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BIOLOGY
एन्जाइम की संरचना का वर्णन कीजिए।...

एन्जाइम की संरचना का वर्णन कीजिए।

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केंचुआ (फेरेटिमा पोस्थयमा) की बाह्य संरचना- बाह्य लक्षण (External Features)- केंचुए का शरीर लम्बा, पतला, बेलनाकार, खण्डयुक्त, लसलसा तथा द्विपार्श्वसममित होता है। यह लगभग. 15-20 सेमी लम्बा और 3-5 मिमी मोटा होता है। इसका अगला सिरा कुछ नुकीला तथा पिछला सिरा कुन्द (blunt) होता है। इसके प्रथम खण्ड (परितुण्ड-peristomium) के अधर तल पर अर्द्धचन्द्राकार मुखद्वार होता है। मुखद्वार के ऊपर मुखाग्र एक उभार (prostomium) के रूप में निकला रहता है। यह प्रकाशग्राही होता है। यह भाग सुरंग बनाने में भी सहायक होता है। केंचुए की त्वचा का भूरा-काला रंग पोरफाइरिन वर्णक की उपस्थिति के कारण होता है। केंचुए का सम्पूर्ण शरीर लगभग 100-120 छोटे-छोटे समखण्डों में बँटा रहता है। देहगुहा भी पटों (septa) द्वारा सम-खण्डों में बँटी रहती है।
क्लाइटेलम (Clitellum) -केंचुए के 14,15,16वें खण्डों के चारों ओर एक मोटा, चिकना वलय (girdle) होता है जिसे पर्याणिका या क्लाइटेलम (clitellum) कहते हैं। जनन के समय क्लाइटेलम से कोकून (cocoon) बनता हैं।
छिद्र (Apertures) -केंचुए की बाह्य सतह पर आहारनाल, जननांगों एवं उत्सर्जी अंगों से सम्बन्धित अनेक छिद्र पाए जाते हैं - (i) मुख (Mouth)-अर्द्धचन्द्राकार मुख प्रथम खण्ड (पेरिस्टोमियम) के अधर तल पर स्थित होता है। (ii) गुदा (Anus) शरीर के अन्तिम खण्ड में गुदा एक दरार के रूप में पायी जाती है। (iii) नर जनन छिद्र तथा जनन अंकुर (Male Genital Pores and Genital Papillae)-केंचुए के 18वें खण्ड के अधर तल पर एक जोड़ा नर जनन छिद्र (male genital pores) होते हैं। 17वें तथा 19वें खण्डों के अधर तल पर एक-एक जोड़ा उभार होते हैं जिन्हें जनन अंकुर (genital papillae) कहते हैं। ये मैथुन में सहायक होते हैं। (iv) मादा जनन छिद्र (Female Genital Pore)-14वें खण्ड के अधर तल पर मध्य रेखा पर एक मादा जनन छिद्र होता है। (v) शुक्रग्राहिका छिद्र (Spermathecal Pores) केंचुए के 5/6, 6/7, 7/8 तथा 8/9 अन्तराखण्डीय खाँचों के अधर-पार्श्व तलों पर एक-एक जोड़ी शुक्रग्राहिका छिद्र (spermathecal pores) पाए जाते हैं। (vi) पृष्ठ छिद्रे (Dorsal Pores)-12/13वें अन्तराखण्डीय खाँच से अन्तिम अन्तराखण्डीय खाँच को छोड़कर प्रत्येक खाँच में एक-एक पृष्ठ छिद्र (dorsal pore) होता है। इससे देहगुहीय तरल बाहर निकलता है (vii) वृक्कक छिद्र (Nephridial Pores) केंचुए के प्रथम दो खण्डों तथा अन्तिम खण्ड को छोड़कर सभी खण्डों में वृक्कक छिद्र पाए जाते हैं। केंचुएं के पहले, अन्तिम तथा क्लाइटेलर खण्डों (14, 15, 16वें खण्ड) को छोड़कर प्रत्येक खण्ड में काइंटिन से बनी . के आकार की संरचनाएँ शूक (setae) वलय के रूप में लंगी होती हैं। ये प्रचलन में सहायक होती हैं।
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