एन्जाइम ग्लोबुलर प्रोटीन होते हैं जो जैव तन्त्र में जैव उत्प्रेरक का कार्य करते हैं। इनका निर्माण जीवित कोशिकाओं द्वारा होता है तथा ये अपने कार्य में अतिविशिष्ट (highly specific) होते हैं। अतः एन्जाइम आवश्यक जैव उत्प्रेरक होते हैं जो ताप तथा pH की मध्य परिस्थितियों में विशिष्ट जैविक क्रियाओं को अति उच्च दर से सम्पन्न कराते हैं।
एन्जाइम के बिना जैव प्रक्रियाएँ अंतिमन्द दर से होती हैं। उदाहरणार्थ-एन्जाइमों की अनुपस्थिति में हमारा पाचन तन्त्र एक बार खाने वाले भोजन को 50 वर्षों में पचा पाएगा।
एन्जाइम के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं-
(1) एन्जाइम कोलॉइडी प्रोटीन होते हैं अर्थात् ये प्रोटीन के समान कोलॉइडी विलयन बनाते हैं। ये जल, नमक के घोल तथा ग्लिसरीन में विलेय होते हैं।
(2) एन्जाइम का कार्य-क्षेत्र अति विशिष्ट होता है। सामान्यतया एक एन्जाइम एक प्रतिक्रिया को ही उत्प्रेरित करता है।
(3) एन्जाइम `25-35^@C` पर सर्वाधिक क्रियाशील होते हैं। `60^@C` से अधिक ताप पर ये नष्ट हो जाते हैं। `0^@C` ताप पर ये . निष्क्रिय हो जाते हैं।
(4) इनकी कार्य-क्षमता अत्यधिक होती है। ये प्रति मिनट लाखों अणुओं को उत्प्रेरित कर सकते हैं।
(5) एन्जाइम की सूक्ष्म मात्रा ही क्रिया को प्रेरित कर देती हैं।
(6) एन्जाइम की क्रियाशीलता pH मान से प्रभावित होती है। pH मान की अधिकता या कमी इनकी कार्य-क्षमता को । प्रभावित या.नष्ट कर देती है।
(7) एन्जाइम नष्ट नहीं होते। एन्जाइम क्रिया के पश्चात् जैसे के तैसे बच जाते हैं।
(8) एन्जाइम सहकारक (cofactor) की उपस्थिति में क्रियाशील होते हैं। संहकारक प्रोस्थेटिक समूह (prosthetic group), सहएन्जाइम (coenzyme) या अकार्बनिक आयन (inorganic ions) होते हैं।
(9) एन्जाइम की क्रियाएँ प्रायः श्रृंखलाबद्ध होती हैं। एक एन्जाइम क्रिया का उत्पाद (product) दूसरे एन्जाइम के लिए क्रियाधार (substrate) का कार्य करता है।
(10) एन्जाइम सामान्यतया जल-अपघटन (hydrolysis), विकॉर्बोक्सिलीकरण (decarboxylation), ऑक्सीकरण व अवकरण (oxidation and reduction) आदि रासायनिक क्रियाओं को प्रेरित करते हैं।
नामकरण (Nomenclature)
नामकरण की साधारण पद्धति में एन्जाइम का नामकरण उस यौगिक के नाम में + ase अनुलग्न जोड़कर करते हैं जिस पर वह क्रिया करता है। उदाहरणार्थ-
`underset("माल्टोस")(C_12H_22O_11) + H_2O overset("माल्टोस")to underset("ग्लूकोस ")(2C_6H_12O_6)`
सामान्यतः सुक्रेस, सुक्रोस पर क्रिया करता है, ऐमाइलेज स्टार्च (एमाइलम) पर क्रिया करता है, यूरिऐज यूरिया पर क्रिया करता है, टायरोसिनेज टाइरोसिन पर क्रिया करता है। कुछ एन्जाइमों को उनके पारम्परिक नामों से जाना जाता है। उदाहरणार्थ-इमल्शिन, पेप्सिन, ट्रिप्सिन आदि। नामकरण की IUPAC पद्धति के अनुसार एन्जाइमों का उत्प्रेरित अभिक्रिया की प्रकृति के अनुसार नामकरण किया जाता है।
एन्जाइमों के उपयोग तथा इनकी कमी से होने वाले रोग
(1) एन्जाइम न्यूनता तथा रोगों से बचाव (Enzyme deficiencies and prevention of diseases) जैव तन्त्र में एन्जाइमों की न्यूनता से विभिन्न रोग उत्पन्न हो जाते हैं जिनमें से कुछ निम्नवत् हैं
(a) फेनिलऐलानीन हाइड्रॉक्सिलेज एन्जाइम की न्यूनता के कारण घातक रोग फेनिलकीटोन्यूरिया उत्पन्न हो जाते हैं। इस रोग के कारण मस्तिष्क आघात तथा बच्चों की वृद्धि रुक जाती है।
(b) टाइरोसिनेज एन्जाइम की न्यूनता से रंजकहीनता (albenism) उत्पन्न हो जाती है।
(c) नए शोध के अनुसार, एन्जाइम स्ट्रेप्टोकिन्स हृदयाघात को रोकने में सहायक है।
(2) औषधियों का उत्पादन (Production of medicines)-औषधियों जैसे इन्सुलिन तथा पेनिसिलीन का निर्माणं एन्जाइमों की सहायता से किया जाता है। इन्सुलिन का उपयोग मधुमेह रोग से पीड़ित मनुष्यों के उपचार में किया जाता है।
(3) औद्योगिक अनुप्रयोग (Industrial applications)-उदाहरणार्थ-
(a) शराब उद्योग में बीयर, शराब आदि में कार्बोहाइड्रेटों के किण्वन में।
(b) दूध के स्कन्दन से पनीर के निर्माण में।