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CHEMISTRY
परावर्तनी भट्ठी का नामांकित चिन्न बनाइए।...

परावर्तनी भट्ठी का नामांकित चिन्न बनाइए।

लिखित उत्तर

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परावर्तनी भट्ठी (Reverberatory furnace)-इस भट्ठी में ईंधन अलग स्थान पर जलाया जाता है तथा गर्म किए जाने वाले अयस्क को सीधे ज्वाला के सम्पर्क में नहीं आने देते हैं। यह केवल गर्म गैसों के सम्पर्क में आकर गर्म होता है। इस प्रक्रम में गर्म किए जाने वाला पदार्थ भट्ठी तल (hearth) पर रखा जाता है और ईंधन अग्नि-स्थान (fire-place) में जलाया जाता है।

परावर्तनी भट्ठी का उपयोग
इसका उपयोग ऑक्सीकरण तथा अपचयन दोनों प्रकार के प्रक्रमों में करते हैं। इस भट्ठी का प्रयोग ताँबा, लेड, टिन आदि धातुओं के धातुकर्म में किया जाता है
कार्यविधि-ताँबा धातु के धातुकर्म में सान्द्रित कॉपर पाइराइट के भर्जन में परावर्तनी भट्ठी का उपयोग किया जाता है। सान्द्रित अयस्क का वायु की अधिकता में तथा कम ताप पर भर्जन किया जाता है। भर्जन क्रिया में गैस की ज्वालाएँ अयस्क पर पड़ती हैं।
जिससे अयस्क में सीधी आग नहीं लगती है। भट्ठी में वायु प्रवाहित करने के लिए छिद्र बने होते हैं
इस प्रक्रम में निम्नलिखित परिवर्तन होते हैं-
(i) गन्धक, आर्सेनिक तथा एण्टीमनी के ऑक्साइड वाष्म के रूप में पृथक् हो जाते हैं।
`S+O_2rarrSO_2uarr`
`4As+3O_2+2As_2O_3uarr`
`4Sb+3O_2rarr2Sb_2O_3uarr`
(ii) कॉपर पाइराइट क्यूप्रस सल्फाइड और फेरस सल्फाइड में परिवर्तित हो जाता है।
`underset"कॉपर पाइराइट"(2CuFeS_2)+O_2rarrCu_2Sdarr+2FeSdarr+SO_2uarr`
(iii) क्यूप्रस सल्फाइड तथा फेरस सल्फाइड का कुछ भाग ऑक्साइडों में परिवर्तित हो जाता है।
`2FeS+3O_2rarr2FeO+2SO_2uarr`
`2Cu_2S+3O_2rarr2Cu_2O+2SO_2`
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