क्लोरीन का औद्योगिक निर्माण
क्लोरीन के औद्योगिक निर्माण में दो विधियाँ प्रमुख हैं- 1. डीकन विधि (Deacon method) 2. विद्युत-अपघटनी विधि (Electrolytic method)
1. डीकन विधि (Deacon method)[HCI से निर्माण (Preparation from HCl)]-सिद्धान्त (Theory)-इस विधि में HCl का ऑक्सीकरण क्यूप्रिक क्लोराइड (उत्प्रेरक) की उपस्थिति में लगभग `450^@C` ताप पर वायु की ऑक्सीजन द्वारा निम्नवत् किया जाता है -
उत्प्रेरक कक्ष में झाँवा पत्थर क्यूपिक क्लोराइड विलयन में भिगोकर रख देते हैं तथा ताप `450^@C` कर देते हैं। HCl तथा वायु का मिश्रण 4:1 के अनुपात में लेकर उत्प्रेरक कक्ष में प्रवाहित किया जाता है और गर्म गैसें उसके नीचे से प्रवाहित करते हैं। इससे अभिक्रिया द्वारा क्लोरीन गैस बनती है, परन्तु इसमें `HCI, N_2,O_2` तथा जलवाष्प की अशुद्धियाँ मिली होती हैं। इस मिश्रण को शीतलक द्वारा ठण्डा करके धावन कक्ष जिसके बीच में क्वार्ट्स के टुकड़े भरे रहते हैं और ऊपर रखी जल की टंकी से जल टपकता रहता है, में प्रवाहित करके जल द्वारा HCI हटा देते हैं। फिर शोषण कक्ष जिसके बीच में क्वार्ट्स के टुकड़े भरे रहते हैं और ऊपर रखी टंकी में सान्द्र `H_2SO_4` टपकता रहता है, में प्रवाहित करने पर सान्द्र `H_2SO_4` द्वारा जलवाष्प पृथक कर देते हैं। इस प्रकार `N_2, O_2` मिश्रित क्लोरीन प्राप्त होती है। इस विधि से प्राप्त `Cl_2` अशुद्ध होने के कारण आजकल इस विधि से `Cl_2` का निर्माण नहीं करते हैं।