शुद्ध ऐलुमिना के विद्युत अपघटन से ऐलुमिनियम धातु कैसे प्राप्त करते हैं तथा एप की विधि से इसका शोधन कैसे करते हैं?
शुद्ध ऐलुमिना के विद्युत अपघटन से ऐलुमिनियम धातु कैसे प्राप्त करते हैं तथा एप की विधि से इसका शोधन कैसे करते हैं?
लिखित उत्तर
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(क) ऐलुमिनियम के अयस्क
ऐलुमिनियम के प्रमुखा अयस्क निम्नलिखित है-
1. ऑक्साइड अयस्क-(i) कोरन्डम `(Al_2O_3)`, (ii) डायास्पोर `(Al_2O_3"."H_2O)`, (iii) बॉक्साइट `(Al_2O_3"."2H_2O)`, (iv) जिबसाइट `(Al_2O_3"."3H_2O)`
2. सिलिकेट अयस्क-(i) .फेल्सपार `(K_2O"."Al_2O_3"."6SiO_2)`, (ii) अबरक (अभ्रक) `(K_2O"."3Al_2O_3"."6SiO_2"."2H_2O)`,(iii) चीनी मिट्टी `(Al_2O_3"."3H_2O)`
3. सल्फेट अयस्क-ऐलुनाइट या ऐलम स्टोन `(K_2SO_4"."Al_2(SO_4)_3"."4Al(OH)_3)`
4. फ्लुओराइड अयस्क-क्रायोलाइट `(Na_3AlF_6)`
उपर्युक्त अयस्कों में से ऐलुमिनियम का प्रमुख अयस्क बॉक्साइट है। ख) ऐलुमिनियम का निष्कर्षण
बॉक्साइट से ऐलुमिनियम का निष्कर्षण निम्नलिखित तीन पदों में किया जाता है।
बाक्साइट का सान्द्रण
बॉक्साइट में `SiO_2,Fe_2O_3` तथा कुछ अन्य अशुद्धियाँ होती है। बॉक्साइट अयस्क का सान्द्रण निम्नलिखित प्रक्रमों द्वारा किया जाता है जो बॉक्साइट में उपस्थित अशुद्धियों पर निर्भर होते है-
1. हाल प्रक्रम-जब बॉक्साइट अयस्क में `Fe_2O_3` तथा `SiO_2`, की अशुद्धियाँ अधिक मात्रा में होती है, तब इस प्रक्रम का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रम में बॉक्साइट को बारीक पीसकर सोडियम कार्बोनेट के साथ प्रगलित करते हैं जिससे बॉक्साइट में विद्यमान `Al_2O_3` विलेय सोडियम मेटाऐलुमिनेट `(NaAlO_2)` में परिवर्तित हो जाता है जिसे जल में निष्कर्षित कर लेते हैं। अशुद्धियों पर इसका कोई प्रभाव नहीं होता है, वे अविलेय होती हैं जिन्हें छानकर पृथक् कर देते हैं।
`Al_2O_3"."2H_2O+Na_2CO_3rarrunderset"सोडियम मेटाऐलुमिनेट (विलेय)"(2NaAlO_2)+CO_2uarr+2H_2Ouarr`
जल द्वारा निष्कर्षित सोडियम मेटाऐलुमिनेट का ताप `50-60^@C` करके `CO_2` गैस प्रवाहित करते है जिससे ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड अवक्षेपित हो जाता है। इस अवक्षेप को छानकर तथा कई बार जल से धोकर सुखा लिया जाता है। शुष्क `Al(OH)_3` को `1500^@C` पर गर्म करके शुद्ध ऐलुमिना प्राप्त किया जाता है।
`underset"विलेय"(2NaAlO_2)+3H_2O+CO_2overset(50-60^@C)rarrunderset"ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड"(2Al(OH)_3darr)+Na_2CO_3`
`2Al(OH)_3undersetDeltaoverset(1500^@C)rarrAl_2O_3+3H_2Ouarr`
2. बायर प्रक्रमा-इस प्रक्रम का बॉक्साइट के शोधन में तब उपयोग किया जाता है जब बॉक्साइट में फेरिक ऑक्साइड `(Fe_2O_3)` की अशुद्धि अधिक मात्रा में उपस्थित होती है। इस विधि में बॉक्साइट का भर्जन (roasting) करते हैं जिससे इसमें विद्यमान कुछ फेरस ऑक्साइड, फेरिक ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है। फिर अशुद्ध बॉक्साइट को 40-45% कॉस्टिक सोडा विलयन के साथ 80 वायुमण्डलीय दाब तथा `150^@C` ताप पर ऑटोक्लेव (autoclave) में गर्म करते हैं। ऐसा करने पर सोडियम मेटाऐलुमिनेट बन जाता है। प्राप्त मिश्रण को छान लेते हैं, जिससे `Fe_2O_3,SiO_2` तथा `TiO_2` की अविलेय अशुद्धियाँ पृथक् हो जाती हैं।
`Al_2O_3"."2H_2O+2NaOHoverset(150^@C)underset"80 वायुमण्डल"rarrunderset"सोडियम मेटाऐलुमिनेट"(2NaAlO_2)+3H_2O`
अशुद्धियों को विलयन से छानकर पृथक् कर लेते हैं। प्राप्त निस्यन्द में थोड़ा-सा नव-अवक्षेपित `Al(OH)_3` डालकर जल के साथ उबालते हैं। इससे सम्पूर्ण सोडियम मेटाऐलुमिनेट जल-अपघटित होकर `Al(OH)_3` का अवक्षेप देता है।
`NaAlO_2+2H_2Orarrunderset"ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड"(Al(OH)_3darr)+NaOH`
इस अवक्षेप को छानकर, जल से धोकर सुखा लेते हैं। इस सूखे अवक्षेप को लगभग `1500^@C` पर गर्म करने से शुद्ध ऐलुमिना प्राप्त हो जाता है।
`2Al(OH)_3undersetDeltaoverset(1500^@C)rarrunderset"ऐलुमिना"(Al_2O_3)+3H_2Ouarr`
बायर प्रक्रम बॉक्साइट अयस्क के शोधन का प्रमुख प्रक्रम है। अधिकांश औद्योगिक संस्थानों में बॉक्साइट अयस्क का शोधन बायर प्रक्रम द्वारा किया जाता है।
शुद्ध बॉक्साइट अथवा ऐलुमिना का विद्युत अपचयन
हाल, बायर अथवा सपेंक प्रक्रमों से प्राप्त शुद्ध बॉक्साइट जिसे ऐलुमिना कहते हैं, से विद्युत अपचयन विधि द्वारा शुद्ध ऐलुमिनियम धातु प्राप्त करते हैं। इस विधि को हाल-हेरॉल्ट (Hall-Heroult) विधि भी कहते हैं। शुद्ध ऐलुमिना `(Al_2O_3)` विद्युत का कुचालक होता है। इसका गलनांक `2050^@C` होता है, जबकि ऐलुमिनियम का क्वथनांक `1800^@C` है क्योंकि ऐलुमिनियम `1800^@C` पर वाष्प में परिवर्तित हो जाता है, इसलिए `Al_2O_3` के पिघलने के ताप को कम करने के लिए इसमें उचित गालक जैसे क्रायोलाइट `(Na_3AlF_6)` तथा तथा फ्लोरस्पार `(CaF_2)` को 20 : 20 : 40 के अनुपात में मिलाते हैं। इन गालकों की उपस्थिति में ऐलुमिना विद्युत का सुचालक हो जाता है और उसके पिघलने का तापक्रम लगभग `900^@C` हो जाता है। ऐलुमिना का विद्युत अपघटन करने के लिए लोहे के एक आयताकार बॉक्स में लिया जाता है जो 8 फीट लम्बा तथा 6 फीट चौड़ा होता है। इस बॉक्स के अन्दर 30 सेमी मोटी गैस कार्बन की परत होती है जो कैथोड का कार्य करती है। ऐनोड ग्रेफाइट की कई छड़ों का बना होता है जो ताँबे की छड़ के सहारे लगभग धरातल तक पहुँचते हैं। ये छड़ें `Al_2O_3,Na_3AlF_6` तथा `CaF_2`, के पिघले मिश्रण में जो विद्युत अपघट्य का कार्य करता है, डूबी रहती हैं (इसमें पहले `Na_3AlF_6` को `1000^@C` तक पिघलाकर उसमें शुद्ध `Al_2O_3` डालते हैं और फिर तरलता बढ़ाने हेतु उपर्युक्त अनुपात में `CaF_2` मिलाते हैं)। विद्युत परिपथ में समान्तर क्रम में एक बल्ब लगाकर विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है जिससे ऐनोड पर ऑक्सीजन मुक्त होती है, जो ग्रेफाइट से अभिक्रिया करके CO तथा `CO_2` गैस के रूप में निकल जाती है। कैथोड (कार्बन अस्तर) पर ऐलुमिनियम धातु मुक्त होती है, जिसे समय-समय पर एक छिद्र से बाहर निकाल लिया जाता है। ग्रेफाइट के ऐनोड के ऑक्सीकरण के कारण ग्रेफाइट की छड़ें धीरे-धीरे समाप्त होती जाती हैं जिससे कुछ समय बाद नई छड़ें लगानी पड़ती है। विद्युत अपघटन की अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण निम्नलिखित है जिसमें एक धारणा के अनुसार पहले क्रायोलाइट आयनित होता है
`underset"क्रायोलाइट"(2Na_3AlF_6)hArr6Na^(+)+2Al^(3+)+12F^(-)`
ऐनोड पर - `12F^(-)rarr6F_2+12e^(-)`
`2Al_2O_3+6F_2rarr4AlF_3+3O_2uarr`
`2C+O_2rarr2COuarr`
`C+O_2rarrCO_2uarr`
कैथोड पर - `2Al^(3+)+6e^(-)rarrunderset"ऐलुमिनियम धातु"(2Al)`
उपर्युक्त अभिक्रिया से स्पष्ट है कि क्रायोलाइट `Na_3AlF_6` , ऐलुमिना का गलनांक कम करने के साथ-साथ इसके विद्युत अपघटन में भी सहायता करता है। विद्युत अपघटन के समय ऐलुमिना की मात्रा कम होने पर लगा हुआ बल्ब जब तेजी से जलने लगता है, तब ऐलुमिना डाला जाता है। क्रायोलाइट की उपस्थिति में गलित ऐलुमिना के विद्युत अपघटन से लगभग 99.8% शुद्ध ऐलुमिनियम प्राप्त होता है।
ऐलुमिना और क्रायोलाइट के गलित मिश्रण पर विद्युत अपघटन के समय पिसा हुआ कार्बन डाल दिया जाता है जिससे ऊष्मा अपघटन में ही प्रयुक्त हो और बाहर कम निकले, आँखों पर चमकर्ती धातु का प्रभाव न पड़े और `Na_3AlF_6` वाष्पित न हो जाए।
ऐलुमिनियम का शोधन
ऐलुमिनियम का शोधन हूप की विद्युत-अपघटनी विधि (Hoope.s electrolytic process) द्वारा किया जाता है। इस विधि में कार्बन के अस्तर लगे हुए लोहे के एक बॉक्स (टैक) में घनत्व के आधार पर तीन द्रव की परतें होती हैं। इनमें टैंक के सबसे नीचे गलित अशुद्ध ऐलुमिनियम की परत, मध्य में सोडियम, बेरियम तथा ऐलुमिनियम के फ्लुओराइडों के गलित मिश्रण की परत तथा सबसे ऊपर गलित शुद्ध ऐलुमिनियम की परत होती है। ऊपर के द्रव का आपेक्षिक घनत्व सबसे कम तथा नीचे के द्रव का आपेक्षिक घनत्व सर्वाधिक होता है।
अशुद्ध ऐलुमिनियम की परत ऐनौड तथा शुद्ध ऐलुमिनियम की परत कैथोड के समान कार्य करती है। सोडियम, बेरियम तथा ऐलुमिनियम के फ्लुओराइडों का गलित मिश्रण विद्युत-अपघट्य (electrolyte) का कार्य करता है। शुद्ध ऐलुमिनियम की परत में लटकी हुई मेफाइट की छड़ें तथा अशुद्ध ऐलुमिनियम की परत के सम्पर्क में उपस्थित कॉपर-ऐलुमिनियम मिश्नधातु की छड़ चालक का कार्य करती है
विद्युत धारा प्रवाहित करने पर शुद्ध ऐलुमिनियम मध्य परत से कैथोड पर एकत्रित हो जाता है तथा समान मात्रा में ऐलुमिनियम नीचे की परत से मध्य परत में आ जाता है। इस प्रकार शुद्ध ऐलुमिनियम ऐनोड (नीचे की परत) से कैथोड (ऊपर की परत) पर आ जाता है और अशुद्धियाँ नीचे रह जाती है। इस विधि द्वारा प्राप्त ऐलुमिनियम 99.98% शुद्ध होता है।
अत: इस प्रकार उपर्युक्त प्रक्रियाओं द्वारा बॉक्साइट अयस्क से शुद्ध ऐलुमिनियम धातु का निष्कर्षण किया जाता है।
ऐलुमिनियम के प्रमुखा अयस्क निम्नलिखित है-
1. ऑक्साइड अयस्क-(i) कोरन्डम `(Al_2O_3)`, (ii) डायास्पोर `(Al_2O_3"."H_2O)`, (iii) बॉक्साइट `(Al_2O_3"."2H_2O)`, (iv) जिबसाइट `(Al_2O_3"."3H_2O)`
2. सिलिकेट अयस्क-(i) .फेल्सपार `(K_2O"."Al_2O_3"."6SiO_2)`, (ii) अबरक (अभ्रक) `(K_2O"."3Al_2O_3"."6SiO_2"."2H_2O)`,(iii) चीनी मिट्टी `(Al_2O_3"."3H_2O)`
3. सल्फेट अयस्क-ऐलुनाइट या ऐलम स्टोन `(K_2SO_4"."Al_2(SO_4)_3"."4Al(OH)_3)`
4. फ्लुओराइड अयस्क-क्रायोलाइट `(Na_3AlF_6)`
उपर्युक्त अयस्कों में से ऐलुमिनियम का प्रमुख अयस्क बॉक्साइट है। ख) ऐलुमिनियम का निष्कर्षण
बॉक्साइट से ऐलुमिनियम का निष्कर्षण निम्नलिखित तीन पदों में किया जाता है।
बाक्साइट का सान्द्रण
बॉक्साइट में `SiO_2,Fe_2O_3` तथा कुछ अन्य अशुद्धियाँ होती है। बॉक्साइट अयस्क का सान्द्रण निम्नलिखित प्रक्रमों द्वारा किया जाता है जो बॉक्साइट में उपस्थित अशुद्धियों पर निर्भर होते है-
1. हाल प्रक्रम-जब बॉक्साइट अयस्क में `Fe_2O_3` तथा `SiO_2`, की अशुद्धियाँ अधिक मात्रा में होती है, तब इस प्रक्रम का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रम में बॉक्साइट को बारीक पीसकर सोडियम कार्बोनेट के साथ प्रगलित करते हैं जिससे बॉक्साइट में विद्यमान `Al_2O_3` विलेय सोडियम मेटाऐलुमिनेट `(NaAlO_2)` में परिवर्तित हो जाता है जिसे जल में निष्कर्षित कर लेते हैं। अशुद्धियों पर इसका कोई प्रभाव नहीं होता है, वे अविलेय होती हैं जिन्हें छानकर पृथक् कर देते हैं।
`Al_2O_3"."2H_2O+Na_2CO_3rarrunderset"सोडियम मेटाऐलुमिनेट (विलेय)"(2NaAlO_2)+CO_2uarr+2H_2Ouarr`
जल द्वारा निष्कर्षित सोडियम मेटाऐलुमिनेट का ताप `50-60^@C` करके `CO_2` गैस प्रवाहित करते है जिससे ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड अवक्षेपित हो जाता है। इस अवक्षेप को छानकर तथा कई बार जल से धोकर सुखा लिया जाता है। शुष्क `Al(OH)_3` को `1500^@C` पर गर्म करके शुद्ध ऐलुमिना प्राप्त किया जाता है।
`underset"विलेय"(2NaAlO_2)+3H_2O+CO_2overset(50-60^@C)rarrunderset"ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड"(2Al(OH)_3darr)+Na_2CO_3`
`2Al(OH)_3undersetDeltaoverset(1500^@C)rarrAl_2O_3+3H_2Ouarr`
2. बायर प्रक्रमा-इस प्रक्रम का बॉक्साइट के शोधन में तब उपयोग किया जाता है जब बॉक्साइट में फेरिक ऑक्साइड `(Fe_2O_3)` की अशुद्धि अधिक मात्रा में उपस्थित होती है। इस विधि में बॉक्साइट का भर्जन (roasting) करते हैं जिससे इसमें विद्यमान कुछ फेरस ऑक्साइड, फेरिक ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है। फिर अशुद्ध बॉक्साइट को 40-45% कॉस्टिक सोडा विलयन के साथ 80 वायुमण्डलीय दाब तथा `150^@C` ताप पर ऑटोक्लेव (autoclave) में गर्म करते हैं। ऐसा करने पर सोडियम मेटाऐलुमिनेट बन जाता है। प्राप्त मिश्रण को छान लेते हैं, जिससे `Fe_2O_3,SiO_2` तथा `TiO_2` की अविलेय अशुद्धियाँ पृथक् हो जाती हैं।
`Al_2O_3"."2H_2O+2NaOHoverset(150^@C)underset"80 वायुमण्डल"rarrunderset"सोडियम मेटाऐलुमिनेट"(2NaAlO_2)+3H_2O`
अशुद्धियों को विलयन से छानकर पृथक् कर लेते हैं। प्राप्त निस्यन्द में थोड़ा-सा नव-अवक्षेपित `Al(OH)_3` डालकर जल के साथ उबालते हैं। इससे सम्पूर्ण सोडियम मेटाऐलुमिनेट जल-अपघटित होकर `Al(OH)_3` का अवक्षेप देता है।
`NaAlO_2+2H_2Orarrunderset"ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड"(Al(OH)_3darr)+NaOH`
इस अवक्षेप को छानकर, जल से धोकर सुखा लेते हैं। इस सूखे अवक्षेप को लगभग `1500^@C` पर गर्म करने से शुद्ध ऐलुमिना प्राप्त हो जाता है।
`2Al(OH)_3undersetDeltaoverset(1500^@C)rarrunderset"ऐलुमिना"(Al_2O_3)+3H_2Ouarr`
बायर प्रक्रम बॉक्साइट अयस्क के शोधन का प्रमुख प्रक्रम है। अधिकांश औद्योगिक संस्थानों में बॉक्साइट अयस्क का शोधन बायर प्रक्रम द्वारा किया जाता है।
शुद्ध बॉक्साइट अथवा ऐलुमिना का विद्युत अपचयन
हाल, बायर अथवा सपेंक प्रक्रमों से प्राप्त शुद्ध बॉक्साइट जिसे ऐलुमिना कहते हैं, से विद्युत अपचयन विधि द्वारा शुद्ध ऐलुमिनियम धातु प्राप्त करते हैं। इस विधि को हाल-हेरॉल्ट (Hall-Heroult) विधि भी कहते हैं। शुद्ध ऐलुमिना `(Al_2O_3)` विद्युत का कुचालक होता है। इसका गलनांक `2050^@C` होता है, जबकि ऐलुमिनियम का क्वथनांक `1800^@C` है क्योंकि ऐलुमिनियम `1800^@C` पर वाष्प में परिवर्तित हो जाता है, इसलिए `Al_2O_3` के पिघलने के ताप को कम करने के लिए इसमें उचित गालक जैसे क्रायोलाइट `(Na_3AlF_6)` तथा तथा फ्लोरस्पार `(CaF_2)` को 20 : 20 : 40 के अनुपात में मिलाते हैं। इन गालकों की उपस्थिति में ऐलुमिना विद्युत का सुचालक हो जाता है और उसके पिघलने का तापक्रम लगभग `900^@C` हो जाता है। ऐलुमिना का विद्युत अपघटन करने के लिए लोहे के एक आयताकार बॉक्स में लिया जाता है जो 8 फीट लम्बा तथा 6 फीट चौड़ा होता है। इस बॉक्स के अन्दर 30 सेमी मोटी गैस कार्बन की परत होती है जो कैथोड का कार्य करती है। ऐनोड ग्रेफाइट की कई छड़ों का बना होता है जो ताँबे की छड़ के सहारे लगभग धरातल तक पहुँचते हैं। ये छड़ें `Al_2O_3,Na_3AlF_6` तथा `CaF_2`, के पिघले मिश्रण में जो विद्युत अपघट्य का कार्य करता है, डूबी रहती हैं (इसमें पहले `Na_3AlF_6` को `1000^@C` तक पिघलाकर उसमें शुद्ध `Al_2O_3` डालते हैं और फिर तरलता बढ़ाने हेतु उपर्युक्त अनुपात में `CaF_2` मिलाते हैं)। विद्युत परिपथ में समान्तर क्रम में एक बल्ब लगाकर विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है जिससे ऐनोड पर ऑक्सीजन मुक्त होती है, जो ग्रेफाइट से अभिक्रिया करके CO तथा `CO_2` गैस के रूप में निकल जाती है। कैथोड (कार्बन अस्तर) पर ऐलुमिनियम धातु मुक्त होती है, जिसे समय-समय पर एक छिद्र से बाहर निकाल लिया जाता है। ग्रेफाइट के ऐनोड के ऑक्सीकरण के कारण ग्रेफाइट की छड़ें धीरे-धीरे समाप्त होती जाती हैं जिससे कुछ समय बाद नई छड़ें लगानी पड़ती है। विद्युत अपघटन की अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण निम्नलिखित है जिसमें एक धारणा के अनुसार पहले क्रायोलाइट आयनित होता है
`underset"क्रायोलाइट"(2Na_3AlF_6)hArr6Na^(+)+2Al^(3+)+12F^(-)`
ऐनोड पर - `12F^(-)rarr6F_2+12e^(-)`
`2Al_2O_3+6F_2rarr4AlF_3+3O_2uarr`
`2C+O_2rarr2COuarr`
`C+O_2rarrCO_2uarr`
कैथोड पर - `2Al^(3+)+6e^(-)rarrunderset"ऐलुमिनियम धातु"(2Al)`
उपर्युक्त अभिक्रिया से स्पष्ट है कि क्रायोलाइट `Na_3AlF_6` , ऐलुमिना का गलनांक कम करने के साथ-साथ इसके विद्युत अपघटन में भी सहायता करता है। विद्युत अपघटन के समय ऐलुमिना की मात्रा कम होने पर लगा हुआ बल्ब जब तेजी से जलने लगता है, तब ऐलुमिना डाला जाता है। क्रायोलाइट की उपस्थिति में गलित ऐलुमिना के विद्युत अपघटन से लगभग 99.8% शुद्ध ऐलुमिनियम प्राप्त होता है।
ऐलुमिना और क्रायोलाइट के गलित मिश्रण पर विद्युत अपघटन के समय पिसा हुआ कार्बन डाल दिया जाता है जिससे ऊष्मा अपघटन में ही प्रयुक्त हो और बाहर कम निकले, आँखों पर चमकर्ती धातु का प्रभाव न पड़े और `Na_3AlF_6` वाष्पित न हो जाए।
ऐलुमिनियम का शोधन
ऐलुमिनियम का शोधन हूप की विद्युत-अपघटनी विधि (Hoope.s electrolytic process) द्वारा किया जाता है। इस विधि में कार्बन के अस्तर लगे हुए लोहे के एक बॉक्स (टैक) में घनत्व के आधार पर तीन द्रव की परतें होती हैं। इनमें टैंक के सबसे नीचे गलित अशुद्ध ऐलुमिनियम की परत, मध्य में सोडियम, बेरियम तथा ऐलुमिनियम के फ्लुओराइडों के गलित मिश्रण की परत तथा सबसे ऊपर गलित शुद्ध ऐलुमिनियम की परत होती है। ऊपर के द्रव का आपेक्षिक घनत्व सबसे कम तथा नीचे के द्रव का आपेक्षिक घनत्व सर्वाधिक होता है।
अशुद्ध ऐलुमिनियम की परत ऐनौड तथा शुद्ध ऐलुमिनियम की परत कैथोड के समान कार्य करती है। सोडियम, बेरियम तथा ऐलुमिनियम के फ्लुओराइडों का गलित मिश्रण विद्युत-अपघट्य (electrolyte) का कार्य करता है। शुद्ध ऐलुमिनियम की परत में लटकी हुई मेफाइट की छड़ें तथा अशुद्ध ऐलुमिनियम की परत के सम्पर्क में उपस्थित कॉपर-ऐलुमिनियम मिश्नधातु की छड़ चालक का कार्य करती है
विद्युत धारा प्रवाहित करने पर शुद्ध ऐलुमिनियम मध्य परत से कैथोड पर एकत्रित हो जाता है तथा समान मात्रा में ऐलुमिनियम नीचे की परत से मध्य परत में आ जाता है। इस प्रकार शुद्ध ऐलुमिनियम ऐनोड (नीचे की परत) से कैथोड (ऊपर की परत) पर आ जाता है और अशुद्धियाँ नीचे रह जाती है। इस विधि द्वारा प्राप्त ऐलुमिनियम 99.98% शुद्ध होता है।
अत: इस प्रकार उपर्युक्त प्रक्रियाओं द्वारा बॉक्साइट अयस्क से शुद्ध ऐलुमिनियम धातु का निष्कर्षण किया जाता है।
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