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Class 9
PHYSICS
ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों का वर्णन कीजिए।...

ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों का वर्णन कीजिए। दिखाइए सूर्य ही ऊर्जा का मूल स्रोत है।

लिखित उत्तर

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ऊर्जा के विभिन्न स्रोत-कर्जा के निम्नलिखित स्रोत हैं
(i) सौर ऊर्जा (Solar Energy)-सूर्य द्वारा उत्सर्जित ऊर्जा को सौर ऊर्जा कहते है। सौर ऊर्जा एक नवीकरणीय कर्जा है। इसके उपयोग के लिए अनेक उपकरण बनाए गए हैं। जैसे-खाना बनाने के लिए सोलर कुकर (solar cooker), पानी गर्म करने के लिए सोलर हीटर (solar heater) तथा विद्युत उत्पन्न करने के लिए सोलर सेल (solar cell) व सोलर पैनल (solar penals) आदि।
(ii) लकड़ी, कोयला, पेट्रोल आदि (Wood, Coal, Petrol etc.)-लकड़ी तथा. कोयला जलाने से हमें ऊष्मा प्राप्त होती है, जिसे यान्त्रिक अथवा विद्युत ऊर्जा में बदला जा सकता है। पृथ्वी के गर्भ से प्राप्त पत्थर का कोयला, मिट्टी का तेल, डीजल, पेट्रोल आदि महत्त्वपूर्ण ईधन हैं। पेट्रोल व डीजल तो मोटरगाड़ियाँ, रेल व वायुयान चलाने में प्रयुक्त होते हैं। आजकल कार्बनिक गैसों (जैसे-मेथेन) का प्रयोग भी ईंधन के रूप में हो रहा है।
(iii) जल-ऊर्जा (Hydro Energy)-बहते जल में बहुत अधिक गतिज ऊर्जा होती है। इसके द्वारा बहुत बड़े-बड़े लकड़ी के लट्ठों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जाता है। जल-ऊर्जा से ही पनचक्की चलाई जाती है। बड़े-बड़े बांध बनाकर, वर्षा तथा नदियों के जल को रोककर, टरबाइन के ब्लेडों पर गिराकर उन्हें घुमाया जाता है जिससे जल-विद्युत उत्पन्न होती है। हमारे देश में कुल विद्युत शक्ति का 23% से भी अधिक भाग जल-विद्युत से आता है।
(iv) पवन-ऊर्जा (Wind Energy)-बहती हुई वायु में गतिज ऊर्जा होती है जिसे पवन-ऊर्जा कहते हैं। इसके उपयोग से पवन चक्कियों को चलाया जाता है जिनमें बिजली के पंखों की भाँति ही ब्लेड लगे होते हैं, जो गतिशील वायु के टंकराने से घूमने लगते हैं। घूमते हुए ब्लेडों की घूर्णन गति से जल-पम्प तथा आटा पीसने की चक्की चलाई जा सकती हैं। पवन-ऊर्जा से पाल नावों को भी चलाया जाता है तथा आजकल इसका उपयोग विद्युत उत्पादन में भी किया जा रहा है।
(v) अवशिष्ट जैव-पदार्थ ऊर्जा (Residual Biomass Energy)-अनेक अवशिष्ट पदार्थ, जैसे-गोबर व सड़ी-गली वनस्पतियाँ आदि भी ऊर्जा के स्रोत हैं। ऐसे अवशिष्ट जैव-पदार्थों को एकत्र करके किसी बन्द जगह में सड़ने देते हैं। इससे एक ज्वलनशीलं गैस मेथेन बनती है जिसका उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता है। गोबर गैस इसी का एक उदाहरण है।
(vi) नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy) रेडियोधर्मी पदार्थों के नाभिकों के विखण्डन अथवा संलयन से मुक्त ऊर्जा को नाभिकीय ऊर्जा कहते हैं। जब यूरेनियम के नाभिकों पर मन्द गति के न्यूट्रॉनों की बमबारी करते हैं तो यूरेनियम नाभिक दो हल्के .नाभिकों में टूट जाता है तथा इस प्रक्रिया में अपार ऊर्जा प्राप्त होती है। इस प्रक्रिया को नाभिकीय विखण्डन (nuclear fission) कहते हैं तथा जिस संयन्त्र में नाभिकीय विखण्डन द्वारा ऊर्जा उत्पन्न की जाती है, उसे. नाभिकीय भट्ठी अथवा न्यूक्लियर रिऐक्टर कहते हैं।
ऊर्जा का मूल स्रोत सूर्य है। पृथ्वी पर मनुष्य ने ऊर्जा के जितने भी स्रोत बनाए अथवा खोजे हैं, उन सब में सूर्य की ऊर्जा ही किसी-न-किसी रूप में एकत्रित है। वास्तव में, सभी ऊर्जाएँ सूर्य की ऊर्जा का ही रूपान्तरण हैं।
अत: पृथ्वी पर समस्तै ऊर्जा स्रोतों का मूल सूर्य ही है। सूर्य ऊर्जा का अपार भण्डार है, जो करोड़ों वर्षों से ऊर्जा दे रहा है तथा आगे आने वाले करोड़ों वर्षों तक इसी प्रकार ऊर्जा देता रहेगा। सूर्य की इस अपार ऊर्जा का स्रोत, सूर्य के उच्च ताप पर हाइड्रोजन के हल्के नाभिकों का आपस में जुड़कर भारी हीलियम नाभिक में बदलना है, जिसे नाभिकीय संलयन कहते हैं। इस प्रक्रम में असीम मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है।
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