हॉर्मोन्स-वे रासायनिक पदार्थ जो वाहिनीविहीन ग्रन्थियों के द्वारा स्रावित किए जाते हैं, हॉर्मोन्स कहलाते हैं। ये पदार्थ शरीर के जिस भाग पर कार्य करते हैं, वह उनके स्रावण होने वाले भाग से भिन्न होता है। हॉर्मोन्स जैव रासायनिक अभिक्रिया को प्रभावित तथा नियन्त्रित करते हैं। इस कारण इनको जैव-अणु कहा जाता है। इनकी आवश्यकता बहुत कम मात्रा में होती है। हॉर्मोन्स को रासायनिक गुणों के आधार पर निम्नलिखित तीन भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है-.
1. स्टेरॉयड हॉर्मोन्स–सभी स्टेरॉयड यौगिक चार वलय तन्त्र के व्युत्पन्न होते हैं, इनमें तीन साइक्लोहेक्सेन तथा एक साइक्लोपेन्टेन वलय होती हैं। ये वसा में विलेय तथा जल में अविलेय होते हैं।
स्टेरॉयड का चार वलय तन्त्रा स्टेरॉयड हॉर्मोन्स को निम्न दो भागों में विभक्त किया जा सकता है-
(a) लिंग हॉर्मोन्स तथा (b) एड्रिनोकोर्टिकल हॉर्मोन्स या कोर्टिकोस्टेरॉयडा
(a) लिंग हॉर्मोन्स-लिंग हॉर्मोन भी तीन प्रकार के होते हैं-
(i) नर लिंग हॉर्मोन या एन्ड्रोजन्स-इसका प्रमुख उदाहरण टेस्टोस्टेरॉन है।
(ii) मांदा लिंग हॉर्मोन या एस्ट्रोजन्स-इसका प्रमुख उदाहरण एस्ट्रोजन है।
(iii) गर्भधारण हॉर्मोनं या प्रोजेस्टीन-इसका प्रमुख उदाहरण प्रोजेस्टेरॉन है। (b) एड्रिनोकोर्टिकल हॉर्मोन या कोर्टिकोस्टेरॉयड-इसका प्रमुख उदाहरण कॉर्टीसोन है।
2. पॉलिपेप्टाइड (प्रोटीन) हॉर्मोन-इस- हॉर्मोन का स्रावण पीयूष ग्रन्थि एवं पैराथायरॉइड ग्रन्थि से तथा अग्न्याशय एवं हाइपोथैलेमस की अन्तःस्रावी कोशिकाओं में होता है। इनके प्रमुख उदाहरण-इन्सुलिन, ग्लूकागॉन, ऑक्सीटोसिन तथा वैसोप्रैसिन हैं।
3. ऐमीन हॉर्मोन्स-ऐमीन हॉर्मोन्स के प्रमुख उदाहरण थायरॉक्सिन तथा ऐपीनेफ्रिन हैं। अन्य हॉमोन्स के सापेक्ष इनके अणुओं का आकार छोटा होता है।
उपर्युक्त महत्त्वपूर्ण हॉर्मोन्स, उनके स्रोत तथा कार्य निम्न सारणी में दिए गए हैं-
