Home
Class 10
BIOLOGY
पादपों में अलैंगिक जनन विधियों का संक्षि...

पादपों में अलैंगिक जनन विधियों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए ।

लिखित उत्तर

Verified by Experts

जीवधारियों में लैंगिक जनन (Sexual Reproduction in Livings)
जीवधारियों (प्राणी एवं पादप) में नर-तथा मादा युग्मकों (शुक्राणु तथा अण्डाणु) के संलयन (fusion) के फलस्वरूप .युग्मनज (zygote) बनता है। इसे निषेचन कहते हैं। युग्मनज से कोशिका विभाजन एवं विभेदीकरण के फलस्वरूप नये जीवधारी का विकास होता हैं। निषेचन एक ही जाति के सदस्यों के मध्य होता है। प्राणी सामान्यतया एकलिंगी और पौधे द्विलिंगी होते हैं।
(A) पौधों में लैंगिक जनन (Sexual Reproduction in Plants)
पुष्पी पौधों में लैंगिक जनन हेतु विशेष संरचनाएँ बनती हैं, इसे पुष्प कहते हैं। पुष्पों में नर तथा मादा जनन अंग क्रमशः पुंकेसर (stamen) तथा अण्डप (carpel) होते हैं। इसके अतिरिक्त पुष्प में सहायक जनन अंग के रूप में बाह्यदल (sepal) तथा दल (petal) होते हैं। पुष्पीय भाग पुष्पासन (receptacle) पर लगे होते हैं। . पुष्पीय भाग (Floral Parts)-पुष्प के निम्नलिखित भाग होते हैं
(i) बाह्यदल (Sepals)-यह पुष्म का सबसे बाहरी चक्र बाह्यदलपुंज (calyx) बनाते हैं। ये पुष्प की कलिका अवस्था में रक्षा करते हैं। हरे होने के कारण प्रकाश-संश्लेषण द्वारा भोजन का निर्माण भी करते हैं।
(ii) दल (Petals)-ये पुष्प का रंगीन भाग बनाते हैं। दल, बाह्यदल के भीतर की ओर स्थित होते हैं। रंगीन दल कीटों को आकर्षित करके परागण में सहायता करने तथा पुष्प के नर व मादा जनन अंगों की सुरक्षा करने का कार्य करते हैं।
(iii) पुंकेसर (Stamen)-ये दलपुंज से घिरे रहते हैं। पुंकेसर पुष्प (पौधे) का नर जनन अंग होते है। पुंकेसर के तीन भाग होते हैं-पतन्तु. योजि तथा परागकोश। परागकोश (anther) में लघुबीजाणुजनन द्वारा परागकणों (pollen grains) का निर्माण होता है। परागकण में दो नरंयुग्मक (male gametes) बनते हैं।
(iv) अण्डप (Carpel)-ये पुष्प का केन्द्रीय भाग बनाते हैं। अण्डप पुष्प का मादा जनन अंग होते हैं। प्रत्येक अण्डप के तीन भाग होते है-अण्डाशय, वर्तिका तथा वर्तिकान (ovary, style and stigma)| अण्डाशय में बीजाण्ड (ovule) बनता है। बीजाण्ड में मादा युग्मक बनता है।
परागण (Pollination)-परागकणों के परागकोश (anther) से वर्तिकार पर पहुँचने की क्रिया को परागण कहते हैं। परागण काट, वायु, जल, पक्षी, जन्तु द्वारा होता है। परागण दो प्रकार का होता है
(i) स्वपरागण (Self Pollination) जब एक पुष्प के परागकण उसी पुष्प के वर्तिकान पर या उसी पौधे के अन्य पुष्पों के वर्तिकान पर या कायिक जनन द्वारा तैयार अन्य पौधों के पुष्पों के वर्तिकान पर स्थानान्तरित होते है तो इसे स्वपरागण कहते हैं। क्योंकि परागकण तथा वर्तिकान की जीन संरचना समान होती है।
(ii) परपरागण (Cross Pollination)-जब एक पुष्प के परागकण लैंगिक प्रजनन द्वारा उत्पन्न किसी अन्य पौधे के पुष्प, जिसकी जीन संरचना भिन्न होती है, के वर्तिकान पर पहुँचते हैं तो इसे परपरागण कहते हैं। लैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न सन्तानों की जीन संरचना भिन्न होती है।
नियेचन एवं भ्रूणीय विकास (Fertilization and Development of Embryo)-परागण के फलस्वरूप परागकण वर्तिकान पर पहुँचकर अंकुरित होते हैं। परागकण से पराग नलिका (pollen tube) निकलती है जो नर युग्मकों को बीजाण्ड (ovule) में स्थित भ्रूणकोष (embryo sac) के अन्दर पहुंचाती है। भ्रूणकोष में पहुँचकर पराग नलिका फट जाती है और नर युग्मक मुक्त हो जाते हैं। एक नर युग्मक अण्ड कोशिका से मिलकर युग्मनज (zygote) बनाता है। इस प्रक्रिया को वास्तविक निषेचन या युग्मक संलयन (syngamy) कहते हैं। युग्मनज वृद्धि तथा विभाजन द्वारा भ्रूण (Embryo) का निर्माण करता है। अन्य नर युग्मक द्वितीयक केन्द्रक (secondary nucleus) अथवा दो ध्रुवीय केन्द्रकों से मिलकर त्रिगुणित भ्रूणपोष केन्द्रक (endospermic nucleus) बनाता है। इस प्रक्रिया को त्रिसंलयन कहते हैं। इससे त्रिगुणित भ्रूणपोष (endosperm) का विकास होता है। भ्रूणपोष विकासशील भ्रूण के लिए भोजन प्रदान करता है। बीजाण्ड में युग्मक संलयन (syngamy) तथा त्रिसंलयन (triple fusion) को दोहरा निषेचन (double fertilization) कहते हैं। निषेचन के पश्चात् बीजाण्ड से बीज तथा सम्पूर्ण अण्डाशय से फल बनता है।
भ्रूणीय विकास की निश्चित अवधि के पश्चात् अण्डों से नवजात शिशु मुक्त हो जाते है। पक्षी अण्डों को सेते हैं, जैसेमुर्गी अपने निषेचित अण्डों पर बैठकर उन्हें गर्मी प्रदान करती है। इसके फलस्वरूप अण्डे से चूजा मुक्त होता है। स्तनियों में निषेचित अण्डे गर्भाशय में स्थापित हो जाते हैं। निषेचित अण्डे के भ्रूणीय विकास के फलस्वरूप नवजात शिशु का विकास होता है। भूणीय विकास हेतु पोषण मादा (स्त्री) के शरीर से आंवल या जरायु (placenta) द्वारा प्राप्त होता है। स्तनी प्राणी जरायुग (viviparous) कहलाते हैं। मानव भी स्तनी प्राणी है।
Promotional Banner

टॉपर्स ने हल किए ये सवाल

  • जीव जनन कैसे करते है ?

    CHITRA PUBLICATION|Exercise अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (लघु उत्तरीय प्रश्न)|31 Videos
  • जीव जनन कैसे करते है ?

    CHITRA PUBLICATION|Exercise अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (अति लघु उत्तरीय प्रश्न)|27 Videos
  • जीव जनन कैसे करते है ?

    CHITRA PUBLICATION|Exercise NCERT विज्ञान प्रश्न प्रदर्शिका (Science Exemplar Problems) पुस्तक से चयनित महत्त्वपूर्ण प्रश्नों के हल (विस्तृत उत्तरीय प्रश्न)|3 Videos
  • ऊर्जा के स्रोत

    CHITRA PUBLICATION|Exercise स्वयं को जाँचिए (TEST YOURSELF )|15 Videos
  • जैव प्रक्रम

    CHITRA PUBLICATION|Exercise स्वय को जांचिए |15 Videos
CHITRA PUBLICATION-जीव जनन कैसे करते है ?-अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (विस्तृत उत्तरीय प्रश्न)
  1. जनन के विभिन्न प्रकारों कि व्याख्या संक्षेप में कीजिए ।

    Text Solution

    |

  2. कृत्रिम कायिक प्रवर्धन की दो विधियों के नाम लिखिए ।

    Text Solution

    |

  3. पादपों में अलैंगिक जनन विधियों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए ।

    Text Solution

    |

  4. किसी पुष्प के जननांगों का वर्णन कीजिए।

    Text Solution

    |

  5. पुष्प का चित्र बनाकर उसमें नर और मादा जनन अंगों को दर्शाइए।

    Text Solution

    |

  6. परागण क्या है? स्वपरागण तथा परपरागण का वर्णन कीजिए।

    Text Solution

    |

  7. स्त्री के जनन अंगों का वर्णन कीजिए। इसमें अण्डाणु का निर्माण कहाँ होता...

    Text Solution

    |

  8. मानव के नर जनन तन्त्र का स्वच्छ नामांकित चित्र बनाइए।

    Text Solution

    |

  9. स्त्री के जनन अंगों का सचित्र वर्णन कीजिए।

    Text Solution

    |

  10. नर जनन तंत्र का नामांकित चित्र बनाइए।

    Text Solution

    |