Home
Class 11
BIOLOGY
रुधिर के कणीय अवयव क्या हैं?...

रुधिर के कणीय अवयव क्या हैं?

लिखित उत्तर

Verified by Experts

रुधिर के कणीय अवयव
रुधिर हल्के पीले रंग का, गाढ़ा, हल्का क्षारीय (pH7.3-7.4) द्रव होता है। इसके दो मुख्य घटक होते हैं - (i) निर्जीव तरल मैट्रिक्स प्लाज्मा (plasma) तथा (ii) कणीय अवयंव रुधिर कणिकाएँ (blood corpuscles)। रुधिर कणिकाएँ रुधिर का लगभग 45% भाग बनाती हैं। ये तीन प्रकार की होती हैं -
(क) लाल रुधिर कणिकाएँ, (ख) श्वेत रुधिर कणिकाएँ तथा (ग) रुधिरं प्लेटलेट्स।
लाल रुधिर कणिकाएं (Red blood corpuscles or Erythrocytes = RBC)
लाल रुधिर कणिकाएँ कशेरुकी जन्तुओं (vertebrates) में हो पायी जाती हैं। मानव में लाल रुधिराणु 7.5-8`mu` व्यास . तथा 1.2`mu` मोटाई के होते हैं। पुरुषों में इनकी संख्या लगभग 50 से 65 लाख किन्तु स्त्रियों में लगभग 45 से 50 लाख प्रति घन मिमी होती है। ये गोलाकार एवं उभयावतल (biconcave) होती हैं। निर्माण के समय इनमें केन्द्रक (nucleus) सहित सभी प्रकार के कोशिकांग (cell organelles) होते हैं किन्तु बाद में केन्द्रक, गॉल्जीकाय, माइटोकॉण्ड्रिया, सेण्ट्रियोल आदि संरचनाएँ लुप्त हो जाती हैं, इसीलिए स्तनियों के लाल रुधिराणुओं को केन्द्रकविहीन (non-nucleated) कहा जाता है। ऊँट तथा लामा में लाल रुधिराणु केन्द्रकयुक्त (nucleated) होते हैं। लाल रुधिराणुओं में हीमोग्लोबिन (haemoglobin) प्रोटीन होती है। स्तनियों में इनका जीवनकाल लगभग 120 दिन होता है। वयस्क अवस्था में इनका निर्माण लाल अस्थिमज्जा में होता है। हीमोग्लोबिन, हीम (haem) नामक वर्णक तथा ग्लोबिन (globin) नामक प्रोटीन से बना होता है। हीम. पादपों में उपस्थित क्लोरोफिल के समान होता है, जिसमें क्लोरोफिल के मैग्नीशियम के स्थान पर हीमोग्लोबिन में लौह (Fe) होता है। हीमोग्लोबिन के एक अणु का निर्माण हीम के 4 अणुओं के एक ग्लोबिन अणु के साथ संयुक्त होने से होता है। हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन परिवहन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हीमोग्लोबिन की उपस्थिति के कारण RBC. गैसों के परिवहन में मदद करती हैं।

श्वेत रुधिर कणिकाएँ अनियमित आकार की, केन्द्रकयुक्त, रंगहीन तथा अमीबीय (amoeboid) कोशिकाएँ हैं। इनके कोशिकाद्रव्य की संरचना के आधार पर इन्हें दो समूहों में वर्गीकृत किया जाता है -
(अ) ग्रैन्यूलोसाइट्स (granulocytes) तथा (ब) एग्रैन्यूलोसाइट्स (agranulocytes)।
(अ) ग्रैन्यूलोसाइट्स (Granulocytes)-इनका कोशिकाद्रव्य कणिकामय तथा केन्द्रक पालियुक्त (lobed) होता है,ये तीन प्रकार की होती है-(i) बेसोफिल्स, (ii) ओसिनोफिल्स तथा. (iii) न्यूट्रोफिल्स।
(i) बेसोफिल्स (Basophils)-ये संख्या ये कुल श्वेत रुधिर कणिकाओं का मात्र 0.5 से 2% होती हैं। इनका केन्द्रक बड़ा तथा 2-3 पालियों में बँटा दिखाई देता है। इनका कोशिकाद्रव्य क्षारीय रंजकों से अभिरंजित होता है। इन कणिकाओं से हिपैरिन, हिस्टैमीन एवं सेरेटोनिन स्रावित होता है। (ii) इओसिनोफिल्स या एसिडोफिल्स (Eosinophils or Acidophils)-ये कुल श्वेत रुधिर कणिकाओं का 2-4% होते हैं। इनका केन्द्रक द्विपालिक (bilobed) होता है। दोनों पालियाँ परस्पर महीन तन्तु द्वारा जुड़ी रहती हैं। इनका कोशिकाद्रव्य अम्लीय रंजकों जैसे इओसीन से अभिरंजित होता है। ये शरीर की प्रतिरक्षण तथा हाइपरसेन्सिटिवंटी का कार्य करते हैं। परजीवी कृमियों की उपस्थिति के कारण इनकी संख्या बढ़ जाती है, इस रोग को इओसिनोफिलिया कहते हैं। (iii) न्यूट्रोफिल्स या हेटरोफिल्स (Neutrophils or Heterophils)-ये कुल श्वेत रुधिर कणिकाओं का 60 - 70% होती हैं। इनका केन्द्रक बहुरूपी होता है। यह तीन से पाँच पिण्डों में बँटा होता है। ये सूत्र द्वारा परस्पर जुड़े रहते हैं। इनके कोशिकाद्रव्य को अम्लीय, क्षारीय व उदासीन तीनों प्रकार के रंजकों से अभिरंजित कर सकते हैं। ये जीवाणु तथा अन्य हानिकारक पदार्थों का भक्षण करके शरीर की सुरक्षा करते हैं। इस कारण इन्हें मैक्रोफेज (macrophage) कहते हैं।
(ब) एग्रैन्यूलोसाइट्स (Agranulocytes)- इनका कोशिकाद्रव्य कणिकारहित होता है। इनका केन्द्रक अपेक्षाकृत बड़ा व घोड़े की नाल के आकार का (horse-shoe shaped) होता है। ये दो प्रकार की होती हैं-
(i) लिम्फोसाइट्स (Lymphocytes)- ये छोटे आकार के श्वेत रुधिराणु हैं। इनका कार्य प्रतिरक्षी (antibodies) का निर्माण करके शरीर की सुरक्षा करना है। (ii) मोनोसाइट्स (Monocytes)-ये बड़े आकार की कोशिकाएँ हैं, जो भक्षकाणु क्रिया (phagocytosis) द्वारा शरीर की सुरक्षा करती हैं।
रुधिर प्लेटलेट्स (Blood platlets)- इन्हें पट्टिकाणु या थ्रोम्बोसाइट्स (thrombocytes) भी कहा जाता है। यह पूर्ण कोशिका नहीं है अपितु अस्थिमज्जा की कोशिका मैगाकेरियोसाइट (megakaryocyte) के विखण्डन से बने केन्द्रकविहीन छोटे-छोटे टुकड़े हैं। रक्त में इनकी संख्या 1.5 से 3.5 लाख प्रति घन मिमी होती है। इनसे स्रावित पदार्थ रक्त के थक्का बनाने में मदद करते हैं। इनकी कमी से शरीर में रक्त स्राव सम्बन्धी विकार पैदा हो जाते हैं। यह कुछ अन्य पदार्थों का भी सावण करती है।
Promotional Banner

टॉपर्स ने हल किए ये सवाल

  • प्राणियों में संरचनात्मक संगठन

    CHITRA PUBLICATION|Exercise NCERT जीव विज्ञान प्रश्न प्रदर्शिका (Biology Exemplar Problems) पुस्तक से चयनित महत्त्वपूर्ण प्रश्न एवं उनके हल ( बहुविकल्पीय प्रश्न )|5 Videos
  • प्राणियों में संरचनात्मक संगठन

    CHITRA PUBLICATION|Exercise NCERT जीव विज्ञान प्रश्न प्रदर्शिका (Biology Exemplar Problems) पुस्तक से चयनित महत्त्वपूर्ण प्रश्न एवं उनके हल ( अति लघु उत्तरीय प्रश्न )|3 Videos
  • पौधों में परिवहन

    CHITRA PUBLICATION|Exercise अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (बहुविकल्पीय प्रश्न)|40 Videos
  • प्राणी जगत

    CHITRA PUBLICATION|Exercise अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (बहुविकल्पीय प्रश्न)|18 Videos
CHITRA PUBLICATION-प्राणियों में संरचनात्मक संगठन -अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर ( बहुविकल्पीय प्रश्न )
  1. रुधिर के कणीय अवयव क्या हैं?

    Text Solution

    |

  2. अस्थियों को परस्पर जोड़ने वाला ऊतक कहलाता है-

    Text Solution

    |

  3. पसलियां जुड़ी होती हैं

    Text Solution

    |

  4. उपास्थि का बाहरी खोल कहलाता है

    Text Solution

    |

  5. सर्दियों में कँपकँपी आना व दाँत किटकिटाना सम्बन्धित है

    Text Solution

    |

  6. रेखित और अनैच्छिक पेशियाँ पायी जाती है-

    Text Solution

    |

  7. सार्कोमीयर या पेशी खण्ड किन दो के मध्य का भाग होता है

    Text Solution

    |

  8. दृढ़ोतक कोशिकाएँ होती है

    Text Solution

    |

  9. हैवर्सियन नलिकाएँ पायी जाती हैं

    Text Solution

    |

  10. पेशियों में संकुचनशील प्रोटीन होती है।

    Text Solution

    |

  11. मास्ट कोशिकाओं से स्त्रावित होता है

    Text Solution

    |

  12. निम्नलिखित में से कौन-सा एक प्रकारका ऊतक है

    Text Solution

    |

  13. हृदय पेशी है

    Text Solution

    |

  14. निम्नलिखित में से किसके द्वारा योनि का कैंसर होता है

    Text Solution

    |

  15. केंचुआ को 'किसानों का मित्र' कहा जाता है।

    Text Solution

    |

  16. मूलदाब उत्तरदायी होता है :

    Text Solution

    |

  17. स्व: निषेचन होता है

    Text Solution

    |

  18. परभक्षी सहायता करते है-

    Text Solution

    |

  19. किस जन्तु में हीमोग्लोबिन प्लाज्मा में घुला रहता है?

    Text Solution

    |

  20. केंचुए में

    Text Solution

    |

  21. आर्थोपोड्स के रुधिर में निम्न वर्णक (pigment) पाया जाता है

    Text Solution

    |