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Class 12
CHEMISTRY
अयस्कों का सान्द्रण क्यों आवश्यक होता है...

अयस्कों का सान्द्रण क्यों आवश्यक होता है?

लिखित उत्तर

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अयस्कों को प्रायः खानों (mines) से प्राप्त किया जाता है। इनमें मिट्टी, कंकड़, आदि अपद्रव्य मिले रहते हैं जिन्हें गैंग या आधात्री (gangue or matrix) कहते हैं। किसी धातु निष्कर्षण से पहले अयस्कों में से गैंग या आधात्री को अलग करना आवश्यक होता है। अयस्क को गैंग या आधात्री से पृथक् करके अयस्क में धातु की प्रतिशत मात्रा में वृद्धि करना अयस्क का सान्द्रण कहलाता है।
चुम्बकीय पृथक्करण विधि (Magnetic separation method)—जब अयस्क अथवा अशुद्धि में से कोई घटक चुम्बकीय प्रवृत्ति का होता है, तब पृथक्करण के लिए इस विधि का प्रयोग किया जाता है। चुम्बकीय पृथक्कारी में दो रोलरों पर एक बेल्ट गतिमान रहती है। इन रोलरों में से एक रोलर प्रबल चुम्बक होता है। जब बारीक पिसे हुए अयस्क को गतिशील बेल्ट के एक सिरे पर डालते हैं तो चुम्बकीय पदार्थ चुम्बक के समीप ही एकत्र हो जाता है, जबकि अचुम्बकीय पदार्थ रोलर से दूर गिरता है। इस विधि से फैरोमैग्नेटिक अयस्कों का सान्द्रण किया जाता है। उदाहरणार्थ-वॉल्फ्रेमाइट `(FeWO_4)` एक चुम्बकीय अशुद्धि है। टिन के अयस्क कैसीटेराइट से पृथक् करने के लिए इस विधि का प्रयोग किया जाता है। इस विधि का उपयोग लोहे के अयस्क के सान्द्रण में भी किया जाता है।
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