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गरजते घन घनन-घन-घन, नाचता है मोर-सा मन...

गरजते घन घनन-घन-घन,
नाचता है मोर-सा मन,
ऐसी पड़ी झर-झर झड़ी भीगा बदन बेसुध है मन।
आज वर्षा अजब आई!
बह रही है मस्त पुरवाई
नदी है द्वार तक आई,
मेघों से लिपटकर सो गया सूरज
ले रहे हैं खेत अंगड़ाई!
आज वर्षा गजब आई!
'बेसुध है मन' कहकर कवि बताना चाहता है कि मन-

A

पानी से भीग जाता है

B

मस्त हो जाता है

C

गाने लगता है

D

झूमने लगता है

लिखित उत्तर

Verified by Experts

The correct Answer is:
B
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