प्रकार गति के कारण स्थान परिवर्तन होता है। मनुष्य की अण्डवाहिनी, ट्रेकिया, नासावेश्म आदि में विभिन्न पदार्थों की गति पक्ष्माभिकीय गति के कारण होती है।
पेशीय गतियाँ (Muscular Movements)
जो गतियाँ पेशियों के संकुचन एवं शिथिलन के कारण होती हैं, उन्हें पेशीय गतियाँ कहते हैं। पेशीय गतियों को हम दो भागों में बाँट सकते हैं -
1. बाह्य अंगों की गति (Movements of External Organs)-इन गतियों के कारण जन्तुओं में गमन या प्रचलन (locomotion) होता है जैसे आर्थोपोडा संघ के जन्तुओं में खण्डयुक्त उपांगों द्वारा, मोलस्का संघ के प्राणियों में पेशीयुक्त अधरपाद (foot) के कारण प्रचलन होता है |इकाइनोडर्मेटा में नालपादों (tube feet) के कारण, मछलियों में पूँछ व पखों (fins) की गति के कारण प्रचलन होता है, जबकि अन्य कशेरुकियों में पादों की पेशीय गति के कारण जन्तु एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रचलन करते हैं। कंकाल से सम्बन्धित रेखीय पेशियों के कारण पेशीय गति होती है।
2. आन्तरिक अंगों की गति (Movements of Internal organs)-ये गतियाँ विभिन्न आंतरांगों में उपस्थित अंरेखित पेशियों के संकुचन एवं शिथिलन के कारण होती हैं। आहार नाल की क्रमाकुंचन गतियाँ, श्वासोच्छ्वास गतियाँ, हृदय स्पंदन आदि इसी श्रेणी के अन्तर्गत आती हैं।
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