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मानव रुधिर वर्ग से आप स्या समझते हैं? इस...

मानव रुधिर वर्ग से आप स्या समझते हैं? इसका पता किस वैज्ञानिक ने लगाया था? रुधिर वर्गों की वंशागति को रेखाचित्र की सहायता से समझाइए और इसका महत्त्व बताइए।

लिखित उत्तर

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सर्वप्रथम कार्ल लैण्डस्टीनर (Karl Landsteiner) ने पता लगाया कि लाल रुधिर कणिकाओं की कोशिका कला (plasmalemma) तथा प्लाज्मा (plasma) में विशेष प्रकार की प्रोटीन्स (proteins) होती हैं। इन प्रोटीन्स का सम्बन्ध रुधिर कणिकाओं के अभिश्लेषण (clumping or agglutination) से होता है। लाल रुधिर कणिकाओं की कोशिका कला में जो इस सम्बन्ध की प्रोटीन होती है, उसे प्रतिजन या एण्टीजन्स (antigens) कहा जाता है, जबकि प्लाज्मा में उपस्थित प्रोटीन को प्रतिरक्षी या एण्टीबॉडीज़ (antibodies) कहते हैं। प्रतिजन (antigens) दो प्रकार के होते हैं-.ए. तथा .बी. (A and B), प्रतिरक्षी (antibodies) भी दो प्रकार के ही होते हैं-.a. तथा .b.I .ए.-प्रतिज़न .ए.-प्रतिरक्षी की उपस्थिति में तथा .बी. प्रतिजन .बी. प्रतिरक्षी की उपस्थिति में अत्यधिक चिपचिपे (sticky) हो जाते हैं। अत: लाल रुधिर कणिकाएँ (RBCs) आपस में चिपकने लगती हैं जिसे अभिश्लेषण (clumping or agglutination) कहते हैं। प्रतिजनों (antigens) तथा प्रतिरक्षी की उपस्थिति के आधार पर लैण्डस्टीनर ने रुधिर को निम्नलिखित चार रुधिर वर्गों (blood groups) में वर्गीकृत किया-

उपर्युक्त का अर्थ है कि रुधिर वर्ग (blood group) A उसे कहेंगे जिसमें प्रतिजन A और प्रतिरक्षी b होती है। इसी प्रकार रुधिर वर्ग B में प्रतिजन B, किन्तु प्रतिरक्षी a, रुधिर वर्ग AB में दोनों प्रतिजन A और B, किन्तु प्रतिरक्षी कोई नहीं तथा रुधिर वर्ग O में प्रतिजन कोई नहीं होता, किन्तु प्रतिरक्षी दोनों प्रकार की (a तथा b) उपस्थित होती हैं।
रुधिर आधान (Blood Transfusion)-रुधिर आधान के लिए रुधिर वर्ग ज्ञात होना आवश्यक है। भिन्न रुधिर वर्ग का रुधिर देने से दिए गए रुधिर के लाल रुधिराणुओं का अभिश्लेषण (agglutination) हो जाता है और रुधिर प्रवाह रुक जाने से रोगी की मृत्यु हो जाती है। अत: रुधिर आधान समान रक्त वर्ग के व्यक्तियों के मध्य ही होना चाहिए। लेकिन आवश्यकता पड़ने पर आन्तरवर्गीय रक्त आधान भी किया जा सकता है। इसका निर्धारण निम्नलिखित तालिका के अनुसार किया जाता है-

तालिका-आन्तरवर्गीय रक्त आधान का निर्धारण
= रुधिर दिया जा सकता है, x = रुधिर नहीं दिया जा सकता।
.O. रक्त वर्ग में प्रतिजन (antigen) के अभाव में इस वर्ग का रुधिर सभी रुधिर वर्ग के व्यक्तियों को दिया जा सकता है, लेकिन दोनों प्रतिरक्षी (antibodies) की उपस्थिति के कारण .O. रुधिर वर्ग के व्यक्ति को किसी अन्य रुधिर वर्ग का रुधिर नहीं दिया जा सकता। .O. रुधिर वर्ग के व्यक्ति सर्वदाता (universal donor) कहलाते हैं। इसके विपरीत .AB. प्रतिजन (antigens) की उपस्थिति और प्रतिरक्षी की अनुपस्थिति के कारण .AB. रुधिर वर्ग वाले व्यक्तियों को किसी भी रुधिर वर्ग वाले व्यक्ति का रुधिर दिया जा सकता है। इनको सर्वग्राही (universal receivers) कहते हैं।
रुधिर वर्गों की वंशागति
(Inheritance of Blood Groups)
मानव के रुधिर वर्ग मेण्डल के नियमों के अनुसार वंशागत होते हैं। यहाँ बहुगुण ऐलीलवाद (multiple allelism) पाया जाता है। इस प्रकार की वंशागति दो या दो से अधिक तुलनात्मक लक्षणों वाले जीन्स (genes) अर्थात् ऐलील्स (alleles) पर निर्भर करती है।
रुधिर वर्गों को स्थापित करने वाले प्रतिजन (antigens) तथा उनकी उपस्थिति या अनुपस्थिति के लिए यहाँ तीन जीन्स होते हैं। प्रतिजन .A. के लिए,प्रतिजन .B. के लिए तथा दोनों प्रतिजनों की अनुपस्थिति के लिए `I^(o)` माने जाते हैं। इस प्रकार एक मनुष्य में इनमें से कोई दो अथवा एक ही प्रकार के दो जीन्स एक जोड़ा समजात गुणसूत्रों (homologous chromosomes) के निश्चित स्थल (loci) में स्थित होते हैं। जीन `I^(a)` तथा `I^(b)` सहप्रभावी (codominant) अर्थात् दोनों की उपस्थिति एक-दूसरे पर कोई प्रभाव नहीं डालती है। `I^(a)` तथा `I^(b)` जीन क्रमश: `I^(o)` पर प्रभावी होती हैं। अतः किसी मनुष्य की रुधिर वर्गों के लिए जीनी रचना निम्नांकित तालिका के अनुसार हो सकती है-

उपर्युक्त के अनुसार तथा मेण्डल के वंशागति सिद्धान्त को ध्यान में रखकर माता-पिता से शिशु में रुधिर वर्ग के अवतरण कों ज्ञात किया जा सकता है।
उदाहरण-AB तथा O रुधिर वर्ग वाले माता-पिता की सम्भावित सन्तानों के रुधिर वर्गों को निम्न रेखाचित्र द्वारा प्रदर्शित कर सकते हैं-

रुधिर वर्गों की वंशागति का महत्त्व (Importance of Inheritance of Blood Groups)-रुधिर वर्गों के जीनोटाइप के अवतरण से (मेण्डल के नियमानुसार) सम्भावित माता-पिता या शिशु का पता लगाना एक आवश्यक तथा महत्त्वपूर्ण जानकारी है। इससे अनेक कानूनी अड़चनों को निपटाया जा सकता है।
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