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BIOLOGY
ऊर्जा के स्वरूपों पर विस्तृत टिप्पणी लिख...

ऊर्जा के स्वरूपों पर विस्तृत टिप्पणी लिखिए।

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पृथ्वी एक विशाल एवं जटिल पारितन्त्र हैं, इसको जीवमण्डल कहते हैं। हरे पौधे भोजन का निर्माण करते हैं। अन्य जीव प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से भोजन के लिए हरे पौधों पर निर्भर रहते हैं। प्रकाश संश्लेषण क्रिया में हरे पादप `CO_(2)` ग्रहण करके `O_(2)` मुक्त करते हैं। वातावरण में सभी घटक सन्तुलित रूप में रहते हैं। एक सीमा तक पर्यावरण में वाले परिवर्तनों को सन्तुलित करने की क्षमता पारितन्त्र में होती है, परन्तु जब जीव विशेष अपनी सुख-सुविधाओं हेतु पर्यावरण के किसी घटक का अधिक उपयोग कर उसे असन्तुलित कर देते हैं तो इससे पूरा पर्यावरण प्रभावित होता है। यह स्थिति जीवों के लिए हानिकारक होती है, इसको प्रदूषण (pollution) कहते हैं।
प्रदूषण की परिभाषा (Definition of pollution) – वायु, जल एवं मिट्टी के भौतिक, रासायनिक तथा जैविक लक्षणों का वह अवांछनीय परिवर्तन जो मानव एवं उससे सम्बन्धित लाभदायक जीवधारियों के जीवन, औद्योगिक संस्थानों की प्रगति एवं कृषि आदि को हानि पहुँचाता है, प्रदूषण (pollution) कहलाता है।
"मनुष्य पर्यावरण का सबसे बड़ा शत्रु है। इसके क्रियाकलापों द्वारा प्राकृतिक पर्यावरण में कुछ पदार्थ इतनी अधिक मात्रा में एकत्र हो जाते हैं कि पारिस्थितिक तन्त्र उनके पुनः चक्रण में सक्षम नहीं रह जाता। इससे पारितन्त्र का सन्तुलन बिगड़ जाता है। इन प्रतिकूल परिवर्तनों को प्रदूषण कहते हैं।" प्रदूषण उत्पन्न करने वाले पदार्थों को प्रदूषक (pollutants) कहते हैं। भारत सरकार ने पर्यावरण की गुणवत्ता को सुधारने की दृष्टि से वर्ष 1986 ई० में पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम पारित किया था।
प्रदूषण के प्रकार (Types of Pöllution)
प्रदूषण निम्नलिखित प्रकार का होता है---
(1) वायु प्रदूषण, ( 2 ) जल प्रदूषण,(3) मृदा प्रदूषण
(4) शोर (ध्वनि) प्रदूषण, (5) रेडियोधर्मी प्रदूषण, (6) इलेक्ट्रॉनिक प्रदूषण
प्रदूषकों के प्रकार (Types of Pollutants)
प्रदूषकों को दो मुख्य समूहों में वर्गीकृत किया जाता है (क) जैव निम्नीकरणीय प्रदूषक (Biodegradable pollutants)—–—घरेलू. वाहितमल (domestic sewage), विभिन्न कार्बनिक अपशिष्ट पदार्थ, मृत पादप एवं जन्तु, जन्तुओं के उत्सर्जी एवं मल पदार्थ आदि पदार्थों का सूक्ष्म जीवों द्वारा अपघटन होता रहता है। अतः इन्हें जैव निम्नीकरणीय प्रदूषक (biodegradable pollutants) कहते हैं। जब ये पदार्थ किसी स्थान पर अत्यधिक मात्रा में एकत्र हो जाते हैं तो ऑक्सीजन की कमी हो जाने से इनका अपघटन कठिन हो जाता है और ये पदार्थ प्रदूषण उत्पन्न करते हैं।
(ख) अनिम्नीकरणीय प्रदूषक (Non biodegradable pollutants)—अनेक पदार्थ जो अपशिष्ट के रूप में फेंक दिए जाते हैं, जैसे- काँच, प्लास्टिक, ऐलुमिनियम, लोहे के डिब्बे, पॉलिथीन बैग्स, पारे के यौगिक, डी०डी०टी० तथा अन्य कीटनाशी आदि। ये स्वयं विघटित नहीं होते और न ही सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटित होते हैं। इन पदार्थों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के केवल दो उपाय हैं- (i) इन पदार्थों के उपयोग को प्रतिबन्धित किया जाए अथवा इनको एकत्र करके पुनःचक्रण (recycling) द्वारा पुन: उपयोग में लाया जाए। (ii) इनके स्थान पर पारिस्थितिक हितैषी (ecofriendly) पदार्थों का उपयोग किया जाए।
अनेक अनिम्नीकरण प्रदूषक पारिस्थितिक तन्त्र में एकत्र ही नहीं होते बल्कि खाद्य श्रृंखला के माध्यम से एक पोषी स्तर (trophic level) से दूसरे पोषी स्तर में पहुंचते हैं। जैसे-जैसे ये एक पोषी स्तर से सर्वोच्च पोषी स्तर तक पहुँचते हैं शरीर में इनकी सान्द्रता बढ़ती चली जाती है, इसे जैवीय आवर्धन (biomagnification) कहते हैं।प्रदूषण का जीवों पर प्रभाव (Effect of Pollution on Livings)
प्रदूषण जीवों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रभावित करता है। प्रदूषण से पौधों तथा जन्तुओं में अनेक व्याधियाँ उत्पन्न हो जाती हैं तथा सम्पत्ति की भी हानि होने की सम्भावना बनी रहती है।
पौधों पर प्रदूषण के प्रभाव (Effects of Pollution on Plants) (
1) विभिन्न वायु प्रदूषक जैसे `SO_(2), NO_(2), CO` आदि वृद्धि, श्वसन, प्रकाश संश्लेषण आदि जैविक क्रियाओं को प्रभावित करते हैं।
(2) वायु प्रदूषकों के कारण ऊतकों का क्षय, पत्तियों का मुरझाना, पत्तियों का गिरना, फलों पर धब्बे, शाखाओं की वृद्धि कम होना, पादप प्रजनन आदि पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। पर्णहरित (क्लोरोफिल) के नष्ट होने को क्लोरोसिस (chlorosis) कहते हैं। इन सभी का उत्पादकता पर प्रभाव पड़ता है।
(3) जल प्रदूषण जलीय पादपों को हानि पहुँचाता है। कभी-कभी ऑक्सीजन आदि गैसों की कमी हो जाती है। जल प्रदूषण से मृदा भी प्रभावित होती है। कीटनाशी रसायनों की सान्द्रता बायोमैग्नीफिकेशन (biomagnification) के कारण जीवधारियों में बढ़ती है। ये खाद्य श्रृंखला के माध्यम से मनुष्य में पहुँचकर उसे हानि पहुँचाते हैं।
(4) रेडियोधर्मी प्रदूषण से पौधों में अवांछनीय आनुवंशिक परिवर्तन होने की सम्भावना बनी रहती है। रेडियोधर्मी पदार्थ पौधे से खाद्य श्रृंखला के माध्यम से मनुष्यों में पहुँचकर उसे हानि पहुँचाते हैं।
मनुष्यों तथा अन्य जन्तुओं पर प्रदूषण के प्रभाव (Effects of Pollution on Men and Other Animals)
प्रदूषण के मनुष्यों तथा अन्य जीव-जन्तुओं पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ते हैं
(1) वायु प्रदूषण से एलर्जी, आँख लाल होना, टॉन्सिल, सिरदर्द, उल्टी आना, चक्कर आना, रक्त चाप, चिड़चिड़ापन आदि रोग हो सकते हैं।
(2) वायु प्रदूषण से संक्रामक रोग भी फैलने का भय बना रहता है, जैसे-तपेदिक, श्वास रोग, निमोनिया, जुकाम आदि। अधिक समय तक प्रदूषित वातावरण में रहने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
(3) औद्योगिक प्रदूषण में निकलने वाली गैसों से अम्ल वर्षा (acid rain) तथा ग्रीन हाउस प्रभाव (green house effect) की सम्भावना बढ़ती है।
(4) प्रदूषण का शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, इससे मानसिक थकावट, रक्त चाप तथा अन्य मानसिक रोग उत्पन्न हो सकते हैं।
(5) जल प्रदूषण के कारण हैजा, टाइफॉइड, अतिसार, संग्रहणी, आंत्रशोथ आदि रोग हो जाते हैं।
(6) औद्योगिक प्रदूषक जैसे सीसा, पारा आदि से प्रदूषित जल के कारण जलीय जीव मर जाते हैं तथा उनमें नेत्र तथा मस्तिष्क रोगों के होने का भय बना रहता है। प्रदूषित जन्तुओं के प्रयोग से मनुष्य में अनेक रोग हो जाते हैं।
(7) फसल उत्पादन को बढ़ाने के लिए प्रयुक्त किए जाने वाले कीटनाशी, खरपतवारनाशी आदि रसायन खाद्य श्रृंखला के. माध्यम से मनुष्य में पहुँचकर उसे हानि पहुंचाते हैं।
(8) रेडियोधर्मी प्रदूषण से कैन्सर तथा अन्य आनुवंशिक रोग हो जाते हैं।
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