Home
Class 14
HINDI
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर ...

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
उत्तर भारत के सन्त कवि कबीर और दक्षिण भारत के सन्त कवि तिरुवल्लुवर के समय में लगभग दो हजार वर्ष का अन्तराल है, किन्तु इन दोनों महाकवियों के जीवन में अदभुत साम्य पाया जाता है। दोनों के माता-पिता ने जन्म देकर इन्हें त्याग दिया था, दोनों का लालन-पालन निःसन्तान दम्पतियों ने बड़े स्नेह और जतन से किया था। व्यवसाय से दोनों जुलाहे थे। दोनों ने सात्विक गृहस्थ जीवन की साधना की थी
तिरुवल्लुवर का प्रामाणिक जीवन-वृत्तान्त प्राप्त नहीं होता। प्रायः उन्हें चेन्नई के निकट मइलापुर गाँव का जुलाहा माना जाता है, किन्तु कुछ लोगों के अनुसार वे राजा एल्लाल के शासन में एक बड़े पदाधिकारी थे और उन्हें वैसा ही सम्मान प्राप्त था जैसा चन्द्रगुप्त के शासनकाल में चाणक्य को। उनके बारे में अनेक दन्तकथाएँ प्रचलित हैं। जैसे कहा जाता है कि एक संन्यासी नारी जाति से घृणा करता था। उसका विश्वास था कि स्त्रियाँ बुराई की जड़ हैं और उनके साथ ईश्वर-भक्ति हो ही नहीं सकती। तिरुवल्लुवर ने बड़े आदर से उसे अपने घर बुलाया। दो दिन उनके परिवार में रहकर संन्यासी के विचार ही बदल गए। उसने कहा, "यदि तिरुवल्लुवर और उनकी पत्नी जैसी जोड़ी हो, तो गृहस्थ जीवन ही श्रेष्ठ है।" कबीर के दोहों की भाँति तिरुवल्लुवर ने भी छोटे छन्द में कविता रची जिसे 'कुरल' कहा जाता है। कुरलों का संग्रह "तिरुक्कुरल' उनका एकमात्र ग्रन्थ है। तिरुक्कुरल को तमिल भाषा का वेद माना जाता है। इसका प्रत्येक कुरल एक सूक्ति है और ये सूक्तियाँ सभी धर्मों का सार हैं। सम्पूर्ण मानवजाति को शुभ के लिए प्रेरित करना ही इसका उद्देश्य प्रतीत होता है। जैसे धर्म के बारे में दो कुरलों का आशय है। भद्र पुरुषो! पवित्र मानव होना ही धर्म है। स्वच्छ मन वाले बनो और देखो तुम उन्नति के शिखर पर कहाँ-से-कहाँ पहुँच जाते हो। झूठ न बोलने के गुण को ग्रहण करो तो किसी अन्य धर्म की आवश्यकता ही न रहेगी।
यदि कबीर का समय पन्द्रहवीं शताब्दी ईसवी है, तो तिरुवल्लुवर का समय होगा

A

लगभग 1500 वर्ष ई.पू.

B

लगभग पहली सदी ईसवी

C

लगभग 1000 वर्ष ई.पू.

D

लगभग 500 वर्ष ई.पू.

लिखित उत्तर

Verified by Experts

The correct Answer is:
D
Promotional Banner