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CHEMISTRY
भर्जन तथा प्रगलन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।...

भर्जन तथा प्रगलन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

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सान्द्रित अयस्क को अकेले या किसी अन्य पदार्थ के साथ मिलाकर उसके गलनांक के नीचे बिना संगलित हुए वायु की नियन्त्रित मात्रा की उपस्थिति में गर्म करने की क्रिया को भर्जन कहा जाता है, जबकि भर्जित या निस्तापित अयस्क को अपचायक पदार्थ कोक तथा उचित गालक (flux) के साथ मिलाकर उच्च ताप पर गर्म करके गलाने की क्रिया को प्रगलन कहते हैं। भर्जन क्रिया द्वारा अयस्क आंशिक या पूर्ण रूप से ऑक्सीकृत हो जाता है तथा अयस्क में उपस्थित सल्फर, आर्सेनिक, एण्टीमनी आदि अशुद्धियाँ ऑक्सीकृत होकर वाष्पशील ऑक्साइडों के रूप में पृथक् हो जाती हैं। प्रगलन में अयस्क का धातु में अपचयन हो जाता है अथवा धातुयुक्त पदार्थ पिघल जाता है। भर्जन परावर्तनी भट्टी में कराया जाता है, जबकि प्रगलन वात्या भट्टी में सम्पन्न किया जाता है। उदाहरण-हेमेटाइट अयस्क से लौह धातु के प्रगलन में निम्नलिखित अभिक्रियाएँ होती हैं-
`Fe_2O_3+3Coverset"गर्म"rarr2Fe+3COuarr`
`Fe_2O_3+3COoverset"गर्म"rarr2Fe+3CO_2uarr`
`underset"गालक"(CaO)+underset"आधात्री"(SiO_2)rarrunderset"(कैल्सियम सिलिकेट) धातुमल"(CaSiO_3)`
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