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दूब पशुओं के खुर से कुचली जाती है, खुरपी...

दूब पशुओं के खुर से कुचली जाती है, खुरपी से छीली जाती है, कुदाली। से खोदी जाती है, हल की नोक से उलटी जाती है, अहिंन कहे जाने वाले पशुओं से निर्ममता के साथ चरी जाती है और मानवों के सबसे उत्तम वृत्ति रखने वाले खेतिहर से सतायी जाती है, पर वह प्रत्येक जीवन यात्री को वर्षा में फिसलने से बचने के लिए पाँवड़े बिछाती है। जरा-सा भी मौका मिल जाए, तो फैलकर मखमली फर्श बन जाती है, पनघट के मंगल गीतों का उच्छ्वास पाकर वह मरकत की राशि बन जाती है, शरद् का प्रसन्न आकाश जब रीझकर मोती बरसाता है, तब वह धरती की छितरायी आँचर बन जाती है और जब ग्रीष्म का कुपित रवि आग बरसाता है, तब वह धरती के धीरज की छाँह बन जाती है। उस दूब को यदि नारी पूजा की थाली में सजाती है तो उन समस्त अत्याचारों का क्षण-भर के लिए उपशम हो जाता है जिन्हें दूब प्रतिक्षण सहती रहती है। भारतीय संस्कृति का मूल आधार है तितिक्षा, जिसकी सही अर्थ में मूर्त व्यंजना ही दूर्वा है। तितिक्षा ही के कारण उस संस्कृति की एक शाखा उच्छिन्न होते ही दूसरी शाखा निकल आयी है। जितने ही उस पर मार्मिक आघात हुए हैं, उतने ही शत-सहन उमंगों के साथ वह पनपी है। इसी के कारण उसे अंप्रतिहत मांगलिक स्वरूप प्राप्त हुआ. है। दूर्वा की नोक से जब हल्दी छिड़की जाती है तो ऐसा लगता है कि तितिक्षा के अग्रभाग से साक्षात् सौभाग्य छिड़का जा रहा हो। हल्दी-दूब का यह संयोग सत्व को चिद् और आनंद का मंगलमय परिधान देता है, नहीं तो अपने में सत्व निरापदं और अशिव है। उसको अपना गौरव चिद् और आनंद के सुखद संयोग में ही प्राप्त होता है। शायद इसीलिए वह सत्व, राष्ट्र के प्रतीक में हल्दी और दूब के योग का मध्यमान बन गया है।
गद्यांश के अनुसार श्रेष्ठ व्यवसाय है

A

व्यापार

B

अध्यापन

C

कृषि

D

कोई नहीं

लिखित उत्तर

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The correct Answer is:
C
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