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Class 12
CHEMISTRY
उपसहसंयोजन यौगिकों में बन्धनी समावयवता क...

उपसहसंयोजन यौगिकों में बन्धनी समावयवता को एक उदाहरण की सहायता से समझाइए।

लिखित उत्तर

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बन्धनी समावयवता (Linkage isomerism)-इस प्रकार की समावयवता उभयदन्तुक (ambidentate) लिगेण्ड युक्त संकर यौगिकों में ही सम्भव है। ऐसे लिगेण्ड में एक से अधिक परमाणु इलेक्ट्रॉन युग्म दाता का कार्य कर सकते हैं। अतः ऐसे यौगिक जिनमें उभयदन्तुक (ambidentate) लिगेण्ड विद्यमान हों तथा केन्द्रीय धातु परमाणु लिगण्ड के दो दाता परमाणु से उपसहसंयोजक आबन्ध द्वारा बन्धित हों, बन्धक समावयवता प्रदर्शित करते हैं तथा उनके इस, गुण को बन्धक समावयवता कहते हैं जैसे `NO_(2)^(-)` आयन में नाइट्रोजन अथवा ऑक्सीजन परमाणु दाता के रूप में अभिक्रिया कर सकता है, परिणामस्वरूप इससे समावयवता प्रदर्शित होती है। यह व्यवहार कार्बनिक नाइट्राइट `R-O-NO` या नाइट्रो यौगिक `R-NO_(2)` से मिलता-जुलता समझा जाता है। इनके अतिरिक्त, थायोसायनेट लिगेण्ड, `NCS^(-)` युक्त संकुल। यह लिगेण्ड नाइट्रोजन द्वारा धातु से बन्धित होकर M-NCS तथा सल्फर द्वारा बन्धित होकर M-SCN देता है।
उदाहरण -
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