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निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गये प्र...

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गये प्रश्नों
शासन की पहुँच प्रवृत्ति और निवृत्ति की बाहरी व्यवस्था तक ही होती है। उनके मूल या मर्म तक उनकी गति नहीं होती। भीतरी या सच्ची प्रवृत्ति निवृत्ति को जागरित रखने वाली शक्ति कविता है जो धर्म के क्षेत्र में शक्ति भावना को जगाती रहती है। भक्ति धर्म की रसात्मक अनुभूति है। अपने मंगल और लोक मंगल का संगम उसी के भीतर दिखाई पड़ता है। इस संगम के लिए प्रकृति के क्षेत्र के बीच मनुष्य को अपने हृदय के प्रसार का अभ्यास करना चाहिए। जिस प्रकार ज्ञान नरसत्ता के प्रसार के लिए है उसी प्रकार हृदय भी। रागात्मिका वृत्ति के प्रसार के बिना विश्व के साथ जीवन का सामंजस्य घटित नहीं हो सकता। जब मनुष्य के सुख और आनंद का मेल शेष प्रकृति के सुख -सौंदर्य के साथ हो जाएगा, जब उसकी रक्षा का भाव तूणगुल्म, वृक्ष-लता, पशु-पक्षी, कीट-पतंग सबकी रक्षा के भाव के साथ समन्वित हो जाएगा, तब उसके अवतार का उद्देश्य पूर्ण हो जाएगा और वह जगत् का सच्चा प्रतिनिधि हो जाएगा। काव्य योग की साधना इसी भूमि पर पहुँचाने के लिए है।
किस वृत्ति के प्रसार से संसार के साथ जीवन का प्रकृत सामंजस्य होता है?

A

धर्म वृत्ति के प्रसार से बाहर

B

आनन्द वृत्ति के प्रसार से

C

रागात्मिका वृत्ति के प्रसार से

D

कर्म वृत्ति के प्रसार से

लिखित उत्तर

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