Home
Class 10
PHYSICS
पार्श्वक्रम ( समान्तर-क्रम) में जुड़े ती...

पार्श्वक्रम ( समान्तर-क्रम) में जुड़े तीन प्रतिरोधों `R_1, R_2` तथा `R_3` के तुल्य प्रतिरोध के लिए सूत्र स्थापित कीजिए।

लिखित उत्तर

Verified by Experts

प्रतिरोधों का समान्तर-क्रम संयोजन-इस संयोजन में सभी प्रतिरोधकों के एक सिरे को एक साथ परिपथ के एक बिन्दु A पर तथा दूसरे सिरों को एक साथ दूसरे बिन्दु B पर जोड़ा जाता है। इस प्रकार के संयोजन में प्रत्येक प्रतिरोध दो सर्वनिष्ठ बिन्दुओं के बीच जुड़ा होता है। अतः सभी प्रतिरोधकों के सिरों के बीच का । विभवान्तर समान रहता है।

माना `R_1 R_2` व `R_3` तीन प्रतिरोधों को बिन्दुओं A व B के बीच समान्तर-क्रम में जोड़ा गया है। माना `R_1 , R_2` व `R_3` में धाराओं का मान क्रमश: `I_1,I_2` व `I_3` हो तो ओम के नियमानुसार,
`I_1 =V/R_1 , I_2 = V/R_2` तथा `I_3=V/R_3`
जहाँ V बिन्दुओं A व B के बीच विभवान्तर है।
यदि बिन्दु A अथवा B पर आने वाली कुल धारा का मान I हो तो
`I = I_1+I_2+I_3`
`=V/R_1+V/R_2+V/R_3`
या `I =V(1/R_1+1/R_2+R_3) " "...(1)`
यदि बिन्दुओं A व B के बीच तुल्य प्रतिरोध `R_1` हो तो ओम के नियम से,
`I=V/R_p " "...(2)`
तब समीकरण (1) और (2) से,
`V/R_p=V[1/R_1+1/R_2+1/R_3]`
या `1/R_p=1/R_1_1+1/R_2+1/R_3`
अर्थात् पार्श्वक्रम अथवा समान्तर-क्रम में जुड़े प्रतिरोधों का तुल्य प्रतिरोध का व्युत्क्रम उनके प्रतिरोधों के व्युत्क्रम के योग के बराबर होता है।
उपर्युक्त समीकरण के आधार पर प्रतिरोधकों के समान्तर-क्रम संयोजन के नियम निम्नवत हैं
(i) समान्तर-क्रम में संयोजित सभी प्रतिरोधकों के सिरों के बीच विभवान्तर समान होता है।
(ii) समान्तर-क्रम में संयोजित प्रतिरोधकों में प्रवाहित धाराएँ उनके प्रतिरोधों के व्युत्क्रमानुपाती होती हैं।
(iii) समान्तर-क्रम में संयोजित प्रतिरोधकों के तुल्य प्रतिरोध का व्युत्क्रम उनके प्रतिरोधों के व्युत्क्रम के योग के बराबर होता है।
Promotional Banner