संस्पर्श (सम्पर्क) विधि द्वारा `H_2SO_4` का उत्पादन
सल्फ्यूरिक अम्ल का उत्पादन सम्पर्क प्रक्रम द्वारा तीन चरणों में सम्पन्न होता है।-
(i) सल्फर अथवा सल्फाइड अयस्कों को वायु में जलाकर सल्फर डाइऑक्साइड का उत्पादन करना। (ii) उत्प्रेरक `(V_2O_5` ) की उपस्थिति में ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया कराकर `SO_2` का `SO_3` में परिवर्तन करना। (iii) `SOs_3` को सल्फ्यूरिक अम्ल में अवशोषित करके ओलियम `(H_2S_2O_7)` प्राप्त करना।
संस्पर्श (सम्पर्क) विधि द्वारा–सल्फ्यूरिक अम्ल के उत्पादन का प्रवाह चित्र, में दिया गया है। प्राप्त सल्फर डाइऑक्साइड को धूल के कणों एवं आर्सेनिक यौगिकों जैसी अन्य अशुद्धियों से मुक्त कर शुद्ध कर लिया जाता है। सल्फ्यूरिक अम्ल के उत्पादन में ऑक्सीजन द्वारा `SO_2` गैस का `V_2O_5` उत्प्रेरक की उपस्थिति में `SO_3` प्राप्त करने के लिए उत्प्रेरकी ऑक्सीकरण मूल पद है।
`2SO_2 (g) + O_2 (g) underset("उत्प्रेरक ")overset(V_2O_5)(iff) 2SO_3(g) , Delta_r H^@ = - 196.6 kJ"mol"^(-1)`
यह अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी तथा उत्क्रमणीय है एवं अग्र अभिक्रिया में आयतन में कमी आती है। अतः कम ताप और उच्च दाब उच्च लब्धि (yield) के लिए उपयुक्त स्थितियाँ हैं, परन्तु तापक्रम बहुत कम नहीं होना चाहिए अन्यथा अभिक्रिया की गति धीमी हो जाएगी। सल्फ्यूरिक अम्ल के उत्पादन में प्रयुक्त संयन्त्र का संचालन 2 bar दाब तथा 720 K ताप पर किया जाता है। उत्प्रेरकी परिवर्तक से प्राप्त `SO_3` गैस, सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल में अवशोषित होकर ओलियम `(H_2S_2O_7)` बना देती है। जल द्वारा ओलियम
का तनुकरण करके वांछित सान्द्रता वाला सल्फ्यूरिक अम्ल प्राप्त कर लिया जाता है। प्रक्रम के सतत संचालन तथा लागत में भी कमी लाने के लिए उद्योग में उपर्युक्त दोनों प्रक्रियाएँ साथ-साथ सम्पन्न की जाती हैं।
`SO_3 (g) + H_2SO_4(aq) to H_2S_2O_7(aq)`
`H_2S_2O_7 (aq) + H_2O(l) to 2H_2SO_4 (aq)`
सम्पर्क विधि द्वारा सल्फ्यूरिक अम्ल की शुद्धता सामान्यतः 96-98% होती है।