कंकाल सन्धियाँ (Skeletal Joints)
वयस्क मनुष्य का कंकाल ढाँचा 206 हड्डियों से बना होता है। हड्डियाँ एक-दूसरे से विभिन्न प्रकार की सन्धियों से जुड़ी होती हैं। सन्धियों को तीन प्रमुख समूहों में बाँट सकते हैं-
(i) पूर्ण चल सन्धियाँ, (ii) अल्प चल सन्धियाँ, (iii) अचल सन्धियाँ।
पूर्ण चल या साइनोवियल सन्धियाँ (Freely Movable or Synovial Joints)
इस प्रकार की सन्धियों में दोनों अस्थियों के सिरों पर हायलिन उपास्थि (hyaline cartilage) पायी जाती है। अस्थियों के मध्य स्थित साइनोवियल गुहा में बीच साइनोवियल तरल भरा रहता है। अस्थियाँ परस्पर स्नायु (digaments) द्वारा जुड़ी रहती हैं। स्नायु एक मजबूत आवरण बनाते हैं, जिसे साइनोवियल सम्पुट (synovial capsule) कहते हैं। साइनोवियल सम्पुट के लचीले तन्तुओं के कारण अस्थियाँ गति के पश्चात् स्वतः सामान्य स्थिति में आ जाती हैं। आवश्यकता से अधिक खिंचाव के कारण मोच (sprain) आ जाती है। स्नायुओं के टूट जाने से सन्धि स्थल से अस्थियाँ खिसक जाती है, इसे सन्धि भंग (dislocation) कहते हैं।
पूर्ण चल सन्धियाँ निम्नलिखित होती हैं
1. कन्दुक-खल्लिका सन्धियाँ (Ball and Socket Joints)-इसमें एक अस्थि का कन्दुक (ball) दूसरी अस्थि के प्यालेनुमा खल्लिका (cavity) में फिट रहता है। इसमें कन्दुक (ball) वाली अस्थि चारों ओर घूम सकती है इस प्रकार की अस्थि सन्धि को एनआरयोसिस (enarthroses) भी कहते हैं, जैसे-अंस तथा श्रोणिमेखला तथा अग्र एवं पश्च पादों की अस्थि सन्धियाँ।
2. कब्जा सन्धि (Hinge Joint)-इसमें एक अस्थि का शीर्ष दूसरी अस्थि के गड्ढे या खाँच (cavity) में इस प्रकार फिट रहता है कि अस्थियाँ एक ही दिशा में मुड़ सकती हैं, जैसे-कुहनी और घुटने की सन्धियाँ।
3. खूँटीदार सन्धि (Pivot Joint)-इसमें एक अस्थि की धुरी (axis) पर दूसरी अस्थि फिट होकर गोलाई में घूमती है . जैसे दूसरी कशेरुका (axis) के ओडोन्टॉएड प्रवर्ध (odontoid process) पर एटलस अस्थि की सन्धि के कारण खोपड़ी-गोलाई में घूमती है। इस सन्धि को रोटेटोरिया (rotatoria) भी कहते हैं।
4. सैडल सन्धि (Saddle Joint)—यह अल्पविकसित कन्दुक-खल्लिका सन्धि जैसी होती है, जैसे—अँगूठे की मेटाकार्पल्स और कार्पल के मध्य सन्धि |
5. विसर्पी सन्धि (Gliding Joint)-इसमें सन्धि स्थल पर अस्थियाँ इधर-उधर या आगे-पीछे फिसलती हैं, जैसे-प्रबाहु की रेडियस-अल्ना, जंघा की टिबिओ-फिबुला, कलाई की अस्थियाँ आदि।
II. अल्प चल सन्धियाँ या उपास्थियुक्त सन्धियाँ (Slightly Movable or Imperfect Cartilagenous Joints)
इसमें अस्थियों के मध्य साइनोवियल सम्पुट नहीं होता। सन्धि तल पर स्नायु या उपास्थीयऊतक के कारण अस्थियों के मध्य सीमित गति होती है, जैसे-कशेरुक दण्ड की कशेरुकाओं के मध्य उपास्थीय सन्धि, श्रोणिमेखला की प्यूबिस अस्थियों के मध्य स्नायु सन्धि (pubic symphysis) आदि।
III. अचल या रेशीय सन्धियाँ (Fixed or Immovable or Fibrous Jolnts)
अस्थियों के किनारे एक-दूसरे के खाँच में फँसे होते हैं। इन अस्थि सन्धियों में थोड़ी-सी भी गति नहीं होती, जैसे—करोटि की अस्थियाँ।