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Class 14
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शिक्षा चाहती है कि उसको अपने समाज से जोड...

शिक्षा चाहती है कि उसको अपने समाज से जोड़ा जाय, लोगों से जोड़ा जाय और हर विद्यार्थी को ऐसी लोकोन्मुख दृष्टि दी जाय कि सर्वोदय को अपना धर्म-कर्म मानने लगे। दरअसल यह समझना जरूरी है कि शिक्षा को शिक्षित करने का सबसे बड़ा स्थान समाज ही है। समाज की करुण कथाएँ एवं समाज में गरीब से गरीब का अर्थशास्त्र शिक्षा को शिक्षित करने में समर्थ है। शिक्षा के लिए तथ्य और तत्व दोनों ढूँढ़ने का सही स्थान समाज ही है। समाज में रहने वाले विलक्षण प्रतिभाशाली लोगों से पृथक कोई भी शैक्षिक व्यवस्था अपने को सम्पन्न नहीं बना सकती। समाज के विश्लेषण से ही सच्ची शिक्षा सम्पन्न हो सकती है। इस तरह से शिक्षा अपने को सींचने का दाना-पानी समाज से ले सकती है और समाज को कुछ वापस कर सकती है। ऐसी लोकोपयोगी शिक्षा समाज को और फिर राष्ट्र को ओजस्वी और तेजस्वी बनाने में सफल होगी।
लोकोन्मुख दृष्टि का क्या आशय है?

A

समाजिक परंपराओं का बोध

B

समाज के बहुमुखी विकास की सोच

C

लौकिक विकास के प्रति चिन्तनपरता

D

लोकादर्शों से परे कार्य करने का भाव।

लिखित उत्तर

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