.विटामिन. शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है-एक Vita जिसका अर्थ है life (जीवन) तथा दूसरा Amins जिसका अर्थ है Base (आधार) अर्थात् विटामिन जीवन के आधार हैं। अतः ऐसे कार्बनिक पदार्थ, जो जन्तुओं तथा मनुष्यों के शरीर की ठीक वृद्धि तथा उनकी जीवन-क्रियाओं के लिए अत्यन्त आवश्यक हैं, विटामिन कहलाते हैं। हॉपकिन्स ने कहा था कि , विटामिन की उपस्थिति स्वस्थ शरीर के लिए आवश्यक है। इनके अभाव से शरीर में विशेष रोग हो जाते हैं। मुख्य विटामिन .A., .B., .C., .D. तथा .E. हैं।
विटामिन .A. इसका अणुसूत्र `C_20H_29OH` है। इसका रासायनिक नाम रेटिनॉल या ऐक्सेरोफाइटॉल है। इसके मुख्य स्रोत दूध, मछली, पालक, सलाद, बन्दगोभी, धनियां, आम, पपीता, टमाटर, गाजर आदि हैं। इसकी कमी से शरीर की वृद्धि रुक जाती है और रतौंधी (रात्रि का अन्धापन) नामक रोग हो जाता है।
विटामिन .B.-पहले इसको एक पदार्थ समझा जाता था, परन्तु आज 12 विटामिन .B. ज्ञात हैं, जैसे-`.B_1.,.B_2.,.B_3.,....B_6.,.....B_12.`। इनके मुख्य स्रोत दाल, अनाज के दाने, पत्तेदार तरकारियाँ, दूध के पदार्थ, गोश्त, अण्डे आदि हैं। विटामिन `B_1` की कमी से त्वचा रोग, बेरीबेरी, स्नायविक दोष हो जाते हैं।
विटामिन .C.-इसे ऐस्कॉर्बिक अम्ल भी कहते हैं। इसका अणुसूत्र `C_6H_8O_6`है। इसके मुख्य स्रोत नींबू, नारंगी, आँवला हैं। इसके अभाव में स्कर्वी नामक रोग हो जाता है।
विटामिन .D.-यह एक संकीर्ण पदार्थ है। इसमें कम-से-कम चार पदार्थ मिले. होते हैं। इसके मुख्य स्रोत मक्खन, घी, अण्डे, मछली, सूर्य की पराबैंगनी किरणें हैं। इसके अभाव में हड्डियाँ कमजोर पड़ जाती हैं और रिकेट नामक रोग हो जाता है। यह गर्भ में बच्चे के शरीर को स्वस्थ बनाने में उपयोगी है।
विटामिन .E.—यह प्रजनन विटामिन है। इसके मुख्य स्रोत गेहूँ, अण्डे, दूध, गोश्त आदि हैं। इसकी कमी से प्रजनन शक्ति क्षीण हो जाती है। इसकी कमी से जन्तु नपुंसक हो जाते हैं।