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Class 10
CHEMISTRY
आधुनिक आवर्त सारणी द्वारा किस प्रकार से ...

आधुनिक आवर्त सारणी द्वारा किस प्रकार से मेण्डेलीफ की आवर्त सारणी की विविध विसंगतियों को दूर किया गया?

लिखित उत्तर

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मेण्डेलीफ की आवर्त सारणी की विभिन्न विसंगतियों का निराकरण
सन् 1913 में मोजले ने सिद्ध किया कि परमाणु का आधारभूत गुण परमाणु क्रमांक है न कि परमाणु द्रव्यमान। आवर्ती वर्गीकरण का आधार परमाणु क्रमांक मानकर आधुनिक आवर्त सारणी तैयार की गई। इससे मेण्डेलीफ आवर्त सारणी की बहुत-सी निम्नलिखित विसंगतियाँ दूर हो गई हैं
(i) हाइड्रोजन का स्थान हाइड्रोजन परमाणु प्रथम समूह के तत्वों की तरह एक इलेक्ट्रॉन खोकर तथा सप्तम समूह के तत्वों की तरह एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके संयोग करता है, अतः इसको प्रथम तथा सप्तम समूह में रखना न्यायोचित है।
(ii) दुर्लभ मृदा तत्वों का स्थान-सभी मृदा तत्वों को एक ही स्थान पर रखा गया है, क्योंकि इनकी बाह्यतम कक्षा में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान है।
(iii) समस्थानिकों का स्थान--एक ही तत्व के सभी समस्थानिकों का परमाणु क्रमांक समान होता है, अता इन्हें एक ही स्थान पर रखा जाना उचित है।
(iv) भारी तत्वों को हल्के तत्वों से पहले रखना-परमाणु भार के आधार पर जो भारी तत्व हल्के तत्व से पहले आते हैं, उनका स्थान परमाणु क्रमांक के आधार पर उचित है, जैसे-आर्गन (Ar) का परमाणु भार 39.84 तथा परमाणु क्रमांक . 18 है, जो पोटैशियम (K) के परमाणु भार 39.1 तथा परमाणु क्रमांक 19 से पहले रखना न्यायसंगत है।
(v) असमान तत्वों को एक ही समूह में रखना-मेण्डेलीफ की आवर्त सारणी में I-A (क्षार धातुएँ) तथा I-B (सिक्का धातुएँ) को एक ही समूह में रखा गया है, जबकि इनके गुणों में भिन्नता पाई जाती है। आधुनिक आवर्त सारणी में I-A. और I-B पृथक्-पृथक् माने गए हैं तथा इन्हें परस्पर दूर रखा गया है।
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