माना दीवार के लम्बवत् दिशा X -अक्ष तथा उसके समान्तर दिशा Y-अक्ष के अनुदिश है।
माना प्रत्येक गेंद चाल से दीवार से टकराती है तथा u चाल से ही वापस लौटती है तथा प्रत्येक गेंद का द्रव्यमान m है।
(i) आरोपित बल की दिशा
चित्र-8.47 (a) के अनुसार गेंद X अक्ष की धन दिशा में गति करती हुई दीवार से टकराती है और टकराकर X-अक्ष की ऋण दिशा में वापस लौटती है।
अत: `(P_(x))_("प्रारम्भिक")=m u`
तथा `(P_(x))_(" अन्तिम")=m(-u)=-m u`
तथा `(P_(y)_(" प्रारम्भिक")=m xx0=0`
तथा `(P_(y))_("अन्तिम")=mxx0=0`
अत: X-अक्ष की दिशा में गेंद पर आवेग `=(P_(x))_("अंतिम")-(P_(x))_("प्रारम्भिक")`
`=-m u- m u =-2 m u`
तथा Y - अक्ष की दिशा में आवेग `(P_(y))_("अंतिम")-(P_(y))_("प्रारंभिक")=0`
`because` बल का आवेग आरोपित बल की दिशा में होता है।
अत: दीवार द्वारा गेंद पर आरोपित बल x-अक्ष की ऋण दिशा में है।
अतः क्रिया-प्रतिक्रिया के नियमानुसार गेंद द्वारा दीवार पर x-अक्ष की
धन दिशा में (दीवार के लम्बवत्) बल आरोपित होगा।
चित्र-8.47 (b) के अनुसार वेगों को x तथा Y-अक्षों की दिशाओं में वियोजित करने पर,
`(P_(x))_("प्रारम्भिक")=m u cos 30^(@)`,
`(P_(x))_("अन्तिम")=m(- u cos30^(@))=- m u cos 30^(@)`
`(P_(y))_("प्रारम्भिक")=m(-u sin30^(@))=-m u sin 30^(@)`
`(P_(y))_("अन्तिम")=m(-u sin 30^(@))=- m u sin30^(@)`
अत: X-अक्ष की दिशा में गेंद पर आवेग `=(P_(x))_("अन्तिम")-(P_(x))_("प्रारम्भिक")`
`=- 2 m u cos30^(@)`
तथा Y-अक्ष की दिशा में गेंद पर आवेग,
`=(P_(y))_("अन्तिम")-(P_(y))_("प्रारंभिक")=0`
अत: इस बार भी गेंद पर दीवार द्वारा X-अक्ष की ऋण दिशा में बल आरोपित किया जाता है तथा गेंद दीवार पर X-अक्ष की धन दिशा (दीवार के लम्बवत्) में बल आरोपित करती है।
इस प्रकार हम देखते हैं कि जब कोई वस्तु चिकनी दीवार से किसी भी दिशा में टकराती है, दीवार द्वारा वस्तु पर बल, दीवार के लम्बवत् दिशा में ही लगता है।
प्रकरण (a) तथा (b) में गेंदों पर दीवार द्वारा लगाए गए आवेगों का अनुपात
`=((2m u))/(2 m u cos30^(@))`
`=(1)/(cos30^(@))=(2)/(sqrt(3))`
`=2 : sqrt(3)` अथवा 1.2 : 1