जब क्रिया के व्यापार का फल कर्ता में ही रहता है, तब उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं। यहाँ रोना एक अकर्मक क्रिया है, जबकि पढ़ना लेना तथा खाना सकर्मक क्रिया है। जिस क्रिया से सूचित होने वाले व्यापार का फल कर्ता को छोड़कर कर्म पर पड़ता है, उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं।