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Class 12
CHEMISTRY
नाइट्रिक अम्ल के औद्योगिक निर्माण की बर्...

नाइट्रिक अम्ल के औद्योगिक निर्माण की बर्कलैण्ड-आइड विधि का सचित्र वर्णन कीजिए।

लिखित उत्तर

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नाइट्रिक अम्ल के निर्माण की औद्योगिक विधियाँ
(1) बर्कलैण्ड और आइड प्रक्रम या आर्क प्रक्रम (Birkeland and Eyde process or arc process)-सिद्धान्त (Principle)-वायु को जब विद्युत आर्क में से प्रवाहित किया जाता है तो वायु की नाइट्रोजन ऑक्सीजन से संयुक्त होकर निम्नलिखित अभिक्रियाएँ देती हैं -
`N_2 + O_2 iff 2NO - 43.2` किलोकैलोरी
`2NO + O_2 to 2NO_2`
`3NO_2 + H_2O to 2HNO_3 + NO uarr`
प्रथम क्रिया उत्क्रमणीय तथा ऊष्माशोषी है। इसलिए ला-शातेलिए के नियमानुसार अधिक ताप पर अधिक नाइट्रिक ऑक्साइड बनेगी।
कार्यविधि (Procedure)-`CO_2` व जलवाष्प रहित वायु विद्युत आर्क में लगभग `3000^@C` ताप पर प्रवाहित की जाती है। इससे नाइट्रोजन व ऑक्सीजन के संयोजन से नाइट्रिक ऑक्साइड बनती है। नाइट्रिक ऑक्साइड तथा ऑक्सीजन का मिश्रण शीतलक में से गुजारकर `500^@C` तक ठण्डा किया जाता है तथा फिर बॉयलर में `60^@C` तक ठण्डा किया जाता है। यहाँ जल प्रवाहित किया जाता है। गैसों का मिश्रण ऑक्सीकारक स्तम्भ में पहुँचता है। यहाँ नाइट्रिक ऑक्साइड ऑक्सीजन से संयुक्त होकर नाइट्रोजन डाइऑक्साइड बनाती है। अब ये गैसें अवशोषण स्तम्भ में पहुँचती हैं जहाँ सिलिका के टुकड़े भरे होते हैं तथा ऊपर से धीरे-धीरे जल गिरता रहता है। नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जल में अवशोषित होकर नाइट्रिक अम्ल उत्पन्न करती है। शेष गैसें वायु से क्रिया करके और अधिक अम्ल देती हैं

यह विधि उन देशों के लिए उपयुक्त है, जहाँ विद्युत सस्ती है।
(2) ओस्टवाल्ड प्रक्रम (Ostwald.s process)--सिद्धान्त (Principle)-इसमें अमोनिया गैस प्लैटिनम उत्प्रेरक की उपस्थिति में `650-800^@C` ताप पर वायु की ऑक्सीजन से ऑक्सीकृत होकर नाइट्रिक ऑक्साइड बनाती है, जो फिर से ऑक्सीकृत होकर नाइट्रोजन डाइऑक्साइड देती है। यह जल से अभिक्रिया करके नाइट्रिक अम्ल में परिवर्तित हो जाती है।
`4NH_3 + 5O_2 underset(650-800^@C)overset(Pt)(to) 4NO uarr + 6H_2O`
`2NO + O_2 to 2NO_2 uarr`
`3NO_2 + H_2O to 2HNO_3 + NO uarr`
कार्यविधि (Procedure)-इस प्रक्रम में शुद्ध `NH_3` व वायु का मिश्रण 1:9 के अनुपात में उत्प्रेरक परिवर्तक में प्रवाहित किया जाता है। यहाँ प्लैटिनम की जाली `650-800^@C` पर गर्म रखी जाती है, जो उत्प्रेरक का कार्य करती है। यहाँ `NH_3` का 90% भाग ऑक्सीकृत होकर नाइट्रिक ऑक्साइड बनाता है। अब गैसों का मिश्रण ऑक्सीकारक स्तम्भ में पहुँचाया जाता है, जहाँ NO ऑक्सीकृत होकर नाइट्रोजन डाइऑक्साइड देती है। `NO_2` अवशोषण स्तम्भ में जल में अवशोषित होकर नाइट्रिक अम्ल बनाती है। आजकल यह प्रक्रम काफी उपयोग में लाया जाता है | इस प्रकार तनु नाइट्रिक अम्ल प्राप्त होता है। इसका आसवन करने पर एक निश्चित क्वथनांक का मिश्रण प्राप्त होता है जिसे सान्द्र नाइट्रिक अम्ल कहते हैं।
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